UP शिक्षक ट्रांसफर पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला! अब पसंदीदा स्कूल नहीं मांग सकेंगे, जिला स्तर पर होगा तबादला

UP शिक्षक ट्रांसफर पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला! अब पसंदीदा स्कूल नहीं मांग सकेंगे, जिला स्तर पर होगा तबादला

उत्तर प्रदेश के लाखों बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्रांसफर नीति को लेकर अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि अंतरजनपदीय (Inter-District) तबादले के दौरान शिक्षक किसी खास स्कूल में पोस्टिंग की मांग नहीं कर सकते। ऐसे मामलों में तबादले का फैसला राज्य सरकार की जिला-आधारित नीति के अनुसार ही होगा।

लखनऊ खंडपीठ ने चार सहायक अध्यापकों की याचिका खारिज करते हुए जून 2026 में जारी उत्तर प्रदेश सरकार की ट्रांसफर नीति को वैध माना। अदालत ने कहा कि स्थानांतरण कोई स्वतः मिलने वाला कानूनी अधिकार नहीं है। यह वही सीमा तक उपलब्ध होगा, जितनी राज्य सरकार की नीति अनुमति देती है।

हाईकोर्ट ने क्यों बरकरार रखी जिला-आधारित ट्रांसफर नीति?

इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने कहा कि राज्य सरकार ने जिला स्तर पर प्यूपिल-टीचर रेशियो (PTR) का उपयोग केवल यह तय करने के लिए किया है कि किन जिलों में दूसरे जिलों से शिक्षकों का तबादला किया जा सकता है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि यह प्रशासनिक प्रक्रिया है और इसका शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत स्कूल स्तर पर लागू होने वाले PTR मानकों से सीधा संबंध नहीं है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि जिला स्तर के आंकड़ों का इस्तेमाल केवल ट्रांसफर प्रक्रिया के लिए किया गया है। इसका मतलब यह नहीं है कि इन्हीं आंकड़ों के आधार पर RTE कानून के अनुपालन का मूल्यांकन किया जा रहा है।

यानी अदालत ने राज्य सरकार की ट्रांसफर व्यवस्था को सही माना, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि इस फैसले को RTE के तहत PTR अनुपालन की स्वीकृति नहीं माना जाएगा।

चार शिक्षकों ने किस आधार पर दी थी चुनौती?

विवाद की शुरुआत 22 जून 2026 को जारी उस सरकारी आदेश से हुई थी, जिसमें ट्रांसफर प्रक्रिया के लिए जिला-वार PTR तय किया गया था।

याचिका दाखिल करने वाले चारों सहायक शिक्षक वर्ष 2008 के उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (शिक्षक) नियुक्ति नियमों के तहत नियुक्त हुए थे। उनका तर्क था कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अनुसार PTR की गणना स्कूल-वार और कक्षा-वार होनी चाहिए।

उन्होंने केरल हाईकोर्ट के एक फैसले का भी हवाला दिया, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था। शिक्षकों का कहना था कि यदि केवल जिला स्तर के आंकड़े इस्तेमाल होंगे, तो वे ट्रांसफर के लिए सही और सूचित विकल्प नहीं चुन पाएंगे।

हालांकि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और कहा कि ट्रांसफर नीति प्रशासनिक निर्णय का हिस्सा है।

किन परिस्थितियों में मिल सकता है अंतरजनपदीय तबादला?

उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (शिक्षक) नियुक्ति नियम, 2008 के तहत सामान्य परिस्थितियों में शिक्षकों के अंतरजनपदीय तबादले पर कई सीमाएं हैं।

हालांकि 4 जून 2026 को जारी राज्य सरकार के आदेश में कुछ विशेष श्रेणियों को छूट दी गई थी। इनमें पति-पत्नी अलग-अलग जिलों में कार्यरत होने जैसे मामलों को शामिल किया गया।

यदि दोनों पति-पत्नी बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक हैं, तो ऐसे मामलों में कम PTR वाले जिले में तबादले के आवेदन पर विचार किया जा सकता है।

हाईकोर्ट ने कहा कि यह व्यवस्था राज्य सरकार की नीति के अनुरूप है और इससे याचिकाकर्ताओं के किसी वैधानिक अधिकार का उल्लंघन नहीं होता।

फैसले का शिक्षकों पर क्या असर पड़ेगा?

इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि अंतरजनपदीय तबादले के लिए आवेदन करने वाले शिक्षक किसी विशेष प्राथमिक विद्यालय में नियुक्ति का दावा नहीं कर सकेंगे।

अब तबादला जिला स्तर पर उपलब्ध पदों और सरकार द्वारा तय किए गए PTR मानकों के आधार पर ही तय होगा।

अदालत ने अंत में कहा कि जब तक राज्य की नीति किसी कानूनी प्रावधान का उल्लंघन नहीं करती, तब तक उसमें हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता। इसी कारण चारों शिक्षकों की रिट याचिका खारिज कर दी गई।