अखिलेश यादव के रायबरेली दौरे से पहले शहर में लगा एक पोस्टर चर्चा का विषय बन गया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख को इस पोस्टर में भगवान कृष्ण के रूप में दिखाया गया है। सिर पर मोरपंख वाला मुकुट, पीले वस्त्र और हाथ में बांसुरी के साथ अखिलेश यादव की तस्वीर लगाई गई है। पोस्टर में एक स्थानीय पार्टी कार्यकर्ता को सुदामा के रूप में दिखाया गया है। इसमें अखिलेश यादव को ‘PDA महानायक’ बताते हुए लिखा गया है- ‘मेरे माधव, सुदामा की धरती रायबरेली में आपका स्वागत है!’
यह पोस्टर ऐसे समय लगाया गया है, जब अखिलेश यादव अपने PDA रथ से रायबरेली पहुंचने वाले हैं। पोस्टर को समाजवादी पार्टी युवजन सभा के प्रदेश सचिव और अधिवक्ता विश्वास दुबे ने मुख्य सड़क पर लगवाया है। पोस्टर सामने आने के बाद इसे लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।
अखिलेश के रायबरेली पहुंचने से पहले क्यों चर्चा में आया पोस्टर?
रायबरेली दौरे के दौरान अखिलेश यादव की मुलाकात हरचंदपुर से सपा विधायक राहुल लोधी से भी होनी है। बताया गया है कि वह लोधी के घर चाय पर मिलने पहुंचेंगे।
इसी दौरे से पहले कृष्ण और सुदामा की तस्वीर वाला यह बड़ा पोस्टर सामने आया। पोस्टर में धार्मिक प्रतीकों और राजनीतिक संदेश को एक साथ रखा गया है। अखिलेश यादव को कृष्ण और स्थानीय कार्यकर्ता को सुदामा के रूप में पेश किया गया है।
पोस्टर पर लिखे संदेश में रायबरेली को सुदामा की धरती बताया गया है। हालांकि, यह पोस्टर पार्टी के किसी आधिकारिक कार्यक्रम की थीम है या स्थानीय कार्यकर्ताओं की ओर से लगाया गया स्वागत बैनर, इसकी अलग से पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
विधायक राहुल लोधी ने पोस्टर का कैसे बचाव किया?
पोस्टर पर प्रतिक्रिया देते हुए सपा विधायक राहुल लोधी ने इसका बचाव किया। उन्होंने भगवान कृष्ण और सुदामा के संबंध का हवाला देते हुए कहा कि दोनों द्वापर युग में साथी थे और उसी परंपरा को पोस्टर में दिखाया गया है।
लोधी ने इस मौके पर बीजेपी पर भी राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी की राजनीति समाज को बांटने की कोशिश करती है और जाति के आधार पर लोगों को विभाजित किया जाता है।
ये उनके राजनीतिक आरोप हैं। बीजेपी की ओर से इस विशेष पोस्टर पर क्या प्रतिक्रिया है, इसकी जानकारी दिए गए इनपुट में नहीं है।
पोस्टर को लेकर सियासी बहस का एक पहलू यह भी है कि इसमें धार्मिक संदर्भ का इस्तेमाल एक राजनीतिक नेता के स्वागत के लिए किया गया है। हालांकि, पोस्टर लगाने वालों की ओर से इसे कृष्ण-सुदामा की पारंपरिक मित्रता के प्रतीक के तौर पर पेश किया गया है।
PDA रथ और रायबरेली दौरे का क्या कनेक्शन है?
अखिलेश यादव का यह दौरा पार्टी के PDA रथ कार्यक्रम से जुड़ा बताया गया है। PDA समाजवादी पार्टी की राजनीतिक शब्दावली में पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों के संदर्भ में इस्तेमाल किया जाता रहा है।
रायबरेली में अखिलेश यादव के कार्यक्रम के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी भी रहेगी। ऐसे में दौरे से पहले लगाए गए पोस्टर ने स्थानीय राजनीतिक माहौल में एक अलग चर्चा जरूर पैदा कर दी है।
खास बात यह है कि अखिलेश यादव की रायबरेली यात्रा केवल राजनीतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। उनका विधायक राहुल लोधी के घर जाना हालिया विवाद की पृष्ठभूमि में भी देखा जा रहा है।
छात्र संगठनों की झड़प के बाद हो रही है मुलाकात
अखिलेश यादव और राहुल लोधी की मुलाकात ऐसे समय हो रही है, जब समाजवादी छात्र सभा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं के बीच हाल में झड़प हुई थी।
इस घटनाक्रम के बाद राहुल लोधी ने आरोप लगाया था कि स्थानीय पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की। हालांकि, जिला पुलिस प्रशासन ने इन आरोपों से इनकार किया है।
ऐसे में अखिलेश यादव का रायबरेली पहुंचना और विधायक के घर जाकर मुलाकात करना स्थानीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दौरे से पहले कृष्ण-सुदामा वाला पोस्टर इस पूरे घटनाक्रम में एक नया दृश्य जरूर जोड़ता है।
फिलहाल पोस्टर को लेकर अलग-अलग राजनीतिक व्याख्याएं सामने आ सकती हैं, लेकिन तथ्य यह है कि रायबरेली में अखिलेश यादव के पहुंचने से पहले उनका कृष्ण रूप वाला पोस्टर लगाया गया है और इसमें स्थानीय पार्टी कार्यकर्ता को सुदामा के रूप में दिखाया गया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दौरे के दौरान अखिलेश यादव इस पोस्टर या उससे जुड़े संदेश पर कोई प्रतिक्रिया देते हैं या नहीं।


