Dinesh Sharma बने अंडमान-निकोबार के नए उपराज्यपाल, UP के पूर्व डिप्टी CM का राज्यसभा कार्यकाल खत्म होने से पहले बड़ा फैसला

Dinesh Sharma बने अंडमान-निकोबार के नए उपराज्यपाल, UP के पूर्व डिप्टी CM का राज्यसभा कार्यकाल खत्म होने से पहले बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और मौजूदा राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। यह नियुक्ति उस तारीख से प्रभावी होगी, जिस दिन दिनेश शर्मा नए पद का कार्यभार संभालेंगे। खास बात यह है कि उनका राज्यसभा कार्यकाल अगले सप्ताह समाप्त होने वाला है। ऐसे में संसद की राजनीति से निकलकर अब उनकी नई जिम्मेदारी केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन से जुड़ गई है।

राज्यसभा से राजभवन तक, अब नई जिम्मेदारी

दिनेश शर्मा फिलहाल राज्यसभा सांसद हैं। बीजेपी ने सितंबर 2023 में उन्हें उत्तर प्रदेश की एकमात्र राज्यसभा सीट के उपचुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया था। यह सीट हरिद्वार दुबे के निधन के बाद जून 2023 में खाली हुई थी।

अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद दिनेश शर्मा अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल की जिम्मेदारी संभालेंगे। यानी उनका राजनीतिक सफर अब एक नए प्रशासनिक पड़ाव में प्रवेश करने जा रहा है।

दिनेश शर्मा इससे पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी अहम भूमिका निभा चुके हैं। 2017 से 2022 के बीच योगी आदित्यनाथ सरकार के पहले कार्यकाल में वह राज्य के दो उपमुख्यमंत्रियों में से एक थे। अगस्त 2014 में उन्हें बीजेपी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी बनाया गया था।

लखनऊ के मेयर से UP के डिप्टी CM तक का सफर

दिनेश शर्मा का राजनीतिक सफर लंबे समय से बीजेपी और उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़ा रहा है। वह लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने लखनऊ के महापौर के रूप में भी काम किया।

वह पहली बार 2008 में लखनऊ के मेयर चुने गए थे। इसके बाद 2012 में उन्होंने दोबारा यह जिम्मेदारी हासिल की। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद उन्हें गुजरात का प्रभारी भी बनाया गया था।

छात्र राजनीति में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही। 1991 में उन्हें प्रदेश भारतीय जनता युवा मोर्चा का उपाध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद 1993 में वह भारतीय युवा जनता मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष चुने गए और 1998 तक इस पद पर रहे।

बीजेपी में उनकी राजनीतिक यात्रा को देखते हुए उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस के करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है। उनका पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से भी करीबी जुड़ाव बताया जाता है।

एक बयान ने भी खूब खींचा था ध्यान

दिनेश शर्मा का नाम 2018 में एक विवादित और अजीबोगरीब बयान को लेकर भी चर्चा में आया था। मथुरा में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने माता सीता के जन्म का जिक्र करते हुए कहा था कि उस दौर में भी टेस्ट ट्यूब बेबी जैसी तकनीक मौजूद रही होगी।

उन्होंने सीता को टेस्ट ट्यूब बेबी से जोड़ते हुए यह टिप्पणी की थी। बयान के बाद उनकी काफी चर्चा हुई और इसे लेकर विवाद भी सामने आया था।

हालांकि, उनके राजनीतिक और प्रशासनिक सफर की तस्वीर इससे कहीं बड़ी है। छात्र राजनीति से शुरुआत करने वाले दिनेश शर्मा लखनऊ के मेयर बने, फिर बीजेपी के राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी संभाली और इसके बाद योगी सरकार में डिप्टी सीएम रहे।

अब अंडमान-निकोबार में होगी असली परीक्षा

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की उपराज्यपाल के रूप में दिनेश शर्मा की भूमिका अब पूरी तरह अलग होगी। राजनीतिक संगठन में काम करने के बाद उन्हें केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन की जिम्मेदारी संभालनी होगी।

उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब उनका राज्यसभा कार्यकाल भी खत्म होने वाला है। इसलिए यह बदलाव उनके सार्वजनिक जीवन में एक महत्वपूर्ण नया अध्याय है।

अब देखना होगा कि उत्तर प्रदेश की सक्रिय राजनीति और संगठनात्मक अनुभव रखने वाले दिनेश शर्मा अंडमान-निकोबार में अपनी नई संवैधानिक जिम्मेदारी को किस तरह निभाते हैं। फिलहाल राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ उनकी नियुक्ति तय हो चुकी है और कार्यभार संभालने के बाद उनकी नई भूमिका औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगी।