सुप्रीम कोर्ट की एक सुनवाई के दौरान ऐसा भावुक और मानवीय पल देखने को मिला, जिसने कोर्ट रूम का माहौल कुछ देर के लिए बदल दिया। दो लंबित मामलों के निपटारे की गुहार लेकर पहुंचे 75 वर्षीय एक याचिकाकर्ता जब अपनी उम्र का हवाला देते हुए भावुक हो गए, तो भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने उन्हें न सिर्फ धैर्य बंधाया, बल्कि सकारात्मक सोच के साथ जीवन जीने की सलाह भी दी। CJI की यह टिप्पणी अब चर्चा का विषय बनी हुई है।
‘उम्र हो गई है माई लॉर्ड…’, बुजुर्ग की बात सुन भावुक हुआ माहौल
रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में दो लंबित मामलों की सुनवाई के दौरान 75 वर्षीय याचिकाकर्ता मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ के सामने पेश हुए। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि उनके मामलों का जल्द निपटारा किया जाए।
अपनी बात रखते हुए बुजुर्ग भावुक हो गए और कहा, “उम्र हो गई है माई लॉर्ड… और कितने दिन जिएंगे?” उनका आशय यह था कि जीवनकाल में ही उनके दोनों मामलों का फैसला हो जाए।
उनकी इस भावनात्मक अपील के बाद कुछ पल के लिए अदालत का माहौल गंभीर हो गया।
CJI सूर्यकांत का जवाब सुन कोर्ट रूम में छा गई मुस्कान
याचिकाकर्ता की बात सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बेहद सहज और आत्मीय अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा,
“75 साल की उम्र कुछ नहीं होती। आप 85 साल बोलते तो हमें बुरा लगता… अभी घूमिए-फिरिए।”
CJI की इस टिप्पणी ने कोर्ट रूम का माहौल हल्का कर दिया। वहां मौजूद लोग मुस्कुरा उठे और बुजुर्ग याचिकाकर्ता का भी हौसला बढ़ा। मुख्य न्यायाधीश का संदेश स्पष्ट था कि बढ़ती उम्र को निराशा की वजह नहीं, बल्कि सकारात्मक सोच के साथ जीवन जीने का अवसर माना जाना चाहिए।
मानवीय संवेदनशीलता की चर्चा
सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही आमतौर पर गंभीर कानूनी मुद्दों के लिए जानी जाती है, लेकिन कई बार सुनवाई के दौरान ऐसे मानवीय पल भी सामने आते हैं, जो लंबे समय तक याद रखे जाते हैं।
इस मामले में भी CJI सूर्यकांत की टिप्पणी को अदालत की संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने न केवल याचिकाकर्ता की भावनाओं को समझा, बल्कि उन्हें सकारात्मक रहने और तनाव से दूर रहने की सलाह भी दी।
मामले की सुनवाई जारी रहेगी
यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया जब बुजुर्ग याचिकाकर्ता अपने दो लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। उनकी मुख्य चिंता यही थी कि उनके मामलों का फैसला उनके जीवनकाल में हो सके।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार अदालत ने इस दौरान मामलों के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की। सुनवाई के दौरान हुई यह बातचीत ही चर्चा का विषय बन गई, जिसमें CJI सूर्यकांत ने अपने सहज और सकारात्मक शब्दों से एक भावुक याचिकाकर्ता का मनोबल बढ़ाया।


