दुनिया की अर्थव्यवस्था एक बार फिर अनिश्चितता के दौर में खड़ी दिखाई दे रही है। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने साफ संकेत दिया है कि अगर मिडिल ईस्ट में जारी तनाव लंबा खिंचता है और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका असर सीधे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। इसका मतलब यह है कि आने वाले समय में आम लोगों के खर्च बढ़ सकते हैं और महंगाई का दबाव और तेज हो सकता है।
तेल सप्लाई पर असर, क्यों बढ़ी चिंता
IMF प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने वर्ल्ड बैंक और IMF की स्प्रिंग मीटिंग के दौरान कहा कि होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम समुद्री मार्ग प्रभावित होने से ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव पड़ा है। यह रास्ता वैश्विक तेल और उर्वरक सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
जब सप्लाई में बाधा आती है, तो सबसे पहले असर कीमतों पर दिखता है। तेल आयात करने वाले देशों के लिए यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती है, क्योंकि उनकी अर्थव्यवस्था सीधे इन कीमतों पर निर्भर करती है।
महंगाई का नया खतरा: खाना भी महंगा हो सकता है
IMF ने चेतावनी दी है कि अगर उर्वरक (फर्टिलाइजर) की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो इसका असर खेती पर पड़ेगा और अंततः खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं।
यह असर खासकर उन देशों में ज्यादा गंभीर होगा, जहां लोग अपनी आय का बड़ा हिस्सा भोजन पर खर्च करते हैं। यानी महंगाई केवल ईंधन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि रोजमर्रा की जरूरतों तक पहुंच सकती है।
सेंट्रल बैंकों के लिए ‘वेट एंड वॉच’ की सलाह
IMF ने दुनिया के केंद्रीय बैंकों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। जॉर्जीवा के मुताबिक, ब्याज दरों में जल्दबाजी में बदलाव करना सही नहीं होगा। जिन देशों में महंगाई पहले से नियंत्रण में है, वहां हालात को देखकर धीरे-धीरे फैसले लेना बेहतर रहेगा।
हालांकि, जिन देशों में आर्थिक संस्थाओं की विश्वसनीयता कमजोर है, वहां सख्त कदम उठाने की जरूरत पड़ सकती है, ताकि बाजार में भरोसा बना रहे।
जरूरत पड़ी तो IMF देगा मदद
IMF ने यह भी संकेत दिया है कि अगर हालात बिगड़ते हैं, तो सदस्य देशों को वित्तीय सहायता दी जा सकती है। फिलहाल संस्था के 39 प्रोग्राम चल रहे हैं और अनुमान है कि 20 से 50 अरब डॉलर तक की अतिरिक्त फंडिंग की जरूरत पड़ सकती है।
साथ ही, सरकारों को भी सलाह दी गई है कि राहत देने के नाम पर ऐसे फैसले न लें जो लंबी अवधि में नुकसानदायक साबित हों। जैसे बड़े पैमाने पर टैक्स में कटौती या निर्यात पर रोक जैसी नीतियां महंगाई को और बढ़ा सकती हैं।
IMF की यह चेतावनी सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध आम लोगों की जिंदगी से है। अगर तेल और खाद की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर हर घर के बजट पर पड़ेगा। ऐसे में आने वाले महीनों में वैश्विक हालात और नीतिगत फैसले बेहद अहम भूमिका निभाने वाले हैं।


