उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में जेवर थाना क्षेत्र के बनवारीवास गांव में 15 वर्षीय छात्र गोपाल शर्मा की निर्मम हत्या ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। इस घटना ने स्थानीय परिवारों में गहरी चिंता पैदा कर दी है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मामले को गंभीरता से लिया है और स्पष्ट कहा है कि सरकार पीड़ित परिवार के साथ पूरी तरह खड़ी है। उन्होंने प्रशासन को हत्यारों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
यह घटना उन आम अभिभावकों के लिए चेतावनी है जो अपने बच्चों को स्कूल या घर के आसपास सुरक्षित मानकर भेजते हैं। ऐसी घटनाएं समाज में सुरक्षा की भावना को कमजोर करती हैं और सरकार की जिम्मेदारी को और बढ़ाती हैं।
ब्रजेश पाठक का आश्वासन और उच्चाधिकारियों से बैठक
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से मामले पर दुख जताया। उन्होंने लिखा कि यह अमानवीय कृत्य बेहद पीड़ादायक है और सरकार इन दरिंदों को उनके अंजाम तक पहुंचाएगी।
पाठक ने अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद और डीजीपी राजीव कृष्ण के साथ बैठक कर जल्द खुलासे और सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया। उन्होंने वादा किया कि पीड़ित परिवार को हर संभव मदद दी जाएगी और दोषियों को सजा जरूर मिलेगी। उनके इस रुख से स्थानीय लोगों में कुछ उम्मीद जगी है कि न्याय मिलेगा।
जेवर विधायक की सीएम से मुलाकात, परिवार को मिली आर्थिक मदद
जेवर के विधायक धीरेंद्र सिंह ने लखनऊ पहुंचकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। उन्होंने पूरे मामले से मुख्यमंत्री को अवगत कराया और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग रखी।
विधायक ने बताया कि पीड़ित परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। उन्होंने क्षेत्र की जनता से अपील की कि सभी लोग संयम बनाए रखें। पुलिस निष्पक्ष जांच कर रही है। किसी निर्दोष को सजा नहीं मिलनी चाहिए। धीरेंद्र सिंह ने कहा कि कुछ लोग अनावश्यक रूप से मामले को तूल देने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सरकार गंभीरता से इस पर काम कर रही है।
पुलिस ने तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में तेजी दिखाई है। बुधवार को अपर पुलिस आयुक्त राजीव नारायण मिश्र ने बताया कि तीन आरोपियों को साबौता रजवाहे के पास मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। एनकाउंटर में दो आरोपियों के पैर में गोली लगी, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
गोपाल 21 मई की शाम को गायब हो गया था। अगले दिन 22 मई की रात करीब 10 बजे उसका शव पड़ोसी गांव रोही के एक बंद मकान में मिला। यह घटना स्थानीय स्तर पर आक्रोश का कारण बनी हुई है।
न्याय और सुरक्षा की मांग
यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था और बाल सुरक्षा को लेकर उठने वाले सवालों को फिर से सामने लाता है। उपमुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री स्तर पर हुई कार्रवाई से साफ है कि सरकार इसे रूटीन मामला नहीं मान रही।
आम नागरिकों के लिए यह घटना याद दिलाती है कि बच्चों की सुरक्षा हर किसी की जिम्मेदारी है। साथ ही यह उम्मीद भी जगाती है कि दोषियों को जल्द सजा मिलेगी और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकेगी।
प्रशासन पर अब नजरें टिकी हैं कि जांच कितनी पारदर्शी और तेज होती है। परिवार को न्याय मिले, यही सबकी अपेक्षा है।


