Festive Season Inflation: फेस्टिव सीजन में महंगाई का झटका! RBI ने बढ़ाया अनुमान, कच्चा तेल और El Niño बढ़ा सकते हैं आपकी थाली का खर्च

Festive Season Inflation: फेस्टिव सीजन में महंगाई का झटका! RBI ने बढ़ाया अनुमान, कच्चा तेल और El Niño बढ़ा सकते हैं आपकी थाली का खर्च

फेस्टिव सीजन शुरू होने के साथ जहां बाजार में खरीदारी बढ़ने की उम्मीद है, वहीं महंगाई का दबाव आम लोगों की जेब पर भारी पड़ सकता है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने वित्त वर्ष 2027 के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.2 फीसदी कर दिया है। सबसे बड़ी चिंता वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही को लेकर है, जब देश में त्योहारी खरीदारी और खपत आमतौर पर बढ़ती है। RBI का अनुमान है कि इस दौरान खुदरा महंगाई 6 फीसदी तक पहुंच सकती है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, कमजोर रुपया, खाने-पीने की लागत और El Niño जैसी स्थितियां महंगाई का दबाव बढ़ा रही हैं।

RBI ने क्यों बढ़ाया महंगाई का अनुमान?

RBI ने वित्त वर्ष 2027 के लिए अपना CPI महंगाई अनुमान 5 फीसदी से बढ़ाकर 5.2 फीसदी कर दिया है। केंद्रीय बैंक के मुताबिक इसके पीछे कई सप्लाई-साइड जोखिम हैं। इनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, खाद्य वस्तुओं की लागत और रुपये की कमजोरी प्रमुख हैं।

RBI के नए अनुमान के मुताबिक दूसरी तिमाही में महंगाई 4.9 फीसदी, तीसरी तिमाही में 6 फीसदी और चौथी तिमाही में 5.7 फीसदी रह सकती है। वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही के लिए भी महंगाई का अनुमान 5.6 फीसदी रखा गया है।

गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि RBI के डिफ्यूजन इंडेक्स में भी कीमतों के दबाव का दायरा बढ़ता दिखाई दे रहा है। अगस्त में 4 फीसदी से ज्यादा महंगाई वाली वस्तुओं का वेटेड शेयर बढ़कर करीब 37 फीसदी हो गया।

यानी महंगाई अब कुछ चुनिंदा चीजों तक सीमित नहीं है। ज्यादा वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर इसका असर दिखाई देने लगा है।

कच्चा तेल और कमजोर रुपया बढ़ा रहे हैं चिंता

महंगाई के मोर्चे पर सबसे बड़ा नया जोखिम कच्चा तेल बनकर सामने आया है। पश्चिम एशिया में तनाव के बीच तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का असर सीधे आयात लागत पर पड़ सकता है।

इसका असर सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहता। ईंधन महंगा होने पर ट्रांसपोर्टेशन और उत्पादन की लागत बढ़ सकती है। कंपनियों की लागत बढ़ने पर उसका कुछ हिस्सा आगे चलकर ग्राहकों तक भी पहुंच सकता है।

रुपये की कमजोरी ने भी स्थिति को आसान नहीं बनाया है। इस साल भारतीय मुद्रा करीब 6 फीसदी कमजोर हुई है। ऐसे में डॉलर में खरीदा जाने वाला कच्चा तेल और दूसरी आयातित वस्तुएं भारतीय मुद्रा में महंगी पड़ती हैं। इससे घरेलू महंगाई पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।

El Niño से खाने की कीमतों पर भी खतरा

RBI की चिंता सिर्फ तेल तक सीमित नहीं है। El Niño की स्थिति भी महंगाई के लिए जोखिम बढ़ा रही है। इसका असर मानसून पर पड़ सकता है और बारिश कम या असमान रहने की स्थिति में कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

अगर फसलों की पैदावार कम होती है तो सब्जियों, अनाज और दूसरी कृषि वस्तुओं की सप्लाई पर दबाव आ सकता है। इसका सीधा असर खाद्य महंगाई पर पड़ सकता है। और जब खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ते हैं तो इसका असर पूरे CPI यानी खुदरा महंगाई के आंकड़े पर भी दिखाई देता है।

RBI के मुताबिक आने वाले समय में सप्लाई-साइड से महंगाई का दबाव बना रह सकता है। यही वजह है कि केंद्रीय बैंक ने अपने पुराने अनुमानों को संशोधित किया है।

दिसंबर में ब्याज दरों पर भी पड़ सकता है असर

महंगाई का यह बढ़ता दबाव ब्याज दरों की दिशा के लिए भी महत्वपूर्ण है। अक्टूबर की पॉलिसी से पहले कई अर्थशास्त्रियों और बैंक अधिकारियों को उम्मीद थी कि RBI रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर सकता है और इसे 5.50 फीसदी तक ले जा सकता है। हालांकि कुछ विशेषज्ञों को दर 5.25 फीसदी पर ही बने रहने की उम्मीद थी।

महंगाई के अलावा ऊंची कच्चे तेल की कीमतें, कृषि उत्पादन को लेकर चिंता और अमेरिका के साथ ब्याज दरों का अंतर जैसे मुद्दे भी रेट बढ़ाने की दलील को मजबूत कर रहे थे।

SBI Research ने सितंबर में CPI महंगाई करीब 5.65 फीसदी और अक्टूबर-नवंबर में 6.5 फीसदी से ऊपर रहने का अनुमान लगाया था। हालांकि उसका आकलन था कि 2027 की शुरुआत में महंगाई फिर 6 फीसदी से नीचे आ सकती है।

महंगाई की यही तस्वीर RBI के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। एक तरफ अर्थव्यवस्था और खपत को सहारा देने की जरूरत है, तो दूसरी तरफ कीमतों को नियंत्रण में रखना भी जरूरी है।

सिर्फ भारत नहीं, दुनिया के सेंट्रल बैंक भी सतर्क

महंगाई का दबाव सिर्फ भारत की समस्या नहीं है। अमेरिका, यूरोप और जापान के केंद्रीय बैंक भी ऊर्जा कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव के असर को लेकर सतर्क हैं।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने सितंबर में अपनी पॉलिसी रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 3.75 से 4 फीसदी के दायरे में कर दी। फेड ने कहा कि महंगाई अभी भी ऊंची है और उसे 2 फीसदी के लक्ष्य की ओर वापस लाने की जरूरत है।

यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने भी सितंबर में अपनी तीन प्रमुख दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की। उसने पश्चिम एशिया के तनाव और ऊर्जा कीमतों से पैदा हो रहे महंगाई जोखिम का उल्लेख किया। ECB ने 2026 के लिए महंगाई का अनुमान 3 फीसदी कर दिया है और माना है कि ऊर्जा कीमतों के कारण 2027 की पहली छमाही तक महंगाई लक्ष्य से ऊपर रह सकती है।

जापान का केंद्रीय बैंक भी सख्त रुख अपना रहा है। बैंक ऑफ जापान ने सितंबर में अपनी पॉलिसी रेट को 31 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचाया। वहां भी कच्चे माल की लागत, कमजोर येन और भू-राजनीतिक तनाव पर नजर है।

भारत में इसका असर आम परिवार के बजट पर पड़ सकता है। अगर तेल, भोजन और दूसरी जरूरी चीजों की लागत लगातार ऊंची रहती है तो फेस्टिव सीजन की खरीदारी से लेकर रोजमर्रा के खर्च तक दबाव बढ़ सकता है। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि आने वाले महीनों में महंगाई किस दिशा में जाती है और RBI दिसंबर की बैठक में ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाता है।