अपराजिता बिल पर सियासी घमासान: अभिषेक बनर्जी ने BJP उम्मीदवार से कहा—PM मोदी से दिलवाएं मंजूरी

अपराजिता बिल पर सियासी घमासान: अभिषेक बनर्जी ने BJP उम्मीदवार से कहा—PM मोदी से दिलवाएं मंजूरी

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय अपराजिता विधेयक को लेकर नया मोड़ देखने को मिल रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी ने बीजेपी उम्मीदवार रत्ना देबनाथ से एक सार्वजनिक अपील की है। उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह करें कि इस विधेयक को जल्द मंजूरी दिलाई जाए, जो फिलहाल राष्ट्रपति के पास लंबित है।

यह मुद्दा सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था से भी सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। ऐसे में इसका असर आम लोगों की सोच और चुनावी माहौल दोनों पर पड़ सकता है।

क्या है पूरा मामला और क्यों अहम है अपराजिता विधेयक

अपराजिता महिला एवं बाल (पश्चिम बंगाल आपराधिक कानून संशोधन) विधेयक सितंबर 2024 में राज्य विधानसभा से पारित हुआ था। यह कदम आरजी कर मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर के साथ हुई दुष्कर्म और हत्या की घटना के बाद उठाया गया था।

इस विधेयक में रेप मामलों की जांच 21 दिनों के भीतर पूरी करने और 50 दिनों के अंदर सजा सुनिश्चित करने का प्रावधान रखा गया है। साथ ही, फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए दोषियों को कड़ी सजा, यहां तक कि मृत्युदंड तक देने का प्रस्ताव भी शामिल है।

हालांकि, यह बिल अभी कानून नहीं बन पाया है क्योंकि इसे राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार है।

अभिषेक बनर्जी का हमला और अपील

उत्तर 24 परगना के पनिहाटी में एक सभा को संबोधित करते हुए अभिषेक बनर्जी ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो पार्टी आरोपियों को संरक्षण देती है, वह न्याय की बात नहीं कर सकती।

इसी दौरान उन्होंने रत्ना देबनाथ—जो आरजी कर केस की पीड़िता की मां हैं और अब बीजेपी उम्मीदवार भी—से अपील की कि वह प्रधानमंत्री से इस विधेयक को मंजूरी दिलाने की पहल करें।

बनर्जी ने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने इस मामले में तेजी से कार्रवाई की थी। उनके मुताबिक, 48 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार किया गया और पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता दी गई।

कानूनी टकराव और सियासी बहस

यह विधेयक केंद्र और राज्य के बीच टकराव का कारण भी बना हुआ है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत जहां रेप के लिए न्यूनतम 10 साल की सजा का प्रावधान है, वहीं इस विधेयक में इसे बढ़ाकर आजीवन कारावास या मृत्युदंड तक करने की मांग की गई है।

इसी मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। बनर्जी ने आरोप लगाया कि विपक्ष इस घटना का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है, जबकि असली मुद्दा न्याय दिलाना होना चाहिए।

भवानीपुर सीट और बढ़ता चुनावी तापमान

इस पूरे घटनाक्रम के बीच भवानीपुर विधानसभा सीट पर भी सियासी मुकाबला दिलचस्प हो गया है। यहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सीधा मुकाबला शुभेंदु अधिकारी से माना जा रहा है।

इसके अलावा, ममता बनर्जी ने भी बीजेपी पर मतदाता सूची में गड़बड़ी और समाज को बांटने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने चुनाव को लोकतंत्र का उत्सव बताते हुए लोगों से एकजुट रहने की अपील की है।

अपराजिता विधेयक अब सिर्फ एक कानून का मसौदा नहीं, बल्कि चुनावी बहस का केंद्रीय मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या इसे मंजूरी मिलती है और इसका राजनीतिक समीकरणों पर क्या असर पड़ता है।