आम आदमी पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन का वीडियो वायरल, उपद्रवियों के साथ हाथ में डंडा लिए दिख रहें हैं ताहिर

राजधानी दिल्ली हिंसा की आग में झुलस रही है। हिंसा के चलते कई लोगों को अपनी जान गवानी पड़ी, तो वहीं कई लोग घायल हो गए। अब हिंसा रोकने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को दी गई है। जिसके बाद से माहौल शांत हैं। लेकिन इन सब के बीच बुधवार की रात आम आदमी पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन का वीडियो वायरल हुआ जिसमें वे हाथ में डंडा लिए अपने घर की छत पर साफ देखे जा सकते हैं।

हालांकि, ताहिर ने आरोपों पर अपना बचाव करते हुए कहा है कि उनकी छत पर जबरन लोग चढ़ आए थे और पुलिस की मदद से उसे खाली कराया गया।

दरअसल वीडिया बीजेपी नेता कपिल मिश्रा की तरफ से शेयर किया गया था, जिसमें कपिल मिश्रा दावा कर रहें हैं कि मैरून स्वेटर पहने आम आदमी पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन हैं। कपिल मिश्रा ने ट्वीट किया मैरून हॉफ स्वेटर में हैं AAP का निगम पार्षद ताहिर हुसैन हाथ में लाठी, छत में नकाब लगाए लड़के इसी छत से पथराव हुआ, पेट्रोल बम फेंके गए, गोलियां चली IB अधिकारी अंकित शर्मा के परिवार के मुताबिक इन्ही लड़को ने हत्या की ये लगातार केजरीवाल से बात कर रहा था।

 

भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने एक ट्वीट में ताहिर पर आरोप लगाया है कि स्थानीय लोगों ने आप के नगरसेवक मोहम्मद ताहिर हुसैन की हिंदुओं के खिलाफ हिंसा में भूमिका निभाने के वीडियो भेज रहे हैं।ये केजरीवाल की चुप्पी का अध्ययन करता है कि उन्होंने न तो अपने विधायकों को बैठक के लिए बुलाया और न ही उन्होंने मौलवियों से पूछा। जिन्हें उनकी सरकार पैसे देकर शांति की अपील करवाती है।

 

सोशल मीडिया पर शेयर हो रहे विडियो में छत पर कई युवक दिख रहे हैं और नीचे पत्थर फेंक रहे हैं और कुछ के हाथ में डंडा भी दिख रहा है और उनके साथ डंडा लिए ताहिर भी हैं। यह विडियो सामने के छत से बनाया गया है जिसमें महिलाएं व पुरुष की आवाज आ रही है। बैक ग्राउंड से शोर-शराबे की आवाज आ रही है जिससे लग रहा है कि नीचे हिंसा हो रही है। विडियो में महिलाएं व पुरुष बोलते हुए सुने जा रहे हैं कि ताहिर ने छत पर लोगों को जमा किया है और उनसे पत्थर फिकवा रहे हैं और दंगे करवा रहे हैं।

वीडियो वायरल होने के बाद ताहिर हुसैन ने अपना वीडियो जारी कर सफाई दी।

वायरल वीडियो पर सफाई देते हुए ताहिर हुसैन ने कहा कि परसों हमारे इलाके में भी हिंसा हो रही थी। हमने पुलिस को फोन किया। भारी भीड़ हमारे ऑफिस का गेट तोड़कर हमारे छत पर पहुंच गई। मैं लगातार पुलिस के संपर्क में था। पुलिस आई और उनकी निगरानी में पूरी बिल्डिंग की जांच हुई और मुझे मेरे परिवार के साथ सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। मुझे कहा गया है कि यहां रहना सुरक्षित नहीं है।’