24 घंटे में कोर्ट में पेश करना ही काफी नहीं, गिरफ्तार आरोपी को नजदीकी मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना जरूरी: बॉम्बे HC

24 घंटे में कोर्ट में पेश करना ही काफी नहीं, गिरफ्तार आरोपी को नजदीकी मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना जरूरी: बॉम्बे HC

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी और आरोपी के संवैधानिक अधिकारों को लेकर एक अहम टिप्पणी की है। अदालत ने साफ कहा कि किसी गिरफ्तार व्यक्ति को सिर्फ 24 घंटे के भीतर कोर्ट में पेश कर देना पर्याप्त नहीं है। जांच एजेंसी की जिम्मेदारी है कि गिरफ्तार व्यक्ति को उस जगह के सबसे नजदीकी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाए, जहां से उसे गिरफ्तार किया गया है। अदालत ने यह टिप्पणी कलीम इसाक शेख की याचिका पर सुनवाई करते हुए की और उसे 50 हजार रुपये की जमानत राशि पर रिहा करने का आदेश दिया।

मामले में शेख को सोलापुर जिले के बरशी से गिरफ्तार किया गया था, लेकिन गिरफ्तारी के बाद उसे करीब 380 से 400 किलोमीटर दूर मीरा रोड ले जाया गया। हाईकोर्ट ने इसी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि 24 घंटे की समय-सीमा पूरी कर देना अपने आप में पर्याप्त नहीं माना जा सकता।

घर से गिरफ्तारी, फिर 400 किलोमीटर दूर ले गई पुलिस

कलीम शेख पेशे से ड्राइवर है और उसके खिलाफ रेप का मामला दर्ज है। उसे 22 अगस्त की सुबह करीब 4:50 बजे सोलापुर के बरशी तालुका स्थित उसके घर से गिरफ्तार किया गया था।

गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसे मीरा रोड ले गई। बरशी से मीरा रोड की दूरी करीब 380 से 400 किलोमीटर बताई गई। पुलिस ने आरोपी को उसी दिन दोपहर में संबंधित मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की कोशिश की।

लेकिन उस समय मजिस्ट्रेट उपलब्ध नहीं थे। वे एक न्यायिक कार्यशाला में शामिल होने गए थे। इसके बाद आरोपी को दोबारा पुलिस स्टेशन ले जाया गया। शाम करीब 7:45 बजे उसे फिर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया।

याचिकाकर्ता की ओर से इसी प्रक्रिया को चुनौती दी गई। दलील दी गई कि उसे गिरफ्तारी वाली जगह के नजदीकी मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया गया और इससे संविधान के अनुच्छेद 22(2) के तहत मिले अधिकार का उल्लंघन हुआ।

हाईकोर्ट ने कहा- सिर्फ 24 घंटे की शर्त पूरी करना काफी नहीं

मामले की सुनवाई जस्टिस सारंग कोटवाल और जस्टिस रंजीतसिंह भोंसले की डिवीजन बेंच ने की। अदालत ने मामले के तथ्यों के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट और दूसरे हाईकोर्ट के कई फैसलों का भी संदर्भ लिया।

बेंच ने शेख की दलील से सहमति जताई कि जांच एजेंसी को उसे सीधे मीरा रोड ले जाने के बजाय बरशी में सबसे नजदीकी मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना चाहिए था।

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जांच एजेंसी का कर्तव्य है कि जिस स्थान से किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, वहां उपलब्ध सबसे नजदीकी मजिस्ट्रेट के सामने उसे पेश किया जाए।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल यह कहना कि आरोपी को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश कर दिया गया, इस संवैधानिक आवश्यकता को पूरा करने के लिए अपने आप में पर्याप्त नहीं है।

आरोपी को मिली जमानत, लेकिन दोबारा गिरफ्तारी की छूट भी

सुनवाई के दौरान जब बेंच ने शेख को रिहा करने का विचार व्यक्त किया, तो अभियोजन पक्ष ने अदालत से उसे दोबारा गिरफ्तार करने की अनुमति देने का अनुरोध किया।

अदालत ने मामले के तथ्यों पर विचार करने के बाद शेख को जमानत देने का फैसला किया। कोर्ट ने 50,000 रुपये की जमानत राशि जमा करने पर उसे रिहा करने का आदेश दिया।

हालांकि, अदालत ने अभियोजन पक्ष को उसे दोबारा गिरफ्तार करने की छूट भी दी। लेकिन इसके साथ एक महत्वपूर्ण शर्त रखी गई। अगर दोबारा गिरफ्तारी होती है, तो वह कानून के मुताबिक ही की जानी होगी।

इसका मतलब यह है कि हाईकोर्ट का आदेश आरोपी के खिलाफ दर्ज मामले को खत्म करने का आदेश नहीं है। अदालत ने मुख्य रूप से गिरफ्तारी के बाद उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की प्रक्रिया और उसके संवैधानिक अधिकार के सवाल पर विचार किया।

आम लोगों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है कोर्ट की यह टिप्पणी?

गिरफ्तारी की स्थिति में किसी व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की प्रक्रिया सीधे उसके कानूनी अधिकारों से जुड़ी है। संविधान का अनुच्छेद 22(2) गिरफ्तारी के बाद मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने से संबंधित सुरक्षा प्रदान करता है।

बॉम्बे हाईकोर्ट की इस टिप्पणी में एक और पहलू सामने आया है। अदालत ने 24 घंटे के भीतर पेश किए जाने की समय-सीमा के साथ-साथ स्थान और नजदीकी मजिस्ट्रेट के सवाल को भी महत्वपूर्ण माना है।

कलीम इसाक शेख बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले में दिया गया यह आदेश इसलिए चर्चा में है क्योंकि अदालत ने जांच एजेंसियों की प्रक्रिया पर स्पष्ट बात कही है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को कहां और किस मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना चाहिए, इस सवाल को अदालत ने केवल समय की गणना तक सीमित नहीं माना।

Case Title: Kalim Isaq Shaikh vs State of Maharashtra