मानसून सत्र में मोदी सरकार पर हमलावर होगी कांग्रेस: पहलगाम हमले से लेकर बेरोजगारी तक, सोनिया गांधी ने बनाई रणनीति

मानसून सत्र में मोदी सरकार पर हमलावर होगी कांग्रेस: पहलगाम हमले से लेकर बेरोजगारी तक, सोनिया गांधी ने बनाई रणनीति

नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से शुरू होने जा रहा है, और इस बार कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर ली है। कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी की अगुवाई में हुई संसदीय रणनीति समिति की बैठक में फैसला लिया गया कि पहलगाम आतंकी हमला सबसे बड़ा मुद्दा होगा, और इस पर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब मांगा जाएगा। कांग्रेस ने न सिर्फ पहलगाम हमले को चार हिस्सों में बांटकर सरकार पर हमला बोलने की रणनीति बनाई, बल्कि बेरोजगारी, किसानों की आत्महत्या, और मणिपुर की स्थिति जैसे कई अहम मुद्दों को भी शॉर्टलिस्ट किया है। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं।

पहलगाम हमले पर सरकार से सीधे सवाल

कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि मानसून सत्र में पहलगाम आतंकी हमला सबसे बड़ा मुद्दा होगा। अप्रैल 2022 में हुए इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी, और कांग्रेस का कहना है कि सरकार ने इस मामले में अब तक जवाबदेही तय नहीं की। पार्टी ने चार बड़े सवाल उठाए हैं:

  1. इतने महीनों बाद भी 28 महिलाओं के सुहाग उजाड़ने वाले आतंकियों का कोई सुराग क्यों नहीं मिला?

  2. सरकार ने खुद माना कि पहलगाम हमले में सुरक्षा में चूक हुई थी। तो यह चूक कैसे हुई, और इसके लिए कौन जिम्मेदार है?

  3. ऑपरेशन सिंदूर के तहत जब भारतीय सेना आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही थी, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दबाव में सीजफायर क्यों किया गया? ट्रम्प 23 बार दावा कर चुके हैं कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की, लेकिन पीएम मोदी चुप क्यों हैं?

  4. सेना के एक अधिकारी ने कहा था कि इस हमले में पाकिस्तान तो सिर्फ चेहरा था, असली मदद चीन ने पीछे से की। फिर विदेश मंत्री एस जयशंकर चीन जाकर गलबहियां क्यों कर रहे हैं?

विपक्ष को साथ लाने की कोशिश

सोनिया गांधी ने बैठक में साफ किया कि पहलगाम हमले पर पूरे विपक्ष ने विशेष सत्र की मांग की थी, लेकिन सरकार ने इसे ठुकरा दिया। अब मानसून सत्र में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया जाएगा। कांग्रेस चाहती है कि इंडिया गठबंधन के सभी दल मिलकर सरकार पर दबाव बनाएं। इसके लिए जल्द ही सोनिया गांधी की अगुवाई में इंडिया गठबंधन की बैठक होगी, जिसमें सभी विपक्षी दलों की रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। हालांकि, इस बैठक में कांग्रेस सांसद शशि थरूर की गैरमौजूदगी ने सवाल खड़े किए हैं। थरूर ने पहले से तय पारिवारिक कार्यक्रमों का हवाला देकर अनुपस्थिति की जानकारी दी, लेकिन उनकी और पार्टी के बीच हाल की तनातनी को देखते हुए यह चर्चा का विषय बना हुआ है।

इन मुद्दों पर भी सरकार को घेरेगी कांग्रेस

पहलगाम के अलावा कांग्रेस ने सत्र के लिए कई अन्य बड़े मुद्दों को भी चुना है:

  1. चुनाव आयोग पर सवाल: कांग्रेस का आरोप है कि केंद्रीय चुनाव आयोग सरकार की कठपुतली बन गया है। बिहार में विशेष गहन संशोधन (SIR) को लोकतंत्र को कुचलने की कोशिश बताया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि बिहार के बाद पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों का नंबर आ सकता है।

  2. महिलाओं पर अत्याचार: मणिपुर, ओडिशा, और अन्य राज्यों में महिलाओं और अनुसूचित जातियों पर बढ़ते अत्याचार पर केंद्र की चुप्पी पर सवाल उठाए जाएंगे। कांग्रेस पूछेगी कि पीएम मोदी अब तक मणिपुर क्यों नहीं गए?

  3. जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा: जम्मू-कश्मीर में चुनाव हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन केंद्र ने अब तक पूर्ण राज्य का दर्जा क्यों नहीं दिया?

  4. किसानों की समस्याएं: किसानों की आत्महत्या, कर्जमाफी, आय दोगुनी करने का वादा, और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सरकार की खामोशी पर सवाल उठाए जाएंगे।

  5. बेरोजगारी का मुद्दा: 2014 में हर साल 2 करोड़ नौकरियां देने का वादा हवा-हवाई साबित हुआ। बेरोजगारी चरम पर क्यों है?

  6. आर्थिक असमानता: कुछ उद्योगपतियों के कर्ज माफ हो रहे हैं, जबकि गरीब और गरीब हो रहा है। देश की दौलत कुछ चुनिंदा लोगों के पास क्यों सिमट रही है?

  7. संविधान पर खतरा: कांग्रेस ने संविधान के प्रस्तावना से “पंथनिरपेक्ष” और “समाजवाद” शब्द हटाने की बहस पर कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी का कहना है कि अगर सरकार ऐसा कोई प्रस्ताव लाती है, तो उसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।

इंडिया गठबंधन की एकजुटता

कांग्रेस की रणनीति न सिर्फ अपनी आवाज को बुलंद करना है, बल्कि इंडिया गठबंधन के सभी दलों को एक मंच पर लाकर सरकार पर दबाव बनाना है। सोनिया गांधी की अगुवाई में 19 या 20 जुलाई को इंडिया गठबंधन की बैठक होने की संभावना है, जिसमें संसद में उठाए जाने वाले मुद्दों पर सहमति बनाई जाएगी। कांग्रेस का मानना है कि पहलगाम हमले जैसे संवेदनशील मुद्दे पर पूरे विपक्ष की एकजुटता से सरकार को जवाब देना होगा।

सत्र में हंगामे के आसार

मानसून सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त तक चलेगा, और इसमें कई अहम विधेयक पेश होने की उम्मीद है। लेकिन कांग्रेस और विपक्ष की रणनीति को देखते हुए सत्र में तीखी बहस और हंगामे के आसार हैं। खास तौर पर पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर जैसे मुद्दों पर सरकार को कठघरे में खड़ा करने की पूरी तैयारी है। कांग्रेस का कहना है कि यह सत्र न सिर्फ सरकार की जवाबदेही तय करने का मौका है, बल्कि देश की जनता को यह दिखाने का भी मौका है कि विपक्ष उनके मुद्दों के लिए लड़ रहा है।