हिमाचल के सेब बागवानों को बड़ी राहत! अदाणी ने बढ़ाए खरीद रेट, LMS सेब का भाव ₹85 से सीधे ₹108 किलो

हिमाचल के सेब बागवानों को बड़ी राहत! अदाणी ने बढ़ाए खरीद रेट, LMS सेब का भाव ₹85 से सीधे ₹108 किलो

हिमाचल प्रदेश में सेब खरीद सीजन के बीच बागवानों के लिए राहत की खबर आई है। अदाणी एग्री फ्रेश ने 31 अगस्त से सेब की नई खरीद दरें लागू कर दी हैं। सबसे बड़ी बढ़ोतरी 80 से 100 फीसदी रंग वाले LMS ग्रेड के सेब में हुई है। इसका रेट पिछले साल के 85 रुपये से बढ़ाकर 108 रुपये प्रति किलो कर दिया गया है। यानी इस ग्रेड के सेब पर बागवानों को पिछले साल की तुलना में 23 रुपये प्रति किलो ज्यादा मिलेंगे।

नई दरों ने ऐसे समय में बागवानों को कुछ राहत दी है, जब सेब का खरीद सीजन चल रहा है और किसानों की नजर बाजार भाव के साथ-साथ सरकारी खरीद और भुगतान व्यवस्था पर भी है। हालांकि, दूसरी तरफ सेब उत्पादक संघ ने सरकार से मंडी मध्यस्थता योजना यानी MIS के तहत लंबित भुगतान जल्द जारी करने की मांग तेज कर दी है।

80-100% रंग वाले LMS सेब का भाव सबसे ज्यादा बढ़ा

अदाणी एग्री फ्रेश की नई रेट लिस्ट के मुताबिक, 80 से 100 फीसदी रंग वाले LMS सेब के लिए अब 108 रुपये प्रति किलो दिए जाएंगे। पिछले साल इस श्रेणी का भाव 85 रुपये था। यानी सीधा 23 रुपये का इजाफा हुआ है।

इसी रंग श्रेणी में ES यानी Extra Small सेब का रेट 89 रुपये और EES यानी Extra Extra Small का 73 रुपये किलो तय किया गया है। वहीं Extra Large यानी EL ग्रेड के लिए 60 रुपये प्रति किलो की दर रखी गई है।

60 से 80 फीसदी रंग वाले सेबों की बात करें तो LMS ग्रेड के लिए 80 रुपये, ES के लिए 67 रुपये और EES के लिए 54 रुपये प्रति किलो मिलेंगे। पित्तू और EL ग्रेड के सेब का रेट 43 रुपये किलो तय किया गया है।

ये नई दरें अदाणी एग्री फ्रेश के रामपुर, रोहड़ू, सैंज, जड़ोल टिक्कर और टुटूपानी स्थित खरीद केंद्रों पर लागू होंगी।

पिछले साल के मुकाबले कितना बदला सेब का बाजार भाव?

2025 में कंपनी ने 80 से 100 फीसदी रंग वाले प्रीमियम रॉयल सेब के लिए 85 रुपये प्रति किलो का रेट तय किया था। वहीं 60 से 80 फीसदी रंग वाले LMS सेब की दर 65 रुपये और 60 फीसदी से कम रंग वाले सेब की दर 24 रुपये प्रति किलो थी।

इस बार कुछ प्रमुख श्रेणियों में दरें ऊपर गई हैं। खासकर LMS ग्रेड में हुई बढ़ोतरी बागवानों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रति किलो मिलने वाला अतिरिक्त भुगतान सीधे उनकी बिक्री आय पर असर डाल सकता है।

हालांकि, सेब की पूरी कमाई सिर्फ खरीद रेट से तय नहीं होती। उत्पादन लागत, पैकिंग, ढुलाई और बाजार की स्थिति भी बागवानों की अंतिम आय को प्रभावित करती है। इसलिए बेहतर खरीद दर के साथ समय पर भुगतान भी उतना ही अहम मुद्दा बना हुआ है।

MIS का पैसा अटका, बागवानों ने सरकार से मांगी तेजी

सेब उत्पादक संघ ने प्रदेश सरकार से मंडी मध्यस्थता योजना (MIS) के तहत सेब और दूसरे फलों की लंबित रकम जल्द जारी करने की मांग की है।

संघ के नेता संजय चौहान के मुताबिक, कई बागवान जरूरी दस्तावेज जमा कर चुके हैं, लेकिन उन्हें अब तक भुगतान नहीं मिला है। संघ का कहना है कि सरकार ने मार्च में भुगतान प्रक्रिया शुरू की थी। पहले 30 और बाद में 100 बोरी तक सेब देने वाले किसानों के भुगतान का फैसला हुआ था। इसके बावजूद कई बागवानों को एक महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी पैसा नहीं मिला।

भुगतान में देरी के पीछे अधिकारियों की ओर से पिछले साल बोरियों से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच का हवाला दिया जा रहा है। संघ का कहना है कि अनियमितताओं की जांच जरूर होनी चाहिए, लेकिन जिन किसानों की कोई गलती नहीं है, उनका भुगतान जांच के नाम पर नहीं रोका जाना चाहिए।

1500 करोड़ रुपये की मांग, नहीं तो आंदोलन की चेतावनी

सेब उत्पादक संघ ने सरकार से व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी बनाने की मांग की है। संघ का कहना है कि MIS के तहत सामने आई अनियमितताओं की जांच हो और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई भी हो, लेकिन ईमानदार बागवानों को भुगतान के लिए इंतजार न करना पड़े।

संघ ने केंद्र सरकार से MIS को जारी रखने और इसके लिए कम से कम 1500 करोड़ रुपये का प्रावधान करने की मांग की है। संगठन के मुताबिक, मंडी मध्यस्थता योजना का मकसद बाजार में कीमतें गिरने के समय किसानों को सुरक्षा देना है।

संघ ने यह भी कहा कि 2023 के केंद्रीय बजट में योजना के लिए राज्यों को मिलने वाले हिस्से में कटौती के बाद परिस्थितियां बदली हैं। अब अगर प्रदेश सरकार ने लंबित भुगतान जल्द जारी नहीं किया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन किया जा सकता है।

यानी हिमाचल के सेब बाजार में एक तरफ अदाणी एग्री फ्रेश की बढ़ी हुई खरीद दरें बागवानों को राहत दे रही हैं, तो दूसरी तरफ सरकारी भुगतान का मुद्दा अब भी बड़ी चिंता बना हुआ है। बागवानों के लिए असली राहत तभी पूरी होगी, जब बेहतर खरीद भाव के साथ उनकी लंबित रकम भी समय पर उनके खातों तक पहुंचे।