2,161 करोड़ रुपये के कथित छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े नोएडा एफआईआर मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को बड़ी राहत दी है। अदालत ने उनकी जमानत याचिका मंजूर करते हुए कहा कि केवल किसी आरोपी का आपराधिक इतिहास होना, उसे जमानत के अधिकार से वंचित करने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता। कोर्ट ने यह भी माना कि इस मामले में जांच पूरी हो चुकी है और राज्य सरकार की ओर से ऐसा कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया गया, जिससे यह आशंका हो कि आरोपी सबूतों से छेड़छाड़ करेगा या गवाहों को प्रभावित करेगा।
क्या है 2,161 करोड़ रुपये का कथित शराब घोटाला?
यह मामला छत्तीसगढ़ में सामने आए 2,161 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाले से जुड़ा है। आरोप है कि राज्य की आबकारी नीति और टेंडर प्रक्रिया इस तरह तैयार की गई, जिससे नोएडा स्थित होलोग्राम निर्माता कंपनी ‘मेसर्स प्रिज्म होलोग्राफी सिक्योरिटी फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड’ को कथित रूप से अनुचित लाभ मिला।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, शराब की बिक्री में इस्तेमाल होने वाले कथित नकली और अवैध होलोग्राम नोएडा में तैयार किए जा रहे थे। इसी सूचना के आधार पर उत्तर प्रदेश के कासना थाना क्षेत्र में भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।
हाईकोर्ट ने किन आधारों पर दी जमानत?
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस विक्रम डी. चौहान की एकल पीठ ने कहा कि राज्य सरकार यह साबित नहीं कर सकी कि निरंजन दास जमानत मिलने पर सबूतों के साथ छेड़छाड़ करेंगे, गवाहों को धमकाएंगे या कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित करेंगे।
अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि इस मामले से जुड़े मुख्य कथित अपराध छत्तीसगढ़ में हुए थे और वहां से संबंधित मामलों में सुप्रीम कोर्ट पहले ही उन्हें राहत दे चुका है। साथ ही उत्तर प्रदेश में दर्ज एफआईआर की जांच भी पूरी हो चुकी है। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने जमानत मंजूर कर ली।
हालांकि अदालत ने जमानत देते हुए यह शर्त भी लगाई कि निरंजन दास बिना अनुमति देश छोड़कर नहीं जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट से पहले ही मिल चुकी थी राहत
इस मामले से पहले मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने निरंजन दास को मुख्य मामले और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) से जुड़े केस में भी जमानत दे दी थी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता ने आरोपी के आपराधिक इतिहास का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया। लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल आपराधिक इतिहास के आधार पर किसी व्यक्ति को जमानत से वंचित नहीं किया जा सकता, जब तक उसके खिलाफ ऐसे ठोस तथ्य मौजूद न हों जो न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की आशंका पैदा करें।
अब आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद निरंजन दास को नोएडा एफआईआर से जुड़े मामले में भी राहत मिल गई है। हालांकि, कथित शराब घोटाले से जुड़े अन्य मामलों की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी और जांच एजेंसियां अपने स्तर पर कार्रवाई करती रहेंगी।
यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अदालत ने जमानत के सिद्धांतों पर विस्तार से टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी आरोपी को केवल उसके आपराधिक रिकॉर्ड के आधार पर जमानत से वंचित नहीं किया जा सकता। अंतिम दोष तय होना अब संबंधित अदालतों में चल रही सुनवाई और मुकदमे की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।


