इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान सोमवार को कहा कि उत्तर प्रदेश धर्मांतरण निषेध कानून (Uttar Pradesh Prohibition of Unlawful Conversion of Religion Act, 2021) न तो दूसरे धर्म में शादी पर रोक लगाता है और न ही ऐसे जोड़ों को लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) में साथ रहने से रोकता है. कोर्ट ने कहा कि संविधान की धारा 14 और 15 के तहत, कानून सभी के लिए बराबर है, अगर एक ही धर्म के दो लोग लिव-इन रिलेशनशिप में साथ रह सकते हैं, तो फिर अलग-अलग धर्म वाले लोग भी लिव-इन रिलेशनशिप में एक साथ रह सकते हैं.
जस्टिस विवेक कुमार सिंह ने कहा कि कोर्ट ऐसे जोड़ों को हिंदू और मुस्लिम के तौर पर नहीं देखतीं, बल्कि 2 बालिग लोगों के तौर पर देखती हैं जो अपनी मर्जी और पसंद से काफी समय से शांति तथा खुशी से साथ रह रहे हैं. नूरी नाम की एक महिला की रिट पिटीशन और 11 दूसरी जुड़ी हुई पिटीशन को मंजूरी देते हुए, जस्टिस विवेक ने इन जोड़ों को राहत दी कि वे अपनी शिकायतों के समाधान के लिए पुलिस से संपर्क करने के लिए आजाद हैं.



