अल्ट्रासाउंड क्लीनिक की फाइल के बदले मांगे 55 हजार रुपये, इटावा के डिप्टी CMO विजिलेंस के जाल में फंसे

अल्ट्रासाउंड क्लीनिक की फाइल के बदले मांगे 55 हजार रुपये, इटावा के डिप्टी CMO विजिलेंस के जाल में फंसे

इटावा में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक बड़ा भ्रष्टाचार मामला सामने आया है। उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) की टीम ने डिप्टी सीएमओ डॉ. श्रीनिवास यादव को 55 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोप है कि एक अल्ट्रासाउंड क्लीनिक की फाइल आगे बढ़ाने और आवश्यक अनुमति दिलाने के बदले यह रकम मांगी गई थी। बुधवार को मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) कार्यालय परिसर में हुई इस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। विजिलेंस ने मौके से रिश्वत की पूरी रकम भी बरामद कर ली है और आरोपी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

अल्ट्रासाउंड क्लीनिक की अनुमति के बदले मांगी गई रिश्वत

मामले की शुरुआत 4 जून 2026 को हुई, जब एक व्यक्ति ने उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान, कानपुर सेक्टर में लिखित शिकायत दर्ज कराई।

शिकायतकर्ता का आरोप था कि उसने अपनी पत्नी के नाम पर एक अल्ट्रासाउंड क्लीनिक खोलने के लिए आवेदन किया था। फाइल स्वास्थ्य विभाग में प्रक्रिया के तहत आगे बढ़नी थी, लेकिन इसके लिए डिप्टी सीएमओ डॉ. श्रीनिवास यादव कथित तौर पर 55 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहे थे।

शिकायतकर्ता ने रिश्वत देने के बजाय मामले की जानकारी विजिलेंस विभाग को देने का फैसला किया।

शिकायत की जांच के बाद बिछाया गया जाल

शिकायत मिलने के बाद सतर्कता अधिष्ठान ने आरोपों का सत्यापन शुरू किया। जांच के दौरान शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए।

इसके बाद पुलिस अधीक्षक, सतर्कता अधिष्ठान कानपुर सेक्टर के निर्देश पर एक विशेष ट्रैप टीम गठित की गई। पूरी कार्रवाई की योजना तैयार की गई और आरोपी अधिकारी को रंगे हाथ पकड़ने की रणनीति बनाई गई।

बुधवार को शिकायतकर्ता को तय प्रक्रिया के तहत आरोपी अधिकारी के संपर्क में भेजा गया। विजिलेंस की टीम पहले से पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए थी।

पैसे लेते ही विजिलेंस ने दबोचा

जैसे ही डॉ. श्रीनिवास यादव ने कथित तौर पर 55 हजार रुपये की रिश्वत स्वीकार की, विजिलेंस टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें मौके पर पकड़ लिया।

टीम ने रिश्वत की रकम भी बरामद कर ली। गिरफ्तारी की कार्रवाई मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय परिसर में हुई, जिससे पूरे कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच यह मामला पूरे दिन चर्चा का विषय बना रहा। जिले में एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी का इस तरह रिश्वत लेते हुए पकड़ा जाना प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा का केंद्र बन गया है।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत होगी कार्रवाई

सतर्कता अधिष्ठान ने आरोपी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

विभाग के अनुसार कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया जाएगा। साथ ही मामले की विस्तृत जांच भी जारी रहेगी।

विजिलेंस विभाग ने इस कार्रवाई के जरिए एक बार फिर यह संदेश देने की कोशिश की है कि सरकारी काम के बदले रिश्वत मांगने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

रिश्वत की शिकायत कहां करें?

सतर्कता अधिष्ठान ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी किसी काम के बदले रिश्वत की मांग करता है, तो उसकी शिकायत भ्रष्टाचार विरोधी हेल्पलाइन या संबंधित सतर्कता इकाई में दर्ज कराई जा सकती है।

विभाग का कहना है कि ऐसी शिकायतों पर गोपनीय तरीके से जांच की जाती है और आरोप सही पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है।

इटावा में हुई यह कार्रवाई प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है और इसे स्वास्थ्य विभाग में हाल के समय की बड़ी विजिलेंस कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।