भारत–कनाडा यूरेनियम डील: 2.8 अरब डॉलर के समझौते से न्यूक्लियर एनर्जी में मजबूत होगी भारत की पकड़

भारत–कनाडा यूरेनियम डील: 2.8 अरब डॉलर के समझौते से न्यूक्लियर एनर्जी में मजबूत होगी भारत की पकड़

न्यूक्लीयर पॉवर और एनर्जी को लेकर भारत अब पूरी दुनिया में अपनी छाप छोड़ने वाला है. इसके लिए सरकार कनाडा के साथ 10 साल की डील साइन करने जा रहा है. ये डील करीब 2.8 अरब डॉलर की हो सकती है. जिसके कनाडाई कंपनी भारत को यूरेनियम सप्लाई करेगी. खास बात तो ये है कि ये डील ऐसे समय पर हुई है जब अमेरिकी टैरिफ भारत और कनाडा की इकोनॉमी को नुकसान पहुंचाने का काम कर रही है. वहीं दूसरी ओर चीन एक बार फिर से ग्लोबल सप्लाई चेन में अपना प्रभुत्व जमाने की कोशिश कर रहा है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर भारत और कनाडा की यूरेनियम डील को लेकर किस तरह का अपडेट सामने आया है.

कुछ ऐसी है यूरेनियम डील

कनाडा और भारत लगभग 2.8 अरब अमेरिकी डॉलरएक निर्यात समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं, ग्लोब एंड मेल ने सोमवार को इस मामले से परिचित लोगों के हवाले से बताया. रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर कनाडा भारत को यूरेनियम भेजेगा, तो यह समझौता 10 साल तक चलेगा. यूरेनियम की सप्लाई कनाडा की कैमेको कॉर्प द्वारा की जाएगी. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह डील दोनों देशों के बीच व्यापक परमाणु सहयोग प्रयास का हिस्सा हो सकता है.

भारत सरकार, भारतीय व्यापार मंत्रालय, कनाडा सरकार और कनाडा के व्यापार मंत्रालय ने रॉयटर्स के टिप्पणी के अनुरोधों का तुरंत जवाब नहीं दिया. रॉयटर्स तुरंत इस रिपोर्ट की पुष्टि नहीं कर सका. कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने रविवार को दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में जी20 शिखर सम्मेलन से इतर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की.

फिर शुरू हुई दोनों देशों में बातचीत

भारत सरकार ने रविवार को कहा कि दोनों देश एक नए व्यापार समझौते के लिए रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू करने पर सहमत हुए हैं, जो दो साल पहले एक राजनयिक विवाद के बाद रुकी हुई थी. भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है​ कि नेताओं ने उच्च-महत्वाकांक्षी व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) पर बातचीत शुरू करने पर सहमति व्यक्त की, जिसका उद्देश्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाना है.