Ikkis Review In Hindi: बॉलीवुड के लीजेंडरी एक्टर धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म ‘इक्कीस’ थिएटर में दस्तक दे चुकी है. अमूमन जब हम कोई वॉर फिल्म या वॉर बायोग्राफी देखने जाते हैं, तब वही धमाके, सरहद पर चीख-पुकार और पाकिस्तान या दुश्मन देश के खिलाफ तेज तर्रार डायलॉगबाजी देखने मिलती है. हमें ये भी पता होता है कि अंत में हमारा हीरो शहीद होगा, फिर भी हम दिल पर पत्थर रखकर थिएटर जाते हैं ताकि उन गुमनाम नायकों की कहानी जान सकें जिन्होंने देश के लिए सर्वस्व न्योछावर कर दिया. ‘इक्कीस’ भी इसी वजह से देख डाली.
मन में एक उत्सुकता ये भी थी कि आज के दौर में जहां ‘बॉर्डर 2’ जैसी मेगा फिल्मों का माहौल बनाया जा रहा है और ‘धुरंधर’ जैसी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर गदर मचा रही हैं, वहां श्रीराम राघवन जैसे प्रवाह के विरुद्ध जाकर फिल्में बनाने वाले निर्देशक इस ट्रेंड में खुद को कैसे ढालेंगे? क्या वो कल्ट क्लासिक वॉर फिल्मों की उन तमाम उम्मीदों पर खरे उतर पाएंगे जो दर्शकों के जेहन में बसी हैं? फिल्म देखने के बाद ये सारे सवाल सही साबित हुए, क्योंकि वही हुआ जिसकी उम्मीद थी. श्रीराम राघवन की ‘इक्कीस’ आम ‘वॉर फिल्म’ की तरह नहीं है, बल्कि ये एक बेहद खास फिल्म है. धर्मेंद्र की ये आखिरी फिल्म आपको वहां चोट करती है जहां आप उम्मीद नहीं करते, सीधे आपके दिल पर.

श्रीराम राघवन ने इस कहानी को उसी शिद्दत और बारीकी से बुना है, जिसकी उनसे उम्मीद की जाती है. ये ‘दिल से बनाया गया सिनेमा’ है, जो उनके दिल से सीधे हमारे दिल तक पहुंच जाता है. अब धर्मेंद्र और अगस्त्य नंदा की ये फिल्म बाकी फिल्मों से अलग क्यों है और क्यों आपको इसे मिस नहीं करना चाहिए? ये जानने के लिए आपको ये पूरा रिव्यू पढ़ना होगा.






