बॉम्बे हाईकोर्ट में अदालत की कार्यवाही की कथित तौर पर बिना अनुमति वीडियो रिकॉर्डिंग करने के मामले में सख्त कार्रवाई की गई है। कोर्ट ने एक एडवोकेट क्लर्क का मोबाइल फोन जब्त करने का आदेश दिया और उस पर ₹10,000 का जुर्माना लगाया। वहीं, क्लर्क को रिकॉर्डिंग करने का निर्देश देने वाले जूनियर वकील पर ₹25,000 का जुर्माना लगाया गया है। हाईकोर्ट ने साफ किया कि अदालत की कार्यवाही रिकॉर्ड करने के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना जरूरी है। यह प्रतिबंध केवल लाइव स्ट्रीमिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि किसी दूसरे तरीके से की जाने वाली रिकॉर्डिंग पर भी लागू होता है।
कोर्ट परिसर में रिकॉर्डिंग करते पकड़ा गया क्लर्क, ऐसे खुला मामला
यह मामला बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सामने आया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, हाईकोर्ट के प्रोथोनोटरी एवं सीनियर मास्टर अदालत के गलियारे से गुजर रहे थे। इसी दौरान उनकी नजर एक व्यक्ति पर पड़ी, जो मोबाइल फोन से कोर्ट की कार्यवाही रिकॉर्ड कर रहा था।
उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कोर्ट रूम में पहुंचकर पीठ को इसकी जानकारी दी। इसके बाद पता चला कि रिकॉर्डिंग करने वाला व्यक्ति एक एडवोकेट क्लर्क था। आरोप था कि वह एक जूनियर वकील के निर्देश पर मोबाइल से कार्यवाही रिकॉर्ड कर रहा था।
जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की खंडपीठ ने 19 अक्टूबर को पारित आदेश में इस मामले पर सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने कहा कि निर्धारित अनुमति के बिना कार्यवाही की रिकॉर्डिंग करना हाईकोर्ट के नियमों का उल्लंघन है।
इस मामले में कार्रवाई का संदेश स्पष्ट है। अदालत के भीतर या उसकी कार्यवाही के दौरान मोबाइल से वीडियो बनाने को सामान्य गतिविधि मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
क्लर्क पर ₹10,000 और जूनियर वकील पर ₹25,000 का जुर्माना
हाईकोर्ट ने रिकॉर्डिंग करने वाले क्लर्क का मोबाइल फोन जब्त करने का आदेश दिया। साथ ही, क्लर्क पर ₹10,000 का जुर्माना लगाया गया। दूसरी ओर, उसे रिकॉर्डिंग करने का निर्देश देने वाले जूनियर वकील को ₹25,000 हाईकोर्ट एम्प्लॉइज मेडिकल वेलफेयर फंड में जमा करने का निर्देश दिया गया।
पीठ ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि एक वकील ने अपने क्लर्क को अदालत की कार्यवाही रिकॉर्ड करने के लिए कहा। अदालत के मुताबिक, अधिवक्ताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े नियमों को समझें और उनका पालन करें।
हालांकि, पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि संबंधित वकील बार में जूनियर है और संभव है कि उसे वकालत के बुनियादी प्रशिक्षण तथा अदालत में अपेक्षित आचरण की पर्याप्त जानकारी न हो।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले में अवमानना की कार्यवाही शुरू कर सकती थी और संबंधित वकील के खिलाफ कार्रवाई के लिए मामला बार काउंसिल को भी भेज सकती थी। लेकिन फिलहाल पीठ ने इन विकल्पों पर आगे बढ़ने के बजाय जुर्माना लगाने का रास्ता चुना।
अदालत की कार्यवाही रिकॉर्ड करने पर क्या कहते हैं नियम?
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अदालत की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग पर लागू प्रतिबंध का दायरा व्यापक है। यह केवल लाइव स्ट्रीमिंग तक सीमित नहीं है। किसी अन्य माध्यम से की गई रिकॉर्डिंग भी नियमों के दायरे में आती है।
इसका मतलब है कि अदालत में मौजूद होने भर से किसी व्यक्ति को वीडियो बनाने या कार्यवाही रिकॉर्ड करने की स्वतः अनुमति नहीं मिल जाती। इसके लिए लागू नियमों और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है।
आम लोगों के लिए भी यह निर्देश महत्वपूर्ण है। कई बार लोग किसी चर्चित मामले की सुनवाई देखने, जानकारी जुटाने या उसे दूसरों तक पहुंचाने के उद्देश्य से अदालत पहुंचते हैं। लेकिन अदालत की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग और वहां मौजूद रहकर सुनवाई देखने में अंतर है। केवल सुनवाई देखने की अनुमति को रिकॉर्डिंग की अनुमति नहीं माना जा सकता।
इसलिए वकीलों, उनके क्लर्कों, कानून के विद्यार्थियों, पक्षकारों और पत्रकारों को भी अदालत के नियमों का ध्यान रखना चाहिए।
सभी के लिए खुले हैं कोर्ट के दरवाजे, लेकिन नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई
खंडपीठ ने कहा कि अदालत के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। इनमें संबंधित मामले के वकील, दूसरे अधिवक्ता, जूनियर वकील, कानून के विद्यार्थी, पक्षकार और पत्रकार शामिल हैं। लेकिन अदालत में प्रवेश की अनुमति के साथ जिम्मेदारी भी आती है।
पीठ के मुताबिक, हर व्यक्ति को अदालत की गरिमा बनाए रखनी चाहिए और वहां लागू बुनियादी नियमों का पालन करना चाहिए। अदालत का माहौल अनुशासित रहना जरूरी है, ताकि न्यायिक कार्यवाही सुचारु रूप से चल सके।
हाईकोर्ट ने चेतावनी दी कि भविष्य में इस तरह के उल्लंघनों को गंभीरता से लिया जाएगा। पीठ ने यह भी संकेत दिया कि नियमों की अनदेखी, लापरवाही और ऐसी घटनाओं के बार-बार सामने आने की स्थिति में कानून के अनुसार कार्रवाई करना जरूरी होगा।
इस आदेश से स्पष्ट संदेश मिलता है कि अदालत की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग कोई सामान्य अधिकार नहीं है। न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति को आर्थिक दंड के साथ दूसरी कानूनी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है।



