भारत-साइप्रस संबंधों में ऐतिहासिक उछाल: रणनीतिक साझेदारी घोषित, निवेश दोगुना करने का बड़ा लक्ष्य

भारत-साइप्रस संबंधों में ऐतिहासिक उछाल: रणनीतिक साझेदारी घोषित, निवेश दोगुना करने का बड़ा लक्ष्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडेस के बीच शुक्रवार को दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक ने दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाई दी है। दोनों नेताओं ने डेलीगेशन लेवल की विस्तृत बातचीत की, जिसमें विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी शामिल रहे।

आम भारतीय नागरिक के लिए यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मजबूत अंतरराष्ट्रीय साझेदारी से न सिर्फ अर्थव्यवस्था को बल मिलता है, बल्कि रोजगार, निवेश और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक के बाद कहा कि दोनों देशों की मित्रता मजबूत और भविष्योन्मुखी है।

रणनीतिक साझेदारी और निवेश को नई दिशा

बैठक में दोनों देशों ने अपने संबंधों को औपचारिक रूप से रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दे दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले एक दशक में साइप्रस से भारत में निवेश लगभग दोगुना हो चुका है। अब अगले पांच वर्षों में इसे फिर से दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।

दोनों देश लोकतंत्र, कानून के शासन और संप्रभुता के सम्मान जैसे साझा मूल्यों पर आधारित अपनी साझेदारी को आगे बढ़ाना चाहते हैं। साइप्रस भारत के शीर्ष 10 निवेशकों में शामिल है और भारत-यूरोपीय संघ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार व निवेश के नए अवसर खुलेंगे।

व्यापार, रक्षा और गिफ्ट सिटी पर विशेष जोर

दोनों पक्षों ने वित्तीय सेवाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा और कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। साइप्रस को भारत और यूरोप के बीच महत्वपूर्ण निवेश गेटवे के रूप में देखा जा रहा है। गिफ्ट सिटी को ग्लोबल फाइनेंशियल हब बनाने के लिए सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा हुई।

रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में भी प्रगति हुई। मिलिट्री एक्सचेंज, ट्रेनिंग, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग को और गहरा करने का फैसला लिया गया। इंडो-पैसिफिक ओशन इनिशिएटिव और इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी दोनों देश साथ काम करने को तैयार हैं।

वैश्विक चुनौतियों पर एकमत

प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया जैसे क्षेत्रों में चल रहे संघर्षों पर चिंता जताई। दोनों नेताओं ने शांति स्थापना के प्रयासों का समर्थन करने और वैश्विक संस्थाओं के सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।

विदेश मंत्रालय ने इस यात्रा को दोनों देशों के संबंधों में महत्वपूर्ण मोड़ बताया। साइप्रस में रह रहे भारतीय पेशेवरों और छात्रों की भूमिका की सराहना की गई। जल्द ही माइग्रेशन एवं मोबिलिटी पार्टनरशिप और सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट पर काम तेज करने का फैसला हुआ। साथ ही शिक्षा, संस्कृति और स्टार्टअप इकोसिस्टम के बीच संपर्क बढ़ाने पर भी सहमति बनी।

यह बैठक दिखाती है कि भारत वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय साझेदारों के साथ अपने संबंधों को मजबूत कर रहा है। आम आदमी के नजरिए से देखें तो ऐसे समझौते से आर्थिक विकास तेज होगा, नौकरियां बढ़ेंगी और भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि और मजबूत बनेगी। आने वाले समय में इन फैसलों का असर व्यापार, निवेश और सुरक्षा क्षेत्र में साफ दिखाई देगा।