उत्तर प्रदेश विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र आज राजनीतिक तौर पर बेहद अहम माना जा रहा है। इस सत्र का केंद्र महिला आरक्षण, यानी ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ से जुड़े मुद्दे हैं। योगी सरकार इस मौके पर विपक्ष को घेरने की पूरी तैयारी में है और निंदा प्रस्ताव लाने जा रही है। यह प्रस्ताव वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना सदन में पेश करेंगे। इसके बाद विभिन्न दलों के नेताओं और विधायकों के बीच इस पर चर्चा होगी। शाम को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संबोधन भी तय है, जिसमें सरकार अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकती है।
सरकार का आरोप: विपक्ष ने रोका महिला सशक्तीकरण
सरकार का दावा है कि महिला आरक्षण विधेयक को लेकर विपक्ष का रुख बाधक रहा है। भाजपा का कहना है कि वह महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन विपक्ष ने संसद में इस बिल को पारित नहीं होने दिया। इसी पृष्ठभूमि में यह विशेष सत्र बुलाया गया है। सरकार महिला सुरक्षा, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक भागीदारी जैसे मुद्दों पर भी चर्चा को आगे बढ़ाना चाहती है। खास बात यह है कि इस बहस में महिला विधायकों को अधिक समय दिए जाने की योजना है, ताकि उनके दृष्टिकोण को प्रमुखता मिल सके।
विपक्ष की रणनीति: पलटवार और प्रदर्शन की तैयारी
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस भी इस सत्र को लेकर पूरी तरह सक्रिय हैं। सपा ने हाल ही में अपने कार्यालय में बैठक कर महिला मुद्दों पर चर्चा की और सरकार के खिलाफ अपना निंदा प्रस्ताव पारित किया। अखिलेश यादव की अगुवाई में विधायकों को निर्देश दिया गया है कि वे सदन में सक्रिय भूमिका निभाएं और महिला आरक्षण समेत अन्य मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाएं। सपा 2023 की जनगणना के आधार पर आरक्षण लागू करने की मांग दोहरा रही है। कांग्रेस भी विपक्षी दलों के साथ तालमेल बनाकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। इसके अलावा सपा विधायकों द्वारा विधानसभा परिसर में प्रदर्शन की भी योजना है, जिससे सत्र के दौरान माहौल और गरम हो सकता है।
सदन में और क्या होगा? अध्यादेश भी पेश होंगे
इस विशेष सत्र में प्रश्नकाल नहीं होगा, लेकिन कई अहम अध्यादेश सदन में रखे जाएंगे। इनमें राजस्व संहिता संशोधन, निजी विश्वविद्यालय संशोधन, वानिकी और औद्योगिकी विश्वविद्यालय जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। परामर्शदात्री समिति की बैठक में सभी दलों ने सदन की गरिमा बनाए रखने और सार्थक चर्चा करने पर सहमति जताई है। हालांकि, जिस तरह से दोनों पक्ष आक्रामक रुख में हैं, उसे देखते हुए हंगामे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
2027 चुनाव की झलक? सियासी रणनीति साफ
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह विशेष सत्र सिर्फ विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी का हिस्सा भी है। भाजपा महिला वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश में है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक स्टंट बता रहा है। आम जनता के लिए यह सत्र इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर नीति और राजनीति दोनों की दिशा तय होती दिख रही है। अब देखना होगा कि यह बहस ठोस नतीजों तक पहुंचती है या सियासी आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रह जाती है।


