टोल प्लाजा पर अब नहीं रुकेंगी गाड़ियां! साल के अंत तक 400 जगह लागू होगा नया सिस्टम, ऐसे कटेगा टोल टैक्स

टोल प्लाजा पर अब नहीं रुकेंगी गाड़ियां! साल के अंत तक 400 जगह लागू होगा नया सिस्टम, ऐसे कटेगा टोल टैक्स

हाईवे पर सफर करने वालों के लिए बड़ी राहत की तैयारी है। टोल प्लाजा पर लंबी कतारों में खड़े रहने, बार-बार गाड़ी रोकने और ईंधन बर्बाद होने की समस्या कम करने के लिए केंद्र सरकार मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) सिस्टम लागू करने की दिशा में काम कर रही है। दी गई जानकारी के मुताबिक, साल 2026 के अंत तक देश के करीब 400 टोल प्लाजा को बैरियर-फ्री बनाने की योजना है। इस व्यवस्था में टोल चुकाने के लिए वाहन चालकों को बूथ पर रुकने की जरूरत नहीं होगी। कैमरे और रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) तकनीक की मदद से वाहन की पहचान की जाएगी और निर्धारित टोल शुल्क अपने आप वसूला जाएगा। हालांकि, इस व्यवस्था का वास्तविक फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि तकनीक कितनी सटीक काम करती है और टोल भुगतान में गड़बड़ी होने पर शिकायतों का समाधान कितनी जल्दी होता है।

टोल पर लंबी लाइन से मिलेगी राहत, बिना रुके गुजर सकेंगे वाहन

अभी ज्यादातर टोल प्लाजा पर वाहन चालकों को टोल बैरियर के पास रुकना पड़ता है। व्यस्त समय और त्योहारों के दौरान वाहनों की संख्या बढ़ने से लंबी कतारें लग जाती हैं। इससे सफर में देरी होती है और बार-बार गाड़ी को रोकने तथा आगे बढ़ाने के कारण ईंधन भी खर्च होता है।

मल्टी लेन फ्री फ्लो सिस्टम का उद्देश्य इसी समस्या को दूर करना है। इसमें टोल वसूली के लिए सड़क पर भौतिक बैरियर लगाने की जरूरत नहीं होगी। वाहन सामान्य गति से गुजर सकेंगे और तकनीकी उपकरण उनकी पहचान करके टोल भुगतान की प्रक्रिया पूरी करेंगे।

अगर यह व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो रोजाना हाईवे पर सफर करने वाले लोगों के साथ-साथ ट्रक, बस और अन्य व्यावसायिक वाहनों को भी फायदा मिल सकता है। माल ढुलाई में लगने वाला समय कम होने से परिवहन कंपनियों की परिचालन लागत पर भी सकारात्मक असर पड़ने की संभावना है।

क्या है MLFF सिस्टम? FASTag और कैमरों से ऐसे कटेगा टोल

MLFF का पूरा नाम मल्टी लेन फ्री फ्लो है। यह ऐसी इलेक्ट्रॉनिक टोल वसूली व्यवस्था है, जिसमें वाहन को किसी निर्धारित लेन में रुककर भुगतान करने की जरूरत नहीं होती।

इस सिस्टम में हाई-स्पीड कैमरे और RFID रीडर जैसे उपकरण लगाए जाते हैं। इनके जरिए वाहन की पहचान FASTag या नंबर प्लेट के माध्यम से की जा सकती है। इसके बाद संबंधित वाहन पर लागू टोल शुल्क की वसूली इलेक्ट्रॉनिक तरीके से की जाती है।

इसका मतलब यह है कि वाहन चालक को हर टोल प्लाजा पर रुककर FASTag स्कैन होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। लेकिन वाहन की सही पहचान, भुगतान की सटीकता और तकनीकी व्यवस्था का लगातार काम करते रहना जरूरी होगा।

नई प्रणाली में वाहन चालकों के लिए यह समझना भी अहम होगा कि अगर FASTag में पर्याप्त बैलेंस नहीं है, नंबर प्लेट की पहचान नहीं हो पाती या गलत टोल कट जाता है, तो ऐसी स्थिति में भुगतान और शिकायत निपटाने की प्रक्रिया क्या होगी। इन पहलुओं पर प्रभावी व्यवस्था होने से ही लोगों का भरोसा मजबूत होगा।

पहले 6 टोल प्लाजा पर शुरुआत, अब 400 तक विस्तार की तैयारी

दी गई जानकारी के अनुसार, देश के छह चुनिंदा टोल प्लाजा पर MLFF सिस्टम की शुरुआत की जा चुकी है। इसके बाद 104 अन्य टोल प्लाजा के लिए टेंडर जारी किए गए हैं। योजना के तहत साल के अंत तक करीब 400 टोल प्लाजा को इस व्यवस्था के दायरे में लाने का लक्ष्य बताया गया है।

देश में राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे और एक्सप्रेसवे का बड़ा नेटवर्क है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के करीब 1,150 टोल प्लाजा संचालित होते हैं। इनसे सालाना 83,000 करोड़ रुपये से अधिक का टोल राजस्व प्राप्त होने की जानकारी दी गई है।

ऐसे बड़े नेटवर्क में नई तकनीक लागू करना आसान काम नहीं है। इसके लिए उपकरण लगाने, भुगतान प्रणाली को जोड़ने, वाहनों की पहचान सुनिश्चित करने और तकनीकी गड़बड़ियों को दूर करने की व्यवस्था बनानी होगी।

इसलिए 400 टोल प्लाजा का लक्ष्य पूरा होने के साथ यह देखना भी जरूरी होगा कि नई व्यवस्था कितनी सुचारु रूप से चलती है और वाहन चालकों को वास्तव में कितना समय बचता है।

सरकार को भी होगा फायदा, टोल वसूली में गड़बड़ी रोकने पर जोर

MLFF सिस्टम का उद्देश्य केवल वाहन चालकों का समय बचाना नहीं है। इसके जरिए टोल वसूली को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने की भी कोशिश है।

मौजूदा व्यवस्था में टोल वसूली के दौरान वाहनों की पहचान और भुगतान से जुड़ी कुछ चुनौतियां सामने आ सकती हैं। नई तकनीक के जरिए गुजरने वाले वाहनों का इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तैयार किया जा सकेगा, जिससे राजस्व की निगरानी बेहतर करने में मदद मिल सकती है।

सरकार का मानना है कि इससे टोल वसूली में होने वाली संभावित अनियमितताओं को कम करने और राजस्व का नुकसान रोकने में मदद मिलेगी। हालांकि, 100 फीसदी सटीक वसूली का लक्ष्य तभी हासिल हो सकेगा, जब सिस्टम में तकनीकी खामियों और गलत भुगतान की शिकायतों का प्रभावी समाधान भी हो।

आम लोगों के लिए इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा हाईवे पर सफर को आसान बनाना होगा। अगर टोल प्लाजा पर रुकने का समय कम होता है, तो यात्रियों को अपनी मंजिल तक पहुंचने में कम देरी हो सकती है। ट्रांसपोर्ट कंपनियों के लिए भी समय और ईंधन की बचत महत्वपूर्ण होगी।

फिलहाल, साल के अंत तक करीब 400 टोल प्लाजा को बैरियर-फ्री बनाने की योजना को लेकर नजर इसके क्रियान्वयन पर रहेगी। योजना सफल होती है, तो आने वाले समय में देश की टोल व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।