दुनिया भर में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध ने ग्लोबल सप्लाई चेन को बुरी तरह झकझोर दिया है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और कमोडिटी की कीमतों पर पड़ा है। इस वैश्विक संकट की आंच से भारतीय अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब को बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बेहद व्यावहारिक आर्थिक रणनीति पेश की है। रविवार को तेलंगाना में 9,400 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करते हुए पीएम मोदी ने देशवासियों से अपनी जीवनशैली में कुछ अहम बदलाव करने का आग्रह किया है। इसमें वर्क फ्रॉम होम की वापसी से लेकर, सीमित ईंधन खर्च और एक साल तक सोना न खरीदने जैसी बड़ी अपील शामिल हैं।
सोने की चमक और विदेशी शादियों पर ‘ब्रेक’ की जरूरत क्यों?
भारतीय संस्कृति में सोने का विशेष महत्व है, लेकिन अर्थशास्त्र के नजरिए से यह हमारी विदेशी मुद्रा का एक बहुत बड़ा हिस्सा सोख लेता है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि जब हम विदेशों से सोना खरीदते हैं या डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए विदेश जाते हैं, तो देश का कीमती विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) खर्च होता है। मौजूदा संकट के दौर में विदेशी मुद्रा को बचाना एक राष्ट्रीय आवश्यकता है। उन्होंने देशवासियों से अपील की है कि वे राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए कम से कम एक साल तक अपने किसी समारोह के लिए सोने की खरीदारी टाल दें और विदेश यात्राओं से परहेज करें। यह छोटा सा त्याग विदेशी मुद्रा बचाने में गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
वर्क फ्रॉम होम और ईंधन बचाने का नया ‘इकोनॉमिक फॉर्मूला’
अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल और डीजल की आसमान छूती कीमतों ने भारत का आयात बिल काफी बढ़ा दिया है। इस आर्थिक बोझ को कम करने के लिए पीएम मोदी ने कोविड महामारी के दौरान अपनाए गए ‘वर्क फ्रॉम होम’, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और ऑनलाइन मीटिंग्स के मॉडल को फिर से प्राथमिकता देने की सलाह दी है। इसके अलावा, उन्होंने परिवहन के तरीकों में भी बदलाव की जरूरत पर जोर दिया है। उनका स्पष्ट संदेश है कि जहां मेट्रो की सुविधा उपलब्ध है, वहां पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें। अगर कार से जाना जरूरी हो तो कारपूलिंग अपनाएं। वहीं, माल ढुलाई के लिए सड़कों के बजाय रेलवे का उपयोग होना चाहिए, ताकि बिजली से चलने वाली ट्रेनों के जरिए पेट्रोल-डीजल की भारी बचत की जा सके।
रसोई के तेल से लेकर खेतों की खाद तक… बदलाव की अपील
ईंधन के अलावा दो अन्य क्षेत्र हैं जो हमारे विदेशी मुद्रा भंडार पर सबसे ज्यादा दबाव डालते हैं—खाने का तेल और रासायनिक खाद। प्रधानमंत्री ने आम घरों से खाद्य तेल का सीमित और समझदारी से इस्तेमाल करने को कहा है। यह कदम न सिर्फ खाने के तेल का आयात बिल घटाएगा, बल्कि परिवार के हर सदस्य के स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होगा।
कृषि क्षेत्र को लेकर उन्होंने कहा कि हमें विदेशों से भारी मात्रा में केमिकल फर्टिलाइजर मंगाना पड़ता है। वैश्विक बाजार में खाद का जो बैग लगभग 3000 रुपये का बिक रहा है, उसे सरकार भारी सब्सिडी का बोझ उठाकर भारतीय किसानों को 300 रुपये से भी कम में मुहैया करा रही है। इसलिए अब समय आ गया है कि रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता आधी की जाए और प्राकृतिक खेती (Natural Farming) की ओर तेजी से कदम बढ़ाए जाएं।
9,400 करोड़ के प्रोजेक्ट्स और भारत की ‘एनर्जी सिक्योरिटी’
हैदराबाद से अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने देश की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) पर सरकार के फोकस को भी मजबूती से रखा। भारत आज सौर ऊर्जा (Solar Power) क्षमता, पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग और सीएनजी-पीएनजी इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार में दुनिया के टॉप देशों में शामिल हो रहा है।
इस दौरान तेलंगाना के इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास को गति देने के लिए जिन 9,400 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स की शुरुआत की गई, उनमें हैदराबाद-पणजी इकोनॉमिक कॉरिडोर पर गुडेबेलूर से महबूबनगर के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग-167 को फोर-लेन बनाना, काजीपेट-विजयवाड़ा रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग, हैदराबाद में ग्रीनफील्ड पेट्रोलियम टर्मिनल और वारंगल का काकतीय मेगा टेक्सटाइल पार्क (पीएम मित्र पार्क) प्रमुख रूप से शामिल हैं।


