उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े राज्यों में से एक है. यहां की भदोही की कालीन, मुरादाबाद के पीतल के बर्तन से लेकर फिरोजाबाद के ग्लासवर्क तक दुनियाभर में अपनी पहचान बना चुके हैं. इस राज्य की आबादी जितनी ज्यादा है, उसकी जमीन भी उतनी ही उपजाऊ है. इसके बावजूद लंबे समय से एक बड़ी समस्या देखी जा रही थी और वो है पश्चिम से पूर्व के हिस्से को जोड़ने के लिए सड़क मार्ग की कमी. राज्यों के बीच की दूरी को खत्म करने के लिए ही यूपी सरकार बहुत जल्द गंगा एक्सप्रेस वे को हरी झंडी दिखाने वाली है. यह एक्सप्रेस वे न सिर्फ प्रयागराज से मेरठ की दूरी घटाएगा, बल्कि समय, खर्च और संसाधनों की भी बचत करेगा.
गंगा एक्सप्रेस वे को उत्तर प्रदेश की ‘रीढ़’ कहा जा रहा है, क्योंकि यह राज्य के पश्चिम से पूर्व तक सीधा और तेज रास्ता उपलब्ध कराएगा. इसके शुरू होते ही मेरठ से प्रयागराज का सफर आधे समय में पूरा हो सकेगा और राज्य के कई जिलों की तस्वीर बदल जाएगी. गंगा एक्सप्रेस वे एक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे है, यानी इसे बिल्कुल नए सिरे से तैयार किया जा रहा है. यह एक्सप्रेस वे कुल 594 किलोमीटर लंबा होगा और मेरठ जिले के बिजौली गांव से शुरू होकर प्रयागराज जिले के जुदापुर दांडू गांव तक जाएगा. इस पूरे प्रोजेक्ट को उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस वे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी UPEIDA द्वारा विकसित किया जा रहा है.



