दिल्ली में 33 लाख वोटर रिकॉर्ड पर सवाल, 20 लाख मामलों का निपटारा, चुनाव आयोग का भरोसा- किसी पात्र मतदाता का नाम नहीं कटेगा

दिल्ली में 33 लाख वोटर रिकॉर्ड पर सवाल, 20 लाख मामलों का निपटारा, चुनाव आयोग का भरोसा- किसी पात्र मतदाता का नाम नहीं कटेगा

दिल्ली में वोटर लिस्ट की जांच के दौरान सामने आई करीब 33 लाख संदिग्ध या बिना मिलान वाली एंट्री को लेकर चुनाव आयोग ने बड़ा अपडेट दिया है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय के मुताबिक, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत इन मामलों को ठीक करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। अब तक करीब 20 लाख मामलों का निपटारा हो चुका है, जबकि बाकी मामलों पर काम जारी है। चुनाव आयोग ने मतदाताओं को भरोसा दिलाया है कि किसी भी पात्र व्यक्ति को वोटर लिस्ट से बाहर नहीं किया जाएगा। जिन लोगों को अपने नाम या दस्तावेजों को लेकर परेशानी है, वे संबंधित निर्वाचन अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।

दिल्ली में 33 लाख वोटर एंट्री में गड़बड़ी, अब तक कितना काम हुआ?

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने 12 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर SIR से जुड़ी जानकारी साझा की। इसके मुताबिक, दिल्ली की मतदाता सूची में करीब 33 लाख ऐसी एंट्री मिली थीं, जिनमें तार्किक विसंगतियां थीं या जिनका मौजूदा रिकॉर्ड से मिलान नहीं हो पा रहा था।

इनमें ऐसे मामले भी शामिल बताए गए हैं, जहां मतदाताओं की जानकारी का पुराने रिकॉर्ड, खासकर 2002 की मतदाता सूची, से मिलान नहीं हो पाया। ऐसे मामलों में निर्वाचन अधिकारियों की ओर से नोटिस जारी किए गए थे, ताकि रिकॉर्ड की जांच कर विसंगतियों को दूर किया जा सके।

अधिकारी के मुताबिक, अब तक करीब 20 लाख मामलों का समाधान किया जा चुका है। इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में रिकॉर्ड की जांच और सुधार का काम पूरा हो गया है, लेकिन सभी मामलों का निपटारा अभी नहीं हुआ है।

यह प्रक्रिया मतदाता सूची को दुरुस्त करने के उद्देश्य से चलाई जा रही है। हालांकि, जिन लोगों को नोटिस मिला है, उनके लिए यह जरूरी है कि वे उसकी जानकारी ध्यान से पढ़ें और जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारी से संपर्क करें।

SIR में नाम या रिकॉर्ड को लेकर परेशानी है? यहां करें शिकायत

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि किसी भी मतदाता को शिकायत या परेशानी होने पर निर्वाचन तंत्र के अधिकारियों से संपर्क करने का विकल्प उपलब्ध है।

जारी जानकारी के अनुसार, दिल्ली में मतदाताओं की सहायता के लिए 14,947 बूथ लेवल ऑफिसर (BLO), 902 सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (AERO), 70 निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) और 13 जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) उपलब्ध हैं। इसके अलावा, लोग दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय से भी संपर्क कर सकते हैं।

BLO मतदाता सूची से जुड़े काम में जमीनी स्तर पर अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए, यदि किसी व्यक्ति के रिकॉर्ड में नाम, पते या अन्य विवरण से जुड़ी विसंगति है, तो वह अपने क्षेत्र के BLO से जानकारी ले सकता है।

मतदाताओं को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि किसी रिकॉर्ड में गड़बड़ी मिलने का अर्थ अपने आप यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति मतदान के अधिकार से वंचित हो जाएगा। संबंधित मामले की जांच और पात्रता के आधार पर ही आगे की प्रक्रिया तय होगी।

18 और 25 अक्टूबर को विशेष शिविर, मतदाताओं को मिलेगी मदद

SIR से जुड़े मामलों के समाधान के लिए विशेष शिविर भी लगाए जा रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 18 अक्टूबर और 25 अक्टूबर 2026 को ऐसे शिविर आयोजित किए जाएंगे, जहां BLO मतदाताओं की सहायता कर सकते हैं।

इन शिविरों के जरिए लोगों को अपने रिकॉर्ड से जुड़ी समस्याओं के समाधान और जरूरी प्रक्रिया की जानकारी लेने का अवसर मिलेगा। जिन मतदाताओं को नोटिस मिला है या जिन्हें अपने नाम के मिलान को लेकर संदेह है, वे इन शिविरों में जाकर संबंधित अधिकारियों से मार्गदर्शन ले सकते हैं।

मतदाता सूची में सही जानकारी होना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि मतदान के समय नाम और संबंधित रिकॉर्ड की स्थिति महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में नोटिस मिलने पर उसे नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते जानकारी जुटाना बेहतर होगा।

हालांकि, किसी विशेष मामले में किन दस्तावेजों की जरूरत होगी, यह संबंधित नोटिस और निर्वाचन अधिकारी के निर्देशों पर निर्भर करेगा।

चुनाव आयोग का भरोसा- किसी पात्र वोटर का नाम नहीं हटेगा

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने साफ कहा है कि किसी भी पात्र मतदाता को वोटर लिस्ट से बाहर नहीं किया जाएगा। यह आश्वासन उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जो SIR के दौरान रिकॉर्ड में विसंगति सामने आने के बाद अपने मतदान अधिकार को लेकर चिंतित हैं।

फिलहाल, करीब 33 लाख मामलों में से 20 लाख का समाधान होने की जानकारी दी गई है। शेष मामलों के निपटारे के लिए अभियान जारी है। ऐसे में जिन लोगों का मामला अभी लंबित है, उन्हें अपने रिकॉर्ड की स्थिति जानने के लिए संबंधित निर्वाचन अधिकारी से संपर्क करना चाहिए।

मतदाताओं के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि यदि SIR के तहत नोटिस मिला है या रिकॉर्ड में कोई गड़बड़ी दिखाई दे रही है, तो समय रहते उसका समाधान कराने की कोशिश करें। चुनाव आयोग का कहना है कि पात्र मतदाताओं का नाम सूची से बाहर नहीं किया जाएगा। अब बाकी मामलों के निपटारे और मतदाता रिकॉर्ड को दुरुस्त करने की प्रक्रिया पर नजर रहेगी।