उत्तर प्रदेश के सबसे लंबे गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के साथ ही जहां एक तरफ तेज रफ्तार कनेक्टिविटी का नया अध्याय शुरू हुआ, वहीं दूसरी तरफ टोल दरों को लेकर तीन दिन में तीन बार बदलाव ने यात्रियों को उलझन में डाल दिया। अब आखिरकार टोल का फाइनल रेट तय कर दिया गया है, जिससे तस्वीर कुछ हद तक साफ हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 अप्रैल 2026 को इस 594 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया था। लेकिन उद्घाटन से ठीक पहले और उसके बाद टोल दरों में लगातार बदलाव चर्चा का विषय बना रहा।
तीन दिन, तीन रेट—क्या रही पूरी कहानी
शुरुआत में एक्सप्रेसवे के लिए टोल दर 2.55 रुपये प्रति किलोमीटर तय की गई थी। इसके आधार पर कार, जीप और वैन जैसे हल्के वाहनों के लिए पूरे मार्ग का टोल करीब ₹1,514 बनता था। इसके बाद 29 अप्रैल को अचानक नई दरें जारी की गईं, जिसमें एक तरफ की यात्रा के लिए टोल बढ़ाकर ₹1,800 कर दिया गया। वहीं दोपहिया, तीनपहिया और ट्रैक्टर चालकों के लिए यह शुल्क ₹905 तय किया गया। मामला यहीं नहीं रुका। अगले ही दिन यानी 30 अप्रैल को फिर संशोधन हुआ और हल्के वाहनों के लिए टोल घटाकर ₹1,765 कर दिया गया। यही दर अब अंतिम मानी जा रही है।
किसे कितना मिलेगा टोल का हिस्सा
नए ढांचे के मुताबिक ₹1,765 में से ₹1,365 अडानी एंटरप्राइजेज को और ₹440 आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेंगे। यह पूरी राशि एक्सप्रेसवे के पहले टोल प्लाजा से आखिरी तक की एकल यात्रा के लिए लागू होगी। यानी अगर कोई वाहन पूरे 594 किलोमीटर का सफर करता है, तो उसे यही शुल्क देना होगा।
अभी मुफ्त सफर, लेकिन कब तक?
फिलहाल एक्सप्रेसवे ट्रायल रन के दौर में है। इसी वजह से उद्घाटन के बाद से अभी तक किसी भी वाहन से टोल नहीं लिया जा रहा है। शाहजहांपुर के पास कलक्टरगंज टोल प्लाजा से गुजरने वाले वाहनों की संख्या भी बढ़ रही है। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक हर घंटे करीब 40 वाहन यहां से गुजर रहे हैं। लोग नई सड़क का अनुभव लेने के लिए उत्साहित नजर आ रहे हैं।
20% डिस्काउंट से यात्रियों को राहत
यूपीडा ने यह भी साफ किया है कि अगर कोई वाहन 24 घंटे के भीतर वापसी करता है, तो उसे टोल में 20% की छूट मिलेगी। यह सुविधा नियमित यात्रियों के लिए राहत भरी हो सकती है। अधिकारियों के अनुसार, टोल दरों में यह बदलाव थोक मूल्य सूचकांक (WPI) और अन्य तकनीकी गणनाओं के आधार पर किया गया है। उम्मीद है कि अब दरें स्थिर रहेंगी और जल्द ही टोल वसूली शुरू कर दी जाएगी। कुल मिलाकर, गंगा एक्सप्रेसवे जहां सफर को तेज और आसान बनाने जा रहा है, वहीं टोल को लेकर शुरुआती असमंजस ने यह दिखाया कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में अंतिम दर तय करना भी एक जटिल प्रक्रिया होती है। अब यात्रियों की नजर इस बात पर रहेगी कि टोल वसूली कब से शुरू होती है और इसका असर उनकी जेब पर कितना पड़ता है।


