उत्तर प्रदेश में एक बार फिर पुलिस मुठभेड़ को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मत्स्य मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने गाजीपुर में हुई पुलिस मुठभेड़ में कमलेश बिंद उर्फ कमलेश चौधरी की मौत पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि विनीत राय हत्याकांड में कमलेश मुख्य आरोपी नहीं था, फिर भी उसका एनकाउंटर कर दिया गया।
यह घटना आम नागरिकों के मन में कानून व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई को लेकर नए सवाल पैदा कर रही है। खासकर उन इलाकों में जहां जातीय और सामाजिक संवेदनशीलता पहले से मौजूद है, ऐसी घटनाएं विश्वास को प्रभावित करती हैं।
‘अपराधी की जाति नहीं होती, लेकिन कानूनी प्रक्रिया जरूरी’
डॉ. संजय निषाद ने साफ कहा कि अपराधी की कोई जाति नहीं होती। अगर कमलेश ने अपराध किया था तो उसे कानूनी प्रक्रिया से सजा मिलनी चाहिए थी। उन्होंने गाजीपुर पुलिस की कार्रवाई पर असंतोष जताते हुए पूछा कि मुख्य आरोपियों का एनकाउंटर क्यों नहीं किया गया।
मंत्री ने पुलिस कप्तान को सीधी चुनौती दी। उन्होंने कहा, “अगर आपकी कार्रवाई सही है तो दोनों मुख्य आरोपियों का एनकाउंटर करके दिखाइए।” डॉ. निषाद ने मुठभेड़ की परिस्थितियों पर भी सवाल उठाए। कमलेश की पत्नी का दावा है कि उनके पति को थाने में पीटा गया और बाद में मार दिया गया। उन्होंने इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की है।
शव ले जाते समय हंगामा और पुलिस का जवाब
पुलिस के अनुसार, कमलेश बिंद 29 मई को होटल व्यवसायी विनीत राय (29) की हत्या के मामले में चार नामजद आरोपियों में शामिल था। वह एक लाख रुपये का इनामी बदमाश था। बुधवार देर रात मुठभेड़ में उसकी मौत हुई।
जब गुरुवार शाम उसके शव को गांव से शमशान घाट ले जाया जा रहा था, तब गाजीपुर रेलवे स्टेशन के पास रेलवे क्रॉसिंग पर भीड़ ने हंगामा कर दिया। पुलिसवालों को घायल किया गया। पुलिस अधीक्षक डॉ. ईरज राजा ने कहा कि उपद्रव करने वालों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ी तो राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत भी कार्रवाई हो सकती है।
समाज की रक्षा बनाम रक्षक की भूमिका
डॉ. निषाद ने कहा कि वे सरकार के साथ खड़े हैं, लेकिन अगर रक्षक भक्षक बन जाए तो समाज को सोचना पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जरूरी हुआ तो एसपी के खिलाफ कोर्ट जाएंगे और इस मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष रखेंगे।
यह विवाद उन लाखों नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है जो रोजाना कानून-व्यवस्था की उम्मीद रखते हैं। एक तरफ पुलिस अपराधियों के खिलाफ सख्ती दिखा रही है, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक नेतृत्व निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग कर रहा है।
मामले की निष्पक्ष जांच से ही सच्चाई सामने आएगी। फिलहाल यह घटना उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था, पुलिस की विश्वसनीयता और राजनीतिक-प्रशासनिक संबंधों पर बहस छेड़ गई है। आम आदमी चाहता है कि अपराध पर अंकुश लगे, लेकिन हर कार्रवाई पारदर्शी और न्यायसंगत हो।



