गिरीश मुर्मू जम्मू-कश्मीर के और राधा कृष्ण माथुर लद्दाख के बने पहले उपराज्यपाल

गिरीश चंद्र मुर्मू और राधा कृष्ण माथुर
गिरीश चंद्र मुर्मू और राधा कृष्ण माथुर

हिंदुस्तान के 70 साल के इतिहास में आज ऐतिहासिक दिन है। देश की जन्नत कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर और लद्दाख आज से केंद्र शासित प्रदेश बन गए हैं।

आपको बतादें कि, भारत सरकार के द्वारा 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 की ताकतों को पंगु करने के बाद आज यानी 31 अक्टूबर से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो अलग राज्य बन गए हैं। इसी के साथ राज्य में संसद के बने कई कानून लागू हो सकेंगे। इसके तहत जम्मू-कश्मीर में विधानसभा होगी और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश है। आज लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती है, जिनका जम्मू-कश्मीर को भारत में विभाजन कराने में अहम किरदार रहा है।

आज गिरीश चंद्र मुर्मू ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल के रूप में शपथ ले ली है। जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गीता मित्तल ने श्रीनगर स्थित राजभवन में जी सी मुर्मू को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। गुजरात कैडर के 1985 बैच के आईएएस अधिकारी को प्रधानमंत्री मोदी के भरोसेमंद लोगों में से एक माना जाता है। इसी वजह से उन्हें केंद्रीय वित्त मंत्रालय में व्यय विभाग का सचिव पद भी सौंपा गया था।  मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब मूर्मु उनके प्रधान सचिव थे।

एक मार्च 2019 से वह वित्त मंत्रालय में व्यय सचिव की जिम्मेदारी देख रहे हैं। 21 नवंबर 1959 को जन्मे मुर्मू ने ओडिशा के उत्कल विश्ववविद्यालय से राजनीति विज्ञान में मास्टर्स की पढ़ाई करने के साथ बर्मिंघम यूनिवर्सिटी से एमबीए की भी डिग्री ली है, व्यय सचिव होने से पहले वह रेवेन्यू डिपार्टमेंट में स्पेशल सेक्रेटरी थे।

केंद्र सरकार में रहते हुए उन्होंने सरकारी खर्चों को कम करने की ओर काम किया। इसके लिए उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित कई योजनाओं का विलय करने और कुछ पर विराम लगाने की भी बात कही। उन्होंने राजस्व, राजकोषीय घाटा और व्यय की प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया।

राधा कृष्ण माथुर ने गुरुवार को केंद्र शासित क्षेत्र लद्दाख के पहले उपराज्यपाल के तौर पर शपथ ली। जम्मू कश्मीर के विभाजन के बाद लद्दाख अलग केंद्र शासित क्षेत्र बना है। जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल ने लेह में एक सादे समारोह में माथुर को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।