I-PAC रेड में शामिल ED अधिकारियों को मिला सम्मान, 70वें स्थापना दिवस पर अवॉर्ड से नवाजा गया

I-PAC रेड में शामिल ED अधिकारियों को मिला सम्मान, 70वें स्थापना दिवस पर अवॉर्ड से नवाजा गया

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के 70वें स्थापना दिवस के मौके पर दो अधिकारियों को उनकी कार्यकुशलता और पेशेवर दक्षता के लिए सम्मानित किया गया। असिस्टेंट डायरेक्टर विक्रम अहलावत और प्रशांत चंडीला को यह सम्मान ऐसे समय में मिला है, जब वे इसी साल की शुरुआत में कोलकाता में हुई चर्चित I-PAC छापेमारी का हिस्सा रहे थे। दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद थे। उन्होंने दोनों अधिकारियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। यह सम्मान आमतौर पर उन अधिकारियों को दिया जाता है, जिन्होंने संवेदनशील मामलों में विशेष योगदान दिया हो।

कोलकाता रेड: जब कार्रवाई बनी सियासी मुद्दा

जनवरी 2026 में ED ने कोलकाता के सॉल्ट लेक स्थित पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के दफ्तर और लाउडन स्ट्रीट पर उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी की थी। यह कार्रवाई जल्द ही राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई। उस दिन का घटनाक्रम इसलिए भी सुर्खियों में रहा, क्योंकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद राज्य पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंच गई थीं। उन्हें कुछ दस्तावेज अपने साथ ले जाते हुए भी देखा गया, जिसके बाद मामला और गरम हो गया। ED ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया और आरोप लगाया कि सत्ता का दुरुपयोग हुआ है। एजेंसी ने इस मामले की CBI जांच की मांग भी की थी।

सम्मान के पीछे की वजह: ‘संयम और पेशेवर रवैया’

विक्रम अहलावत और प्रशांत चंडीला को जो सम्मान मिला है, उसके पीछे उनकी भूमिका को अहम माना जा रहा है। प्रशस्ति पत्र के मुताबिक, उन्होंने छापेमारी के दौरान बेहद संवेदनशील स्थिति में भी संयम बनाए रखा। अहलावत ने पूरे ऑपरेशन के दौरान घटनाओं का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार किया। यही दस्तावेज बाद में ED के लिए कानूनी कार्रवाई में महत्वपूर्ण साबित हुए। हालांकि कार्यक्रम के दौरान आधिकारिक तौर पर इस केस का नाम नहीं लिया गया, लेकिन एजेंसी के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि यह सम्मान उसी ऑपरेशन से जुड़ी कार्यप्रणाली को ध्यान में रखकर दिया गया है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और जांच एजेंसियों की भूमिका

इस पूरे मामले में तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि ED चुनावी रणनीति से जुड़े दस्तावेज हासिल करने की कोशिश कर रही थी। वहीं ED का पक्ष था कि कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों की भूमिका अक्सर राजनीतिक बहस का हिस्सा बन जाती है। लेकिन अधिकारियों को मिला यह सम्मान यह संकेत देता है कि एजेंसी अपने आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर कार्य करने वालों को प्रोत्साहित करती है। आम नागरिक के लिए यह घटनाक्रम यह समझने का अवसर भी देता है कि बड़े राजनीतिक मामलों में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई कितनी जटिल हो सकती है, और उसमें शामिल अधिकारियों से किस स्तर की पेशेवर जिम्मेदारी की अपेक्षा होती है।