तमिलनाडु में सरकार बनाने का सस्पेंस बरकरार: विजय के दावे पर AMMK का बड़ा विवाद

तमिलनाडु में सरकार बनाने का सस्पेंस बरकरार: विजय के दावे पर AMMK का बड़ा विवाद

तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों सस्पेंस की घड़ी चल रही है। 234 सदस्यों वाली विधानसभा में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत हासिल करने के लिए उसे अन्य दलों का समर्थन चाहिए। टीवीके के नेता और अभिनेता विजय ने तीन दिनों के अंदर तीसरी बार राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मुलाकात की और सरकार बनाने का दावा पेश किया।

हालांकि अभी तक समर्थन की पूरी तस्वीर साफ नहीं हुई है। आम नागरिकों के लिए यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में स्थिर सरकार न बन पाने से विकास कार्यों, रोजगार और कानून-व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

सीटों का गणित और मिला समर्थन

टीवीके ने 108 सीटें जीती हैं, लेकिन विजय दो सीटों से जीते होने के कारण पार्टी के पास 107 विधायक हैं। बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत है। कांग्रेस ने 5, CPI ने 2 और CPI(M) ने 2 विधायकों का बिना शर्त समर्थन दिया है। इस तरह अभी 116 सीटों का आंकड़ा साफ है। दो सीटों पर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।

कई राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि टीवीके सदन में बहुमत साबित करने में अभी पूरी तरह सफल नहीं हो पाई है। राज्यपाल के सामने पेश किए गए दावे में कुछ महत्वपूर्ण दलों का लिखित समर्थन अभी तक स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया है।

AMMK समर्थन पर छिड़ा विवाद

सबसे बड़ा विवाद AMMK पार्टी से जुड़ा हुआ है। टीवीके ने एक वीडियो जारी करके दावा किया कि AMMK के नवनिर्वाचित विधायक कामराज ने स्वेच्छा से पार्टी को समर्थन देने वाला पत्र लिखा है।

लेकिन AMMK महासचिव टीटीवी दिनाकरन ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि कामराज का समर्थन NDA और AIADMK गठबंधन के साथ है। दिनाकरन राज्यपाल से मिलने पहुंचे और असली पत्र सौंपा, जिसमें उन्होंने एडप्पादी के. पलानीस्वामी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बताया।

दिनाकरन का आरोप है कि टीवीके ने जाली जेरॉक्स कॉपी राज्यपाल को सौंपी है। उन्होंने इसे जालसाजी बताया और आपराधिक शिकायत दर्ज कराने की घोषणा की। साथ ही उन्होंने अन्य दलों से समर्थन जुटाने और राज्यपाल के सामने अपनी बात रखने की बात कही।

VCK का समर्थन अभी अनिश्चित

सूत्रों के अनुसार, विदुथलाई चिरुथैगल कझगम (VCK) से स्पष्ट लिखित समर्थन अभी तक टीवीके को नहीं मिल सका है। गवर्नर को सौंपे गए ज्ञापन में VCK का कोई पत्र शामिल नहीं था।

यह पूरा मामला तमिलनाडु की राजनीति की जटिलता को दिखाता है। जहां एक तरफ टीवीके नई उम्मीद बनकर उभरी है, वहीं पारंपरिक दलों के बीच गठबंधन और दावों की लड़ाई तेज हो गई है।

आम पाठक इस स्थिति को चिंता के साथ देख रहे हैं। अगर जल्दी स्थिर सरकार नहीं बनी तो राज्य के विकास योजनाओं और रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान टल सकता है। राज्यपाल अब सभी दलों के दावों और समर्थन पत्रों की जांच कर रहे हैं।

आने वाले कुछ दिनों में स्थिति साफ होने की उम्मीद है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सत्ता का यह सस्पेंस कितना लंबा चलेगा और अंत में किस गठबंधन को मौका मिलेगा।