Belagavi C: ‘मुस्लिम वोटरों के नाम हटाने का दबाव’, BLO के आरोप से मचा हड़कंप, BJP विधायक ने दी सफाई

Belagavi C: ‘मुस्लिम वोटरों के नाम हटाने का दबाव’, BLO के आरोप से मचा हड़कंप, BJP विधायक ने दी सफाई

कर्नाटक के बेलगावी में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR को लेकर विवाद अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर चुनावी प्रक्रिया पर सवाल तक पहुंच गया है। आरोप है कि कुछ बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) पर बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाने वाले फॉर्म-7 पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया गया। मामला बेलगावी नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र के वीरभद्र नगर इलाके से सामने आया है। दूसरी ओर, बीजेपी विधायक अभय पाटिल ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उन्होंने केवल संदिग्ध या फर्जी नामों की उचित जांच के बाद कार्रवाई की बात कही थी।

पूरे विवाद का केंद्र फॉर्म-7 है। इस फॉर्म के जरिए मतदाता सूची से किसी नाम को हटाने का अनुरोध किया जाता है। अब सवाल यह है कि बेलगावी में बड़ी संख्या में ऐसे फॉर्म आखिर किसने जमा किए और उनमें दर्ज नामों को लेकर आपत्तियां किस आधार पर की गईं।

200 से ज्यादा फॉर्म और BLO पर कथित दबाव

मामला वीरभद्र नगर के 7वें क्रॉस स्थित वीरभद्र उर्दू मॉडल स्कूल के पोलिंग स्टेशन से सामने आया। रिपोर्ट के मुताबिक, दो लोग खुद को बेलगावी नगर निगम का कर्मचारी बताते हुए वहां पहुंचे थे। आरोप है कि वे बड़ी संख्या में फॉर्म-7 लेकर आए और BLO से उन पर हस्ताक्षर करने को कहा।

इन फॉर्म में करीब 200 मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई थी। इनमें नाम हटाने का आधार कथित तौर पर मतदाताओं को ‘फर्जी’ बताया जाना था।

बूथ लेवल एजेंट और चेयरमैन मीरसाब सनादी के मुताबिक, पोलिंग स्टेशन 196 पर उन्हें कम से कम 380 फॉर्म-7 आवेदन दिखाई दिए। उनका दावा है कि इन फॉर्म में उनके खुद के नाम के अलावा उनके भाई, रिश्तेदारों और पड़ोसियों के नाम भी शामिल थे।

सनादी ने कहा कि वह करीब 15 साल से उस क्षेत्र में BLA की भूमिका में हैं और जिन लोगों के नाम हटाने की मांग की गई, उनमें से कई को वह व्यक्तिगत रूप से जानते हैं।

छह पोलिंग स्टेशनों तक पहुंचा विवाद

रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे फॉर्म केवल एक पोलिंग स्टेशन तक सीमित नहीं थे। बेलगावी नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र के कम से कम छह पोलिंग स्टेशनों पर इसी तरह के विवादित फॉर्म मिलने की बात सामने आई।

इनमें वीरभद्र नगर के पोलिंग स्टेशन 194, 195, 196 और 199 शामिल बताए गए हैं। इसके अलावा शेट्टीगली के सरकारी कन्नड़ हायर प्राइमरी स्कूल से जुड़े पोलिंग स्टेशन 209 और 210 पर भी गड़बड़ी वाले फॉर्म मिलने का दावा किया गया है।

आरोप है कि जिन दो लोगों ने ये आवेदन जमा किए, उन्होंने BLO से तत्काल हस्ताक्षर करने और फॉर्म वापस करने को कहा। BLO ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि संबंधित मतदाता लंबे समय से इलाके में रह रहे हैं और उन्हें उनके बारे में जानकारी है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दोनों लोगों ने फॉर्म की पावती की कॉपी लेने पर जोर दिया था। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि ये लोग स्थानीय बीजेपी नेता से जुड़े हुए थे। कांग्रेस का दावा है कि करीब 200 फॉर्म में जिन मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई, वे सभी मुस्लिम मतदाता थे।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस कॉपी के आधार पर नहीं हुई है।

कांग्रेस ने लगाया बड़ा आरोप, बीजेपी विधायक ने किया खंडन

विवाद बढ़ने के बाद यूथ कांग्रेस नेता अमान सैत ने कहा कि पार्टी उन लोगों के खिलाफ FIR की मांग करते हुए शिकायत करेगी, जिन पर चुनाव अधिकारियों पर कथित दबाव डालने का आरोप है।

गुरुवार को कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने भी मामले को लेकर बीजेपी पर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि बेलगावी साउथ के बीजेपी विधायक अभय पाटिल ने चुनाव अधिकारियों को पत्र लिखकर करीब 2,500 मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की थी।

हरिप्रसाद ने यह भी दावा किया कि लगभग 7 हजार नाम हटाने के लिए आवेदन दिए गए थे। कुछ मामलों में एक ही घर के करीब 50 मतदाताओं के नामों पर आपत्ति किए जाने का भी आरोप लगाया गया।

कांग्रेस ने चुनाव आयोग से पूरे मामले की जांच कराने और गलत या फर्जी आपत्तियां दाखिल करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

अभय पाटिल बोले- आरोप गलत, सिर्फ जांच की मांग की

बीजेपी विधायक अभय पाटिल ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उनके पत्र का उद्देश्य किसी समुदाय विशेष के मतदाताओं को निशाना बनाना नहीं था।

पाटिल के मुताबिक, उनके पत्र में बूथ लेवल एजेंट यानी BLA-2 की ओर से दी गई रिपोर्ट की पुष्टि करने की बात कही गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पत्र में रोहिंग्या, पाकिस्तानियों या मुसलमानों का उल्लेख नहीं किया गया था।

उनका दावा है कि उन्होंने चुनाव अधिकारियों से केवल इतना कहा था कि जिन नामों के फर्जी होने की आशंका है, उनकी उचित जांच की जाए और जांच में गलत पाए जाने पर उन्हें वोटर लिस्ट से हटाया जाए।

यानी बेलगावी SIR विवाद में फिलहाल दो अलग-अलग दावे सामने हैं। कांग्रेस इसे मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की कथित कोशिश बता रही है, जबकि बीजेपी विधायक इसे संदिग्ध नामों की जांच से जुड़ा मामला बता रहे हैं।

अब पूरे मामले में चुनाव अधिकारियों की जांच और उपलब्ध रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होंगे। क्योंकि मतदाता सूची में किसी नाम को जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया सीधे नागरिक के मतदान के अधिकार से जुड़ी होती है। इसलिए फॉर्म-7 के जरिए की गई आपत्तियों की वास्तविकता, उनके आधार और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच इस विवाद का अगला अहम पड़ाव होगी।