मिशन 2027 से पहले सपा में बड़ा फेरबदल: आई-पैक से बिगड़ी बात, अखिलेश बोले- ‘वोट डकैती’ से लड़ना है!

मिशन 2027 से पहले सपा में बड़ा फेरबदल: आई-पैक से बिगड़ी बात, अखिलेश बोले- ‘वोट डकैती’ से लड़ना है!

उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों ‘ब्रेकअप’ की खबरें सुर्खियों में हैं, लेकिन यह किसी नेता का नहीं, बल्कि एक पार्टी और उसकी चुनावी मैनेजमेंट कंपनी का है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने अचानक आई-पैक (I-PAC) से अपना नाता तोड़कर सबको चौंका दिया है। लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब अखिलेश से इस पर सवाल हुआ, तो उन्होंने बहुत ही व्यावहारिक (Business-like) जवाब दिया। उन्होंने कहा कि फंड की कमी के कारण अब इस कंपनी के साथ काम करना मुमकिन नहीं है। लेकिन जानकारों का मानना है कि इसके पीछे सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजे भी हैं।

कॉर्पोरेट मैनेजमेंट बनाम जमीनी सियासत: क्यों फेल हुई आई-पैक की डील?

जब अखिलेश यादव ने 2025 की शुरुआत में आई-पैक के साथ हाथ मिलाया था, तो माना जा रहा था कि 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव के लिए वह एक नया ‘कॉर्पोरेट अवतार’ अपनाएंगे। डेटा एनालिसिस और बूथ लेवल की बारीकियों के लिए मशहूर आई-पैक को यूपी की कमान सौंपी गई थी। लेकिन जैसे ही बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी को उम्मीद के उलट नतीजे मिले, अखिलेश की रणनीति बदल गई। एक प्रोफेशनल पत्रकार की नजर से देखें तो यह ‘कॉस्ट कटिंग’ से कहीं ज्यादा ‘रिस्क मैनेजमेंट’ का मामला लगता है। अखिलेश ने कई अन्य कंपनियों का नाम लेते हुए यह संकेत दिया कि अब सपा बाहरी मैनेजमेंट के बजाय अपने कार्यकर्ताओं और ‘पीडीए’ (PDA) के भरोसे आगे बढ़ेगी।

‘वोट डकैती’ का आरोप और बंगाल से यूपी तक का कनेक्शन

अखिलेश यादव का गुस्सा सिर्फ मैनेजमेंट कंपनी तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए बंगाल के चुनाव को ‘वोटों की लूट’ करार दिया। उन्होंने कहा कि जो ममता बनर्जी ने बंगाल में झेला है, वही सपा 2022 के चुनाव में देख चुकी है। अखिलेश ने छिबरामऊ सीट का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि पुलिस की वर्दी में फर्जी वोट डलवाए गए और एक खास जाति के अधिकारियों को तैनात कर चुनाव प्रभावित किया गया। उनका कहना है कि कुंदरकी और मिल्कीपुर जैसे उपचुनावों में जो ‘वोट डकैती’ हुई, उसी ने बंगाल के नतीजों को भी बदला है।

अखिलेश की नई राह: अब चंदा भी होगा और सीधा संवाद भी

अखिलेश यादव अब बैकफुट पर रहने के मूड में नहीं हैं। उन्होंने साफ किया कि वह बंगाल जाएंगे और ममता बनर्जी से मुलाकात कर भविष्य की रणनीति तय करेंगे। दिलचस्प बात यह है कि अब सपा ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ के कार्ड को भी सधे हुए अंदाज में खेल रही है। अखिलेश ने कहा कि केदारश्वर मंदिर के लिए वह भी राम मंदिर की तर्ज पर पत्र लिखकर चंदा मांगेंगे। यह कदम साफ करता है कि 2027 के लिए सपा अब धर्म, जाति और जमीनी संघर्ष का एक ऐसा मिश्रण तैयार कर रही है, जिसमें किसी बाहरी एजेंसी की सलाह से ज्यादा जनता के साथ सीधा जुड़ाव मायने रखेगा।