देश के करोड़ों असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में सरकार एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। अटल पेंशन योजना (APY) के तहत मिलने वाली मासिक पेंशन की सीमा बढ़ाकर ₹10,000 तक करने पर विचार किया जा रहा है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा, जो बुढ़ापे में नियमित आय के लिए सरकारी योजनाओं पर निर्भर रहते हैं।
किसे मिलेगा फायदा और क्यों है यह अहम
भारत की कुल कार्यबल का लगभग 90% हिस्सा असंगठित क्षेत्र में काम करता है। इसमें रेहड़ी-पटरी वाले, घरेलू कामगार, दिहाड़ी मजदूर और छोटे स्तर पर स्वरोजगार करने वाले लोग शामिल हैं। इन वर्गों के पास आमतौर पर पीएफ, पेंशन या अन्य सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं नहीं होतीं।
ऐसे में अटल पेंशन योजना उनके लिए एक भरोसेमंद विकल्प बनती है। लेकिन मौजूदा समय में ₹1,000 से ₹5,000 तक की पेंशन बढ़ती महंगाई के सामने अपर्याप्त मानी जा रही है। यही वजह है कि सरकार इस सीमा को बढ़ाने पर विचार कर रही है।
सरकार की योजना: पेंशन बढ़ाकर आकर्षण बढ़ाना
सूत्रों के मुताबिक, वित्त मंत्रालय और पेंशन फंड नियामक (PFRDA) इस प्रस्ताव पर मिलकर काम कर रहे हैं। संभावना है कि पेंशन की अधिकतम सीमा ₹8,000 से बढ़ाकर ₹10,000 तक की जा सकती है।
सरकार का मानना है कि इससे योजना ज्यादा आकर्षक बनेगी। इससे न केवल नए लोग जुड़ेंगे, बल्कि जो सदस्य बीच में योगदान बंद कर चुके हैं, वे भी दोबारा सक्रिय हो सकते हैं।
मौजूदा स्थिति: बड़ी संख्या जुड़ी, लेकिन चुनौती बरकरार
अटल पेंशन योजना में अब तक 9 करोड़ से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं। हालांकि, इनमें से करीब आधे सदस्य नियमित योगदान नहीं दे रहे हैं, जो इस योजना की सबसे बड़ी चुनौती है।
वित्त वर्ष 2025-26 में 1.35 करोड़ नए सदस्य जुड़े हैं, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। सरकार अब इस रफ्तार को बनाए रखने के लिए पेंशन बढ़ोतरी जैसे कदमों पर विचार कर रही है।
कैसे काम करती है योजना और सरकार की भूमिका
यह एक ‘निर्धारित योगदान’ (Defined Contribution) आधारित योजना है, जिसमें सदस्य नियमित निवेश करता है और 60 साल की उम्र के बाद गारंटीड पेंशन मिलती है। शुरुआती चरण में सरकार ने कुछ सदस्यों को को-कंट्रीब्यूशन भी दिया था, लेकिन यह सुविधा सीमित समय के लिए थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि पेंशन सीमा बढ़ाने से सरकारी खजाने पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि यह योजना मुख्य रूप से लोगों के अपने योगदान पर आधारित है।
गांव-गांव तक पहुंचाने की तैयारी
सरकार अब ‘पेंशन सखी’ और बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट्स के जरिए इस योजना को ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाने पर भी काम कर रही है। साथ ही, यह सुनिश्चित करने की कोशिश है कि लोग नियमित रूप से योगदान करते रहें।
कैबिनेट पहले ही इस योजना को 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दे चुकी है, जिससे यह साफ है कि सरकार इसे लंबी अवधि की सामाजिक सुरक्षा योजना के रूप में देख रही है।
अटल पेंशन योजना में प्रस्तावित बदलाव सिर्फ आंकड़ों का मामला नहीं है, बल्कि यह उन लाखों परिवारों के भविष्य से जुड़ा है, जो बुढ़ापे में आर्थिक स्थिरता की उम्मीद रखते हैं। अब नजर इस पर है कि सरकार इस प्रस्ताव को कब और कैसे लागू करती है।


