केजरीवाल ने खुद को कहां दिए कितने नंबर? शराब नीति को 10, शिक्षा-स्वास्थ्य पर बोले- अभी बहुत कुछ बाकी था

केजरीवाल ने खुद को कहां दिए कितने नंबर? शराब नीति को 10, शिक्षा-स्वास्थ्य पर बोले- अभी बहुत कुछ बाकी था

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने अपनी सरकार के करीब एक दशक के कामकाज का खुद आकलन किया है। एक टीवी इंटरव्यू में उनसे शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी, यमुना की सफाई, प्रदूषण, महिला सुरक्षा और शराब नीति जैसे मुद्दों पर 1 से 10 के पैमाने पर नंबर देने को कहा गया। दिलचस्प बात यह रही कि केजरीवाल ने शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे उन क्षेत्रों में खुद को 10 में 10 नहीं दिए, जिन्हें उनकी सरकार अपनी प्रमुख उपलब्धियों के तौर पर पेश करती रही थी। वहीं बिजली और तत्कालीन एक्साइज यानी शराब नीति को उन्होंने 10 में 10 नंबर दिए।

शराब नीति को लेकर यह बयान इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसी नीति से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को जेल जाना पड़ा था। केजरीवाल ने इंटरव्यू में नीति का बचाव करते हुए इसे अच्छी नीति बताया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें भ्रष्टाचार के आरोप में जेल जाने का सबसे ज्यादा दुख है।

शिक्षा और स्वास्थ्य पर केजरीवाल बोले- 8 या 9, अभी काफी काम बाकी था

केजरीवाल से सबसे पहले शिक्षा के क्षेत्र में उनकी सरकार के कामकाज का आकलन करने को कहा गया। आम आदमी पार्टी लंबे समय से दिल्ली के सरकारी स्कूलों और शिक्षा व्यवस्था में किए गए बदलावों को अपनी प्रमुख उपलब्धियों में गिनाती रही है।

हालांकि, केजरीवाल ने इस क्षेत्र में खुद को पूरे नंबर नहीं दिए। उन्होंने शिक्षा के लिए 8 या 9 अंक देने की बात कही। उनका कहना था कि अभी काफी काम बाकी था और उनकी सरकार आगे भी उस पर काम करना चाहती थी।

स्वास्थ्य के सवाल पर भी उनका आकलन लगभग ऐसा ही रहा। उन्होंने सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 8 या 9 नंबर की बात कही।

केजरीवाल ने इस दौरान मोहल्ला क्लीनिक का भी जिक्र किया। उनका आरोप था कि सरकार बदलने के बाद कई मोहल्ला क्लीनिक बंद हो गए। उन्होंने अपने एक हालिया दौरे का हवाला देते हुए दावा किया कि तिलक नगर में एक मोहल्ला क्लीनिक में अब गाय-भैंस दिखाई देती हैं।

यह उनका राजनीतिक दावा है। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध सामग्री में नहीं दी गई है।

बिजली को पूरे नंबर, पानी के लिए 7 और ट्रांसपोर्ट पर 7-8

बिजली के मामले में केजरीवाल ने अपनी सरकार को 10 में 10 नंबर दिए। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में दिल्ली में 24 घंटे बिजली उपलब्ध हुई और बिजली मुफ्त की गई। साथ ही उन्होंने मौजूदा व्यवस्था पर कटौती बढ़ने का दावा किया।

पाइपलाइन के जरिए पानी की सप्लाई को लेकर उन्होंने खुद को 7 नंबर दिए। केजरीवाल के मुताबिक, उनकी सरकार ने कई इलाकों तक पानी पहुंचाया और द्वारका जैसे इलाकों में भी सप्लाई में सुधार किया। उनका कहना था कि अगर उनकी सरकार को पांच साल और मिलते तो दिल्ली में 24 घंटे पानी की दिशा में और काम किया जा सकता था।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट के मामले में उन्होंने 7 या 8 नंबर देने की बात कही। वहीं शासन और पारदर्शिता के लिए उनका आकलन 8-9 और सड़क तथा ड्रेनेज के लिए भी 8-9 रहा। उन्होंने कहा कि दिल्ली के लिए एक मास्टर ड्रेनेज प्लान पर काम चल रहा था।

महिला सुरक्षा के सवाल पर केजरीवाल ने इसे केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा विषय बताया।

प्रदूषण और यमुना पर केजरीवाल ने केंद्र की भूमिका बताई अहम

दिल्ली के दो सबसे बड़े शहरी मुद्दों—वायु प्रदूषण और यमुना की सफाई—पर केजरीवाल ने अपनी सरकार को कोई नंबर देने के बजाय दूसरे स्तर की जिम्मेदारियों का जिक्र किया।

वायु प्रदूषण को लेकर उन्होंने कहा कि समस्या सिर्फ दिल्ली सरकार के नियंत्रण में नहीं है। उनके मुताबिक, सर्दियों में आसपास के राज्यों से आने वाला पराली का धुआं भी प्रदूषण बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि इसमें कई राज्यों की भूमिका है और केंद्र सरकार को सभी पक्षों को साथ लेकर काम करना होगा।

यमुना की सफाई पर भी उन्होंने अलग-अलग एजेंसियों के बीच जिम्मेदारियों के बंटवारे को बड़ी चुनौती बताया। केजरीवाल के मुताबिक, नदी से जुड़े अलग-अलग हिस्सों पर दिल्ली सरकार, DDA और दूसरी एजेंसियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने दिल्ली मेट्रो की तर्ज पर यमुना के लिए एक अलग कंपनी बनाने का सुझाव दिया, ताकि एक ही संस्था के स्तर पर काम किया जा सके।

उन्होंने मौजूदा सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सरकार को डेढ़ साल हो चुके हैं, लेकिन यमुना की स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया।

शराब नीति को 10 में 10, बोले- नीति खराब नहीं थी

सबसे ज्यादा चर्चा केजरीवाल के एक्साइज यानी शराब नीति को 10 में 10 नंबर देने के बयान की हुई।

केजरीवाल ने कहा कि उन्हें यह नीति अच्छी लगती है और इसका एक कारण यह भी है कि इसी तरह की नीति पंजाब में लागू की गई। उनके मुताबिक, पंजाब में शराब से मिलने वाला राजस्व 5,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 12,000 करोड़ रुपये हुआ।

उन्होंने दिल्ली की पुरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाया। केजरीवाल के मुताबिक, पहले सरकारी शराब दुकानों की व्यवस्था थी और हर साल कीमतों में करीब 10-15 फीसदी बढ़ोतरी होती थी। उनकी सरकार ने नीलामी के जरिए निजी दुकानों को लाइसेंस देने की व्यवस्था अपनाई। केजरीवाल का दावा है कि इससे सरकार का राजस्व बढ़ा।

हालांकि, यही नीति बाद में कथित शराब घोटाला मामले के केंद्र में रही और केजरीवाल तथा मनीष सिसोदिया को जेल जाना पड़ा। केजरीवाल ने इंटरव्यू में कहा कि उन्हें इस बात का सबसे ज्यादा दुख हुआ कि पूरी जिंदगी ईमानदारी की राजनीति करने के बावजूद उन्हें भ्रष्टाचार के आरोप में जेल जाना पड़ा।

उन्होंने निचली अदालत के फैसले का भी जिक्र किया और दावा किया कि उस फैसले के बाद लोगों को लगा कि उनके साथ अन्याय हुआ है। मूल रिपोर्ट के अनुसार, मामला फिलहाल हाई कोर्ट में लंबित है।

इस पूरे इंटरव्यू में केजरीवाल का सेल्फ-असेसमेंट इसलिए चर्चा में है क्योंकि उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सुधार की गुंजाइश स्वीकार की, जबकि बिजली और शराब नीति को लेकर अपनी सरकार के फैसलों का मजबूती से बचाव किया।