महिला जज के चैंबर में घुसने की कोशिश का आरोप, TMC नेता सुजीत बोस का केस सुनने से जस्टिस सुव्रा घोष ने किया इनकार

महिला जज के चैंबर में घुसने की कोशिश का आरोप, TMC नेता सुजीत बोस का केस सुनने से जस्टिस सुव्रा घोष ने किया इनकार

कोलकाता हाई कोर्ट में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने अदालत की कार्यवाही और न्यायिक मर्यादा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। टीएमसी नेता और पूर्व मंत्री सुजीत बोस से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहीं जस्टिस सुव्रा घोष ने आरोप लगाया कि बोस के वकील और उनके निजी सहायक (पीए) ने उनके चैंबर में जबरन प्रवेश करने की कोशिश की। जज के मुताबिक, दोनों केस से जुड़े रिकॉर्ड देखना चाहते थे और स्टाफ के मना करने के बावजूद चैंबर में घुसने पर अड़े रहे। इस घटना के बाद जस्टिस घोष ने खुद को मामले की सुनवाई से अलग कर लिया और पूरे घटनाक्रम की जानकारी कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को दे दी।

यह मामला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि सुजीत बोस पहले से ही कथित नगरपालिका भर्ती घोटाले में न्यायिक हिरासत में हैं और उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) जांच कर रहा है।

जज ने कोर्ट में सुनाई पूरी घटना

जस्टिस सुव्रा घोष ने अदालत में बताया कि मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी थी और फैसला सुरक्षित रखा गया था। उनके अनुसार, अगले दिन जब वह कोर्ट रूम में थीं, तभी याचिकाकर्ता के वकील और उनके पीए उनके चैंबर तक पहुंच गए।

जज का कहना है कि दोनों ने स्टाफ से केस के रिकॉर्ड बाहर लाने को कहा। जब कर्मचारियों ने ऐसा करने से इनकार किया तो वे चैंबर में जबरन प्रवेश करने का प्रयास करने लगे। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि वे रिकॉर्ड देखकर ही जाएंगे।

जस्टिस घोष ने इस व्यवहार को न्यायिक प्रक्रिया में अनुचित हस्तक्षेप की कोशिश बताते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियों में निष्पक्ष सुनवाई बनाए रखना आवश्यक है। इसी वजह से उन्होंने खुद को इस मामले से अलग करने का फैसला किया।

अब किसके पास जाएगी सुनवाई?

घटना के बाद जस्टिस सुव्रा घोष ने पूरे मामले की जानकारी कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपब्रत चक्रवर्ती को दे दी है।

अब यह तय करना मुख्य न्यायाधीश के अधिकार क्षेत्र में होगा कि सुजीत बोस से जुड़े इस मामले की सुनवाई आगे किस बेंच को सौंपी जाएगी। चूंकि फैसला पहले ही सुरक्षित रखा गया था, इसलिए नए सिरे से आगे की प्रक्रिया अदालत के प्रशासनिक निर्णय पर निर्भर करेगी।

भर्ती घोटाले में जेल में हैं सुजीत बोस

टीएमसी नेता और पश्चिम बंगाल सरकार के पूर्व अग्निशमन सेवा मंत्री सुजीत बोस फिलहाल कथित नगरपालिका भर्ती घोटाले के मामले में न्यायिक हिरासत में हैं।

ईडी का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं और बोस ने करीब 150 नामों की सिफारिश की थी। जांच एजेंसी का दावा है कि इन नियुक्तियों के बदले धन वसूला गया और कथित रूप से यह राशि बाद में परिवार के सदस्यों के खातों तक पहुंचाई गई।

ईडी ने इन्हीं आरोपों के आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया था और फिलहाल मामले की जांच जारी है।

न्यायिक प्रक्रिया पर उठे अहम सवाल

यह घटना अदालतों में न्यायिक स्वतंत्रता और अदालत की कार्यप्रणाली की सुरक्षा को लेकर भी चर्चा का विषय बन गई है। जस्टिस सुव्रा घोष ने अपने आदेश में संकेत दिया कि अदालत के रिकॉर्ड तक इस तरह पहुंचने की कोशिश न्यायिक प्रक्रिया के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

हालांकि, इस घटनाक्रम पर संबंधित पक्ष की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश इस मामले की सुनवाई के लिए अगली बेंच का गठन कब करते हैं और आगे की न्यायिक प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।