भारत और अमेरिका के रिश्तों में इस वक्त सिर्फ कूटनीति नहीं, बल्कि रणनीतिक जरूरतें भी साफ दिखाई दे रही हैं. दिल्ली में विदेश मंत्री एस जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मुलाकात इसी बदलते वैश्विक माहौल के बीच हुई, जहां बातचीत सिर्फ औपचारिक मुद्दों तक सीमित नहीं रही. ईरान-इजरायल तनाव, होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा, ऊर्जा संकट, रूस-यूक्रेन युद्ध, आतंकवाद और व्यापार जैसे कई ऐसे मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनका सीधा असर दुनिया की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर पड़ सकता है.
बैठक के बाद दोनों नेताओं ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की और साफ संकेत दिए कि भारत और अमेरिका अब सिर्फ साझेदार नहीं, बल्कि कई वैश्विक चुनौतियों में एक-दूसरे के भरोसेमंद सहयोगी बनते जा रहे हैं.
होर्मुज और तेल संकट पर सबसे ज्यादा फोकस
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने साफ कहा कि भारत के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता अपने 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है. ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ रहा है और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दुनिया चिंतित है, भारत के लिए तेल और गैस की निर्बाध सप्लाई बेहद अहम हो जाती है.
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक रास्तों में से एक माना जाता है. दुनिया का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से तेल सप्लाई पर निर्भर है. अगर यहां किसी तरह का संकट गहराता है तो उसका असर सीधे पेट्रोल-डीजल की कीमतों और वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है.
जयशंकर ने बताया कि अमेरिका के साथ ऊर्जा सुरक्षा, तेल सप्लाई और सिविल न्यूक्लियर सहयोग पर विस्तार से बातचीत हुई. दोनों देशों ने ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ते सहयोग का स्वागत भी किया.
ट्रेड डील पर बढ़ी रफ्तार, जल्द भारत आएगी अमेरिकी टीम
भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ता को लेकर भी इस बैठक में अहम प्रगति देखने को मिली. जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के बीच ट्रेड डील पर बातचीत आगे बढ़ रही है और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल जल्द भारत आएगा.
इस दौरे का मकसद व्यापार समझौते के अंतिम मसौदे को तैयार करना होगा. माना जा रहा है कि अगर यह समझौता आगे बढ़ता है तो टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन जैसे कई सेक्टरों में दोनों देशों के आर्थिक रिश्ते और मजबूत होंगे.
भारत के लिए यह समझौता ऐसे समय में अहम माना जा रहा है, जब दुनिया में सप्लाई चेन और व्यापारिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं.
आतंकवाद और इंडो-पैसिफिक पर साझा रणनीति
बैठक में सुरक्षा और रणनीतिक मामलों पर भी गहरी चर्चा हुई. जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों आतंकवाद जैसी साझा चुनौती का सामना कर रहे हैं और इस मुद्दे पर सहयोग लगातार बढ़ रहा है.
वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को अमेरिका का अहम रणनीतिक साझेदार बताया. उन्होंने कहा कि दोनों देशों की सोच कई बड़े वैश्विक मुद्दों पर एक जैसी है. रुबियो ने समुद्री सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि दुनिया के अहम जलमार्गों को कोई “बंधक” नहीं बना सकता.
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता और समुद्री रास्तों की सुरक्षा को लेकर भी दोनों देशों के बीच सहमति दिखाई दी. यह वही क्षेत्र है जहां चीन की बढ़ती गतिविधियों को लेकर दुनिया की कई बड़ी ताकतें सतर्क हैं.
वीजा और माइग्रेशन पर भी खुलकर हुई बात
बैठक में भारतीयों के अमेरिकी वीजा और माइग्रेशन से जुड़े मुद्दे भी उठे. जयशंकर ने कहा कि जो भारतीय कानूनी तरीके से अमेरिका जाते हैं, उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना नहीं करना चाहिए.
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अवैध तरीके से अमेरिका पहुंचने वाले लोगों के मामलों में भारत, अमेरिका के साथ सहयोग करेगा.
मार्को रुबियो ने माना कि अमेरिका इस समय गंभीर माइग्रेशन संकट से गुजर रहा है. उनके मुताबिक करीब दो करोड़ लोग गैर-कानूनी तरीके से अमेरिका में रह रहे हैं. उन्होंने कहा कि नई माइग्रेशन पॉलिसी किसी खास देश को निशाना बनाकर नहीं बनाई गई है, लेकिन मौजूदा बदलावों का असर कुछ भारतीयों पर भी पड़ सकता है.
रुबियो ने भरोसा दिलाया कि सिस्टम में सुधार के बाद भविष्य में भारतीय नागरिकों को बेहतर सुविधा मिलेगी.
भारत और अमेरिका की यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दुनिया कई मोर्चों पर अस्थिरता का सामना कर रही है. ऊर्जा से लेकर सुरक्षा और व्यापार तक, दोनों देशों की बातचीत ने यह संकेत दिया है कि आने वाले समय में यह साझेदारी सिर्फ रणनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक और वैश्विक संतुलन के लिहाज से भी बेहद अहम रहने वाली है.


