इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने पूछा है कि एक FIR में केंद्रीय मंत्री के नाम के आगे ‘माननीय’ (Hon’ble) जैसे सम्मानजनक शब्द का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया। यह मामला मथुरा में दर्ज एक FIR से जुड़ा है, जिसे रद्द करने की मांग को लेकर याचिका दायर की गई थी।
“पुलिस का कर्तव्य है प्रोटोकॉल निभाना”
जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की बेंच ने अपने आदेश में साफ कहा कि: भले ही शिकायतकर्ता ने मंत्री का जिक्र सही तरीके से न किया हो, लेकिन FIR दर्ज करते समय पुलिस को प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए था। कोर्ट के मुताबिक, सम्मानजनक शब्द जोड़ना पुलिस की जिम्मेदारी है—चाहे वह कोष्ठक में ही क्यों न हो।
सरकार को देना होगा जवाब, अगली सुनवाई तय
कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) से हलफनामे के जरिए स्पष्टीकरण मांगा है।
अदालत ने सवाल किया है कि:
- मंत्री के नाम के साथ ‘माननीय’ क्यों नहीं लिखा गया?
- एक जगह सिर्फ नाम ही क्यों लिखा गया, बिना ‘श्री’ जैसे शब्द के?
इस मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी।
पुलिस की भूमिका पर भी टिप्पणी
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि FIR लिखते समय पुलिस को सिर्फ शिकायत की कॉपी नहीं करनी चाहिए, बल्कि प्रोटोकॉल और मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। यह टिप्पणी प्रशासनिक जिम्मेदारी और प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा संदेश मानी जा रही है।
अधिकारियों को भेजा गया आदेश
अदालत ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) को निर्देश दिया है कि यह आदेश 48 घंटे के भीतर:
- अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह)
- मथुरा के SSP
तक पहुंचाया जाए, ताकि समय पर जवाब दाखिल किया जा सके।


