नई दिल्ली: 2019 की हिट फिल्म ‘पति पत्नी और वो’ के सीक्वल ने बॉलीवुड में फिर से हलचल मचा दी है। इस बार आयुष्मान खुराना प्रयागराज की पृष्ठभूमि में पति का किरदार निभाते नजर आ रहे हैं। निर्देशक मुदस्सर अजीज की यह फिल्म दिमाग को आराम देने और खुलकर हंसने का मौका ढूंढ रहे दर्शकों के लिए एक विकल्प लेकर आई है। लेकिन क्या यह सीक्वल अपनी पूर्ववर्ती फिल्म जितना असर छोड़ पाता है?
फिल्म छोटे शहर की साधारण जिंदगी और उसकी उलझनों को केंद्र में रखकर चलती है। जो लोग इस वीकेंड हल्की-फुल्की कॉमेडी की तलाश में हैं, उनके लिए यह फिल्म थिएटर में दो घंटे का मनोरंजन साबित हो सकती है।
कहानी: झूठ की एक ऐसी श्रृंखला जो सबको उलझा दे
कहानी प्रयागराज से शुरू होती है। आयुष्मान खुराना प्रजापति पांडेय बने हैं, जो वन विभाग में फॉरेस्ट इन-चार्ज हैं। उनकी पत्नी अपर्णा (वामिका गब्बी) पत्रकार हैं और नीलोफर (रकुल प्रीत सिंह) उनकी सहयोगी। शांत चल रही जिंदगी में अचानक पुरानी क्लासमेट चंचल (सारा अली खान) की एंट्री होती है।
चंचल एक मुश्किल स्थिति में है और प्रजापति उसकी मदद में अपना नकली पति बनने का झूठ बोल बैठते हैं। यह एक झूठ आगे चलकर इतना बड़ा रूप ले लेता है कि पूरा मामला नेशनल स्तर का कन्फ्यूजन बन जाता है। गजब की गलतफहमियां, परिवार, नेता और एक बाहुबली पिता (तिग्मांशु धूलिया) के बीच फंसे प्रजापति की मुश्किलें फिल्म की जान हैं।
फिल्म कैसी बनी है? हंसी और शोर का अनोखा मिश्रण
‘पति पत्नी और वो 2’ पूरी तरह लॉजिक-लेस, जोरदार और ओवर-द-टॉप कॉमेडी है। फिल्म का पहला हिस्सा किरदारों को स्थापित करने और स्थिति तैयार करने में गुजरता है। दूसरे हिस्से में गलतफहमियां चरम पर पहुंचती हैं। यहां आयुष्मान खुद को ऐसी उलझनों में फंसा पाते हैं जहां उनकी पहचान तक संदिग्ध हो जाती है।
फिल्म में एक आदमखोर भेड़िया, पुराने अंदाज का ऑफिस बॉय और देसी स्वाद भरे डायलॉग्स हैं। मुदस्सर अजीज ने जानबूझकर फिल्म को काफी लाउड और शोर भरा रखा है। यह शैली कुछ दर्शकों को पसंद आएगी तो कुछ को थका भी देगी।
अभिनय और तकनीकी पक्ष
आयुष्मान खुराना इस फिल्म में पूरी तरह फिट बैठते हैं। छोटे शहर के लाचार पति के रोल में उनकी कॉमिक टाइमिंग और स्लैपस्टिक एक्टिंग देखने लायक है। वामिका गब्बी पत्नी के किरदार में मजबूत और विश्वसनीय नजर आईं। रकुल प्रीत सिंह ने संजीदगी से अपना पार्ट निभाया है।
सारा अली खान अपनी ओवर-द-टॉप स्टाइल में चंचल के रोल में रंग जमाती हैं। लेकिन फिल्म की असली ताकत सपोर्टिंग कास्ट है। आयशा रजा की बुआ जी वाली भूमिका फिल्म का सबसे मजेदार हिस्सा है। तिग्मांशु धूलिया और विजय राज जैसे कलाकारों ने भी अपने किरदारों को यादगार बना दिया है।
तकनीकी रूप से फिल्म ठीक है। जानवरों के सीन बेहतर लगते हैं और गाने पुरानी बॉलीवुड वाली मस्ती देते हैं।
अंतिम फैसला: कब और किसे देखनी चाहिए?
अगर आप भारी सस्पेंस या गहरी फिल्मों से ब्रेक चाहते हैं और बस दो घंटे ठहाके लगाना चाहते हैं तो ‘पति पत्नी और वो 2’ एक ठीक विकल्प है। फिल्म ज्यादा लंबी नहीं है और जल्दी खत्म हो जाती है।
हालांकि इसमें कुछ कमियां भी हैं। कई जोक्स खिंचे हुए लगते हैं, फिल्म काफी शोर वाली है और एक गे किरदार को पुराने घिसे-पिटे तरीके से दिखाया गया है, जो आज के समय में खलता है।
कुल मिलाकर यह फिल्म उन दर्शकों के लिए बनी है जो सिनेमाई बारीकियों की बजाय शुद्ध मनोरंजन चाहते हैं। आयुष्मान खुराना की कॉमेडी ऑफ एरर्स आपको हंसाएगी, लेकिन ज्यादा उम्मीद मत रखिए।


