दिल्ली रेस क्लब को बड़ा झटका, बेदखली पर रोक से कोर्ट का इनकार, 26 सितंबर को अगली सुनवाई

दिल्ली रेस क्लब को बड़ा झटका, बेदखली पर रोक से कोर्ट का इनकार, 26 सितंबर को अगली सुनवाई

दिल्ली रेस क्लब को फिलहाल राहत मिलती नहीं दिख रही है। पटियाला हाउस कोर्ट ने एस्टेट ऑफिसर की ओर से जारी बेदखली के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने माना कि क्लब को अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त मौके दिए गए थे, लेकिन उसने समय रहते अपना जवाब और जरूरी सबूत पेश नहीं किए। कोर्ट के इस फैसले के बाद क्लब के लिए जमीन और कब्जे से जुड़ा विवाद और गंभीर हो गया है। हालांकि, मुख्य अपील अभी बाकी है और इसकी सुनवाई 26 सितंबर को होगी।

शिकायत की कॉपी नहीं मिली? कोर्ट ने दलील क्यों ठुकराई

पटियाला हाउस कोर्ट के प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज पीतांबर दत्त ने मामले की सुनवाई करते हुए क्लब की उस दलील को स्वीकार नहीं किया, जिसमें कहा गया था कि उसे भारत संघ की शिकायत की कॉपी नहीं दी गई थी।

क्लब की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन बताया। उनका कहना था कि जब शिकायत की कॉपी ही नहीं मिली, तो क्लब को प्रभावी तरीके से अपना पक्ष रखने का मौका कैसे मिला?

अदालत ने रिकॉर्ड देखने के बाद इस दलील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि 27 अप्रैल 2026 के आदेश में एस्टेट ऑफिसर ने साफ तौर पर दर्ज किया था कि शिकायत की कॉपी क्लब को दी गई थी।

इतना ही नहीं, उस आदेश पर क्लब के सचिव और उसके कानूनी प्रतिनिधि कर्नल एसके बख्शी के हस्ताक्षर भी थे। इसके बाद क्लब ने किसी भी तारीख पर यह शिकायत नहीं की कि उसे शिकायत की कॉपी नहीं मिली।

जवाब दाखिल करने के मौके मिले, फिर भी क्यों नहीं दिया पक्ष?

अदालत के मुताबिक, एस्टेट ऑफिसर ने क्लब को अपना जवाब दाखिल करने और सबूत पेश करने के लिए पर्याप्त अवसर दिए। लेकिन क्लब ने अपनी ओर से जवाब दाखिल नहीं किया।

कोर्ट ने कहा कि इन परिस्थितियों में एस्टेट ऑफिसर के पास मामले को आदेश के लिए सुरक्षित रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। अदालत ने यह भी माना कि क्लब को अपना पक्ष रखने से रोका नहीं गया था।

यही बात अंतरिम राहत के मामले में क्लब के खिलाफ गई। अदालत ने कहा कि केवल यह आरोप लगा देना कि उचित सुनवाई का मौका नहीं मिला, पर्याप्त नहीं है। रिकॉर्ड से यह साबित होना चाहिए कि वास्तव में पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया था।

15 दिन में जमीन खाली करने का दिया गया था नोटिस

इस विवाद की जड़ मार्च 2026 तक जाती है। पब्लिक प्रीमिसेस एक्ट की धारा 5 के तहत कार्रवाई शुरू होने से पहले भारत संघ की ओर से 12 मार्च 2026 को क्लब को नोटिस जारी किया गया था।

इसमें क्लब से कहा गया था कि वह जमीन खाली करे और उसका खाली व शांतिपूर्ण कब्जा लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस को 15 दिनों के भीतर सौंप दे। नोटिस में यह भी कहा गया था कि ऐसा नहीं करने पर सरकार कानून के तहत जमीन वापस लेने की कार्रवाई कर सकती है।

क्लब ने इस नोटिस को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। वहां शुरुआती तौर पर उसे अंतरिम सुरक्षा मिली। सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से यह भरोसा दिया गया कि कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना क्लब को बेदखल नहीं किया जाएगा। इस बयान के बाद हाई कोर्ट ने 9 अप्रैल 2026 को मामले का निपटारा कर दिया।

इसके बाद यूनियन ऑफ इंडिया ने एस्टेट ऑफिसर के सामने शिकायत दर्ज कराई और क्लब को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। लेकिन कोर्ट के मुताबिक, नोटिस मिलने के बाद भी क्लब ने कार्यवाही का विरोध करते हुए कोई जवाब दाखिल नहीं किया।

1994 के बाद लीज रिन्यू नहीं हुई, किराया देने की दलील भी नहीं चली

क्लब ने यह भी तर्क दिया कि वह लगातार किराये का भुगतान करता रहा है। इसलिए उसे अनधिकृत कब्जेदार नहीं माना जा सकता।

अदालत ने इस दलील को भी स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि 1994 के बाद लीज को आगे बढ़ाने या रिन्यू करने के लिए कोई दस्तावेज जारी नहीं किया गया। सिर्फ किराया देते रहने से पहले ही खत्म हो चुकी लीज अपने आप रिन्यू नहीं हो जाती।

इसी आधार पर अदालत ने कहा कि क्लब 11 अगस्त 2026 के एस्टेट ऑफिसर के आदेश पर रोक लगाने के लिए प्रथम दृष्टया मामला बनाने में विफल रहा है। लिहाजा अंतरिम रोक की मांग खारिज कर दी गई।

अब इस मामले की मुख्य अपील पर 26 सितंबर को सुनवाई होगी। यानी फिलहाल बेदखली के आदेश पर रोक नहीं लगी है, लेकिन विवाद का अंतिम नतीजा अभी सामने नहीं आया है।

Case Title: Delhi Race Club (1940) Ltd. Vs. Union of India & Anr.