प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 मई को गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर पहुंच रहे हैं। उन्होंने एक लेख के माध्यम से इस यात्रा की जानकारी दी। वर्ष 2026 की शुरुआत में उन्होंने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में हिस्सा लिया था, जो मंदिर पर पहले हमले के 1000 वर्ष पूरे होने का अवसर था। अब 11 मई को वे उस ऐतिहासिक क्षण की 75वीं वर्षगांठ मनाने जा रहे हैं, जब भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने पुनर्निर्मित मंदिर का उद्घाटन किया था।
यह यात्रा करोड़ों भारतीयों के लिए भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण है। सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि ध्वंस से सृजन तक की यात्रा का प्रतीक है। आम नागरिक इससे प्रेरणा लेते हैं कि चाहे कितनी भी विपरीत परिस्थितियां हों, आस्था और संकल्प से फिर से खड़ा होना संभव है।
छह महीने में दो ऐतिहासिक पड़ाव
पीएम मोदी ने इसे सौभाग्य की बात बताई कि मात्र छह महीने के अंदर वे सोमनाथ से जुड़े दो महत्वपूर्ण अवसरों का हिस्सा बन रहे हैं। उन्होंने ‘विध्वंस से सृजन’ तक के सफर को याद किया। विशाल समुद्र की लहरें उन्हें याद दिलाती हैं कि तूफान कितने भी भयंकर हों, इंसान गरिमा के साथ उठ खड़ा हो सकता है।
शास्त्रों में कहा गया है – “प्रभासं च परिक्रम्य पृथिवीक्रमसंम्” अर्थात सोमनाथ की एक प्रदक्षिणा पूरी पृथ्वी की प्रदक्षिणा के बराबर मानी जाती है। पीएम मोदी ने यहां सभ्यता की निरंतरता का जिक्र किया। साम्राज्य आए और गए, लेकिन सोमनाथ की लौ कभी बुझी नहीं।
इतिहास के उन गुमनाम और प्रसिद्ध नायकों को श्रद्धांजलि
लेख में पीएम मोदी ने उन सभी महान व्यक्तियों को याद किया जिन्होंने सदियों तक सोमनाथ की रक्षा और पुनर्निर्माण में योगदान दिया। लकुलीश, सोम सरमन, महाराजा धरसेन चतुर्थ, भीम देव, जयपाल, आनंदपाल, राजा भोज, सिद्धराज जयसिंह, कुमारपाल सोलंकी, अहिल्याबाई होल्कर, गायकवाड़ और वीर हमीरजी गोहिल, वीर वेगडाजी भील जैसे नाम शामिल हैं।
1940 के दशक में जब देश आजादी की लड़ाई लड़ रहा था, तब सरदार पटेल को सोमनाथ की दुर्दशा चिंतित करती थी। 13 नवंबर 1947 को उन्होंने मंदिर के खंडहरों के पास खड़े होकर पुनर्निर्माण का संकल्प लिया। सरदार पटेल का सपना श्री के.एम. मुंशी और नवानगर के जामसाहब के सहयोग से पूरा हुआ। 1951 में मंदिर बनकर तैयार हुआ तो डॉ. राजेंद्र प्रसाद उद्घाटन के लिए पहुंचे, भले ही उस समय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने विरोध जताया था।
व्यक्तिगत स्मृतियां और प्रेरणादायक संदेश
पीएम मोदी ने अपनी यादों का भी जिक्र किया। अक्टूबर 2001 में जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे, तब सरदार पटेल की जयंती पर सोमनाथ मंदिर के 50 वर्ष पूरे होने का कार्यक्रम आयोजित हुआ था। उस समय अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी भी मौजूद थे।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 11 मई 1951 को अपने भाषण में कहा था कि सोमनाथ यह संदेश देता है कि आस्था और प्रेम से जुड़ी चीज को कभी नष्ट नहीं किया जा सकता। उन्होंने आशा जताई कि यह मंदिर हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेगा। पीएम मोदी की यह यात्रा सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक निरंतरता को मजबूत करने वाली है। यह उन लाखों लोगों को प्रेरित करती है जो अपनी जड़ों, आस्था और सभ्यता के गौरव पर गर्व करते हैं। 11 मई को सोमनाथ में एक बार फिर इतिहास की गूंज सुनाई देगी।



