उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की आहट के साथ सियासी लड़ाई का मैदान अब सोशल मीडिया तक पहुंच चुका है। खास बात यह है कि इस बार हथियार सिर्फ पोस्ट, मीम या वीडियो नहीं, बल्कि AI से तैयार किए गए वीडियो हैं। सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को लेकर ऐसे वीडियो सामने आ रहे हैं, जिनमें एक-दूसरे के राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधा जा रहा है। मामला तब और गरमा गया, जब अखिलेश यादव ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में योगी आदित्यनाथ से जुड़ा एक AI वीडियो सार्वजनिक रूप से चलाया और बीजेपी पर सवाल उठाए। इसके बाद दोनों खेमों के समर्थक माने जाने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स को लेकर बहस तेज हो गई।
इस डिजिटल लड़ाई में दो X हैंडल खास तौर पर चर्चा में हैं—‘याद रखेगा UP’ और ‘क से कलम’। हालांकि, दोनों प्रमुख राजनीतिक दल इन अकाउंट्स से आधिकारिक दूरी बनाए हुए हैं। ऐसे में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि वीडियो कौन बना रहा है, बल्कि यह भी है कि चुनावी माहौल में AI के जरिए बनाई गई सामग्री जनता की राय को किस तरह प्रभावित कर सकती है।
‘याद रखेगा UP’ से अखिलेश पर निशाना
‘याद रखेगा UP’ नाम का X अकाउंट इसी साल जून में शुरू हुआ था। इस हैंडल से लगातार अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी को निशाना बनाकर पोस्ट और AI वीडियो शेयर किए जा रहे हैं।
इसी अकाउंट से एक ऐसा AI वीडियो भी शेयर किया गया, जिसमें बॉलीवुड के चर्चित गाने ‘मुन्नी बदनाम हुई’ की तर्ज पर अखिलेश यादव को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। इस वीडियो के सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ गया।
सूत्रों की ओर से दावा किया गया कि इस अकाउंट को बीजेपी समर्थित एक ग्रुप चला रहा है। हालांकि, बीजेपी ने आधिकारिक तौर पर इस हैंडल या उससे जुड़े वीडियो से खुद को अलग बताया है। इसलिए अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ‘याद रखेगा UP’ अकाउंट के पीछे वास्तव में कौन है।
‘क से कलम’ की एंट्री और योगी के AI वीडियो
अखिलेश यादव से जुड़े AI वीडियो के बाद जिस दूसरे X हैंडल की चर्चा तेज हुई, उसका नाम है ‘क से कलम’। यह अकाउंट इसी साल मार्च में शुरू हुआ था।
शुरुआत में इस हैंडल से सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर आलोचनात्मक पोस्ट किए जा रहे थे। लेकिन ‘याद रखेगा UP’ से अखिलेश विरोधी AI वीडियो सामने आने के बाद ‘क से कलम’ से भी योगी आदित्यनाथ को निशाना बनाते AI वीडियो शेयर होने लगे।
इसी अकाउंट से शेयर किया गया एक वीडियो अखिलेश यादव ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया के सामने चलाया। उन्होंने इसके जरिए बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि बच्चों का खेल नहीं खेलना चाहिए। अखिलेश ने यह भी तंज किया कि सरकार को इस तरह अपना पैसा बर्बाद नहीं करना चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसे सोशल मीडिया हैंडल चला कौन रहा है। अखिलेश ने कहा कि उन्होंने बच्चों को काफी पहले लैपटॉप दे दिए थे और वह इस मामले में काफी आगे हैं। उनके इस बयान से साफ संकेत मिला कि वह AI और डिजिटल माध्यम को आने वाले चुनावी मुकाबले का अहम हिस्सा मान रहे हैं।
बीजेपी का पलटवार, सनातन के मुद्दे पर घेरा
अखिलेश यादव के AI वीडियो वाले हमले के बाद बीजेपी ने भी पलटवार किया। यूपी बीजेपी ने आरोप लगाया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाए गए वीडियो के जरिए साधु-संतों, सनातन परंपरा और सनातनियों की आस्था का अपमान किया गया।
बीजेपी ने इसे अखिलेश यादव की कथित सनातन विरोधी सोच से जोड़कर हमला बोला। बीजेपी प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि बीजेपी इस तरह की राजनीति नहीं करती। उनके मुताबिक चुनाव AI वीडियो के सहारे नहीं, बल्कि जनता के बीच भरोसा और समर्थन हासिल करके जीते जाते हैं।
इससे साफ है कि AI वीडियो का विवाद अब तकनीक तक सीमित नहीं रहा। यह सीधे राजनीतिक नैरेटिव और चुनावी रणनीति का हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है।
2027 से पहले बड़ा सवाल- डिजिटल कैंपेन के पीछे कौन?
इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर सोशल मीडिया कैंपेन चलाने के आरोप लगा रहे हैं। लेकिन अभी तक सार्वजनिक तौर पर ऐसा कोई निर्णायक सबूत सामने नहीं आया है, जिससे ‘याद रखेगा UP’ को बीजेपी या ‘क से कलम’ को समाजवादी पार्टी के आधिकारिक संगठन से सीधे जोड़ा जा सके।
हालांकि, ‘क से कलम’ से शेयर किए गए कुछ AI वीडियो समाजवादी पार्टी के मीडिया सेल की ओर से भी शेयर किए जा रहे हैं। इसके बावजूद पार्टी और संबंधित हैंडल के बीच आधिकारिक संबंध की पुष्टि सामने नहीं आई है।
आम सोशल मीडिया यूजर के लिए यह पूरा मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि AI से तैयार वीडियो को असली घटना या बयान समझना आसान हो सकता है। चुनावी माहौल में ऐसी सामग्री तेजी से फैलती है तो किसी नेता की छवि और जनता के बीच धारणा पर उसका असर पड़ सकता है।
उत्तर प्रदेश में 2027 का चुनाव अभी दूर है, लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मुकाबला शुरू हो चुका है। आने वाले महीनों में यह लड़ाई सिर्फ रैलियों, पोस्टरों और भाषणों तक रहेगी या AI वीडियो इसका बड़ा हिस्सा बनेंगे, इस पर अब राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम मतदाताओं की भी नजर रहेगी।


