32 रजिस्ट्री ऑफिस इनकम टैक्स के रडार पर, फर्जी PAN से करोड़ों की जमीन डील का शक; यूपी से उत्तराखंड तक जांच तेज

32 रजिस्ट्री ऑफिस इनकम टैक्स के रडार पर, फर्जी PAN से करोड़ों की जमीन डील का शक; यूपी से उत्तराखंड तक जांच तेज

जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े संदिग्ध लेनदेन को लेकर आयकर विभाग (Income Tax Department) ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। विभाग की निगरानी में अब उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के 32 रजिस्ट्री कार्यालय आ गए हैं। शुरुआती जांच में आशंका जताई गई है कि कई संपत्ति सौदों में गलत या मनमाने पैन (PAN) नंबरों का इस्तेमाल किया गया, जिससे न केवल संपत्ति के वास्तविक लेनदेन की जानकारी प्रभावित हुई, बल्कि सरकारी राजस्व को भी करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचने की आशंका है।

फिलहाल जांच जारी है और विभागीय अधिकारियों ने इस मामले पर आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की है। हालांकि, सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी ने जमीन की रजिस्ट्रियों में संभावित अनियमितताओं को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

32 रजिस्ट्री दफ्तर जांच के दायरे में, कई शहरों के दस्तावेज खंगाले जा रहे

सूत्रों के मुताबिक, मेरठ, देहरादून, मुरादाबाद, बिजनौर, नोएडा, गाजियाबाद और मुजफ्फरनगर समेत कई जिलों के रजिस्ट्री रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।

प्रारंभिक जांच में कुछ ऐसे दस्तावेज सामने आए हैं, जिनमें दर्ज पैन नंबर और रजिस्ट्री रिकॉर्ड के बीच मेल नहीं मिला। आशंका है कि कुछ मामलों में वास्तविक खरीदार या विक्रेता की जगह किसी अन्य व्यक्ति का पैन नंबर इस्तेमाल किया गया। यदि ऐसा साबित होता है, तो इससे संपत्ति के वास्तविक स्वामित्व और आय संबंधी जानकारी छिपाने की कोशिश का मामला बन सकता है।

एक ही PAN कई रजिस्ट्रियों में, कुछ नंबरों का अस्तित्व तक नहीं

जांच में ऐसे मामले भी सामने आने की बात कही जा रही है, जहां एक ही पैन नंबर का इस्तेमाल अलग-अलग संपत्ति रजिस्ट्रियों में किया गया। इसके अलावा कुछ ऐसे पैन नंबर भी मिले हैं, जिनका कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है या जिनका उपयोग संबंधित व्यक्ति की जानकारी के बिना किए जाने की आशंका है।

इन तथ्यों के आधार पर आयकर विभाग यह जांच कर रहा है कि कहीं इस व्यवस्था का इस्तेमाल बेनामी संपत्तियों की खरीद-बिक्री या कर चोरी के लिए तो नहीं किया गया।

करोड़ों के टैक्स नुकसान की आशंका, सबूत मिलने पर होगी कार्रवाई

सूत्रों के अनुसार, आयकर विभाग को आशंका है कि इन कथित अनियमितताओं के कारण सरकार को करोड़ों रुपये के टैक्स का नुकसान हुआ हो सकता है। यह भी जांच का विषय है कि कहीं फर्जी या गलत पैन नंबरों के जरिए काले धन को वैध दिखाने की कोशिश तो नहीं की गई।

हालांकि, विभाग ने अभी तक किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है। अधिकारियों का कहना है कि पुख्ता साक्ष्य मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बिल्हौर में मिली गड़बड़ी के बाद बढ़ा जांच का दायरा

चार दिन पहले कानपुर के बिल्हौर रजिस्ट्री कार्यालय में दस्तावेजों की जांच के दौरान भी बड़ी गड़बड़ी सामने आई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वहां करीब 900 पैन नंबरों में हेराफेरी के संकेत मिले थे।

इससे पहले इसी साल कानपुर में रजिस्ट्री से जुड़े करीब 3,500 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का मामला भी आयकर विभाग की जांच में सामने आया था। माना जा रहा है कि इन्हीं इनपुट के आधार पर अब जांच का दायरा दूसरे जिलों तक बढ़ाया गया है।

फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े कई मामलों में बड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है। वहीं, संपत्ति खरीदने या बेचने वाले लोगों के लिए भी यह मामला सही दस्तावेज और वैध पैन विवरण के महत्व को रेखांकित करता है।