नये साल के पहले दिन इक्कीस और दूसरे दिन आज़ाद भारत. हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के लिए 2026 का कुछ इस तरह आगाज हुआ. धर्मेंद्र, अगस्त्य नंदा और जयदीप अहलावत अभिनीत फिल्म इक्कीस ने दर्शकों को इमोशनल बना दिया, तो श्रेयस तलपड़े और रूपा अय्यर की फिल्म ने आज़ादी के आंदोलन और इंकलाब की याद दिला दी. कहते हैं जिसका आगाज ऐसा है तो अंजाम कैसा होगा. वैसे इक्कीस में टैंक की गर्जना है तो मोहब्बत के तराने भी. लेकिन इसमे कोई दो राय नहीं कि आज के दौर की देशभक्ति फिल्में पहले जैसी कत्तई नहीं रहीं. अब की देशभक्ति फिल्में वर्तमान भारत का प्रतिनिधित्व करती हैं. इसमें बदलते भारत की ताकत दिखाई जाती है. दुनिया में विकसित और न्यू इंडिया की चमक बिखेरी जाती है. उरी द सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर धुरंधर तक ऐसी कई फिल्में आ चुकी हैं.
धुरंधर के अंत में नये हिंदुस्तान की बात पूरी बुलंदी से कही गई है. इस लिहाज से साल 2026 में आने वाली देशभक्ति फिल्मों की फेहरिस्त बहुत ही विचारणीय हो जाती है. यहां इतिहास की कहानियों, वीर नायकों की गाथा तो होगी ही, पाकिस्तान को परास्त और चीन को चौंकाने वाली चमक भी होगी. इनका मिजाज गुजरे जमाने की देशभक्ति फिल्मों से एकदम अलग होने जा रहा है. धुरंधर में आपने देखा कि भारतीय खुफिया एजेंसी का प्रमुख किस प्रकार से अपना अंडर कवर एजेंट पाकिस्तान की सरहद के अंदर भेजता है और अपने मिशन को हासिल करता है. यह सिनेमा का ग्लोबल टेम्परामेंट है. जैसे कि हॉलीवुड की फिल्मों में एफबीआई की ब्रांडिंग की जाती है, उसी तरह से आदित्य धर की धुरंधर में यह प्रयास दिखा है.



