BS-7 नियमों पर वाहन कंपनियों को मिल सकती है बड़ी राहत! SIAM ने सरकार से की 4 साल की मोहलत देने की मांग, जानिए कब से लागू होंगे नए नियम

BS-7 नियमों पर वाहन कंपनियों को मिल सकती है बड़ी राहत! SIAM ने सरकार से की 4 साल की मोहलत देने की मांग, जानिए कब से लागू होंगे नए नियम

देश में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार अब वाहनों के उत्सर्जन से जुड़े नियम और सख्त करने की तैयारी में है। इसी कड़ी में BS-7 उत्सर्जन मानकों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, नए नियम लागू होने से पहले वाहन निर्माता कंपनियां सरकार से कुछ राहत चाहती हैं। वाहन उद्योग के संगठन सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को पत्र लिखकर भारी वाहनों के लिए कुछ प्रावधानों को लागू करने की समयसीमा चार साल आगे बढ़ाने का सुझाव दिया है। संगठन चाहता है कि बस और ट्रक के टायरों तथा ब्रेक से निकलने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने वाले नियम अप्रैल 2031 के बजाय अप्रैल 2035 से लागू किए जाएं। सरकार ने भी प्रस्तावित नियमों पर संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। ऐसे में आने वाले समय में यह तय होगा कि वाहन कंपनियों को कितनी राहत मिलती है।

BS-7 नियमों पर सरकार की तैयारी, कंपनियों से मांगे सुझाव

भारत में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए लगातार नए उत्सर्जन मानक लागू किए जाते रहे हैं। अब सरकार BS-7 मानकों की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसका उद्देश्य वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करना और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करना है।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने प्रस्तावित नियमों को लेकर संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। इसमें वाहन निर्माता कंपनियों और उद्योग से जुड़े संगठनों को अपनी बात रखने का मौका दिया गया है।

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, सरकार पर्यावरण संरक्षण और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए BS-7 मानकों को लागू करने के पक्ष में है। हालांकि, वाहन निर्माताओं की चिंताओं को भी सुना जाएगा और इस पर बातचीत के रास्ते खुले हैं।

यानी सरकार का रुख साफ है कि नए उत्सर्जन मानक लागू करने की योजना पर काम जारी रहेगा, लेकिन नियमों की समयसीमा और कुछ तकनीकी प्रावधानों पर उद्योग की राय पर विचार किया जा सकता है।

SIAM ने भारी वाहनों के लिए मांगी चार साल की मोहलत

BS-7 नियमों को लेकर वाहन निर्माताओं की सबसे बड़ी मांग भारी वाहनों से संबंधित है। SIAM ने मंत्रालय को भेजे पत्र में बस और ट्रक जैसे वाहनों के टायरों और ब्रेक से निकलने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने वाले प्रावधानों की समयसीमा बढ़ाने का सुझाव दिया है।

मौजूदा प्रस्ताव के मुताबिक, इन नियमों को अप्रैल 2031 से लागू किया जाना है। लेकिन SIAM चाहता है कि इन्हें अप्रैल 2035 से प्रभावी किया जाए।

संगठन का सुझाव सामने आने के बाद इस मुद्दे पर वाहन उद्योग और सरकार के बीच चर्चा की संभावना बढ़ गई है। हालांकि, मंत्रालय ने अभी इस मांग को स्वीकार करने का कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।

यह विषय इसलिए भी अहम है क्योंकि BS-7 के तहत केवल इंजन से निकलने वाले उत्सर्जन पर ही नहीं, बल्कि टायर और ब्रेक से पैदा होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

अगर प्रस्तावित समयसीमा में बदलाव होता है, तो भारी वाहन निर्माता कंपनियों को नई तकनीक और उत्पादन व्यवस्था के लिए अतिरिक्त समय मिल सकता है।

नई कारों और हल्के मालवाहक वाहनों पर कब से लागू होंगे BS-7 नियम?

प्रस्तावित नियमों में अलग-अलग श्रेणी के वाहनों के लिए अलग समयसीमा रखी गई है। सरकार की योजना के अनुसार, 1 अप्रैल 2029 से बनने वाले सभी नए यात्री कार मॉडलों पर BS-7 उत्सर्जन मानक लागू करने का प्रस्ताव है।

इसके बाद 1 अप्रैल 2030 से N1 श्रेणी के हल्के मालवाहक वाहनों के लिए भी ये नियम लागू करने की योजना है।

इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में नई कारों और छोटे मालवाहक वाहनों के निर्माण में कंपनियों को नए उत्सर्जन मानकों का पालन करना होगा।

वाहन श्रेणी प्रस्तावित लागू होने की तारीख
नई यात्री कारों के मॉडल 1 अप्रैल 2029
N1 श्रेणी के हल्के मालवाहक वाहन 1 अप्रैल 2030
भारी वाहनों के टायर और ब्रेक प्रदूषण नियम अप्रैल 2031
SIAM की मांग के अनुसार भारी वाहनों के नियम अप्रैल 2035

आम लोगों पर क्या होगा असर, क्या महंगी हो सकती हैं नई गाड़ियां?

BS-7 मानकों का असर केवल वाहन निर्माता कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले समय में नई कार खरीदने वाले ग्राहकों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।

नए उत्सर्जन मानकों के लिए कंपनियों को वाहनों की तकनीक और उत्पादन प्रक्रिया में बदलाव करने पड़ सकते हैं। हालांकि, इन बदलावों की लागत कितनी होगी और उसका असर गाड़ियों की कीमतों पर पड़ेगा या नहीं, इस बारे में अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

दूसरी तरफ, प्रदूषण नियंत्रण के लिहाज से सख्त नियम लागू होने पर वाहनों से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार SIAM की मांग पर क्या फैसला लेती है। अगर भारी वाहनों के लिए समयसीमा बढ़ाई जाती है, तो कंपनियों को तैयारी के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा। लेकिन BS-7 लागू करने की व्यापक योजना पर सरकार आगे बढ़ना चाहती है।

कुल मिलाकर, आने वाले वर्षों में भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए BS-7 मानक एक बड़ा बदलाव साबित हो सकते हैं। इसका असर वाहन कंपनियों की तकनीक, उत्पादन लागत और भविष्य में बाजार में आने वाले नए मॉडलों पर देखने को मिल सकता है।