घर खरीदने वालों से धोखे पर CBI की बड़ी कार्रवाई: 8 राज्यों में 77 जगह छापे, बिल्डरों-बैंकों पर 22 नए केस

घर खरीदने वालों से धोखे पर CBI की बड़ी कार्रवाई: 8 राज्यों में 77 जगह छापे, बिल्डरों-बैंकों पर 22 नए केस

घर खरीदने का सपना अक्सर जीवन की सबसे बड़ी आर्थिक प्रतिबद्धता होता है, लेकिन इसी सपने को निशाना बनाकर बड़े स्तर पर धोखाधड़ी किए जाने के आरोपों ने अब गंभीर कानूनी मोड़ ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने देशभर में व्यापक कार्रवाई करते हुए 8 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 77 स्थानों पर छापेमारी की है। इस कार्रवाई का केंद्र रियल एस्टेट सेक्टर में बिल्डरों और बैंक अधिकारियों के कथित गठजोड़ को उजागर करना है।

देशव्यापी छापेमारी: क्या मिला जांच एजेंसी को

सीबीआई ने इस अभियान के तहत 22 नई एफआईआर दर्ज की हैं। एजेंसी के मुताबिक, यह एक समन्वित ऑपरेशन था, जिसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर हो रही वित्तीय अनियमितताओं और फंड के दुरुपयोग के सबूत जुटाना था।

छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अन्य संदिग्ध सामग्री जब्त की गई है। अधिकारियों का मानना है कि ये साक्ष्य पूरे नेटवर्क को समझने और जिम्मेदार लोगों की पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

बिल्डर-बैंक गठजोड़: कैसे हुआ घर खरीदारों के साथ खेल

जांच का फोकस उन मामलों पर है, जहां बिल्डरों और बैंक अधिकारियों के बीच मिलीभगत का आरोप है। खासतौर पर ‘सबवेंशन स्कीम’ के तहत घर खरीदने वाले लोगों को निशाना बनाया गया।

आरोप है कि बैंकों ने बिना पर्याप्त जांच-पड़ताल किए बिल्डरों को लोन जारी कर दिए, जबकि कई प्रोजेक्ट्स जमीन पर मौजूद ही नहीं थे या केवल कागजों तक सीमित थे। इसका सीधा असर उन खरीदारों पर पड़ा, जिन्होंने EMI और किराया दोनों का बोझ झेला।

सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से तेज हुई जांच

इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब हजारों घर खरीदारों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पहले एनसीआर में सात एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे।

बाद में अदालत ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, मोहाली और प्रयागराज जैसे शहरों के प्रोजेक्ट्स को भी शामिल किया। इसके बाद अब कुल 22 नए मामलों में जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

पहले से दर्ज 28 मामले अंतिम चरण में

सीबीआई ने बताया कि इससे पहले दर्ज किए गए 28 मामलों की जांच अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। इन मामलों में भी समान प्रकार की अनियमितताओं और धोखाधड़ी के पैटर्न सामने आए हैं।

ज्यादातर केस एनसीआर क्षेत्र से जुड़े हैं, जहां रियल एस्टेट सेक्टर में तेजी के दौरान कई प्रोजेक्ट्स शुरू किए गए, लेकिन समय पर पूरे नहीं हुए या वित्तीय गड़बड़ियों में फंस गए।

यह कार्रवाई सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों के भरोसे को बहाल करने की कोशिश भी है, जिन्होंने अपनी जीवनभर की कमाई घर के सपने में लगा दी। आने वाले समय में यह जांच रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नए मानक तय कर सकती है।