IPL 2026 पर ईंधन बचत का बड़ा प्रस्ताव: बिना दर्शकों के सीमित स्टेडियमों में बचे मैच कराने की मांग

IPL 2026 पर ईंधन बचत का बड़ा प्रस्ताव: बिना दर्शकों के सीमित स्टेडियमों में बचे मैच कराने की मांग

अमेरिका-ईरान तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर ईंधन का संकट गहराता जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत की अपील के बीच IPL 2026 अब विवादों में आ गया है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल ने केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया को पत्र लिखकर IPL के बचे हुए मैचों का नया शेड्यूल बनाने की मांग की है। प्रस्ताव है कि मैच सीमित स्टेडियमों पर बिना दर्शकों के कराए जाएं, ताकि हवाई यात्राओं और सड़क यातायात से होने वाले ईंधन के भारी खर्च को कम किया जा सके।

IPL की हवाई यात्राएं और ईंधन की खपत

IPL 2026 का आगाज 28 मार्च को हुआ था। तब से अब तक टीमें हवाई और सड़क मार्ग से लाखों किलोमीटर तय कर चुकी हैं। शेड्यूल के कारण यह यात्राएं जरूरी भी हैं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में ये भारत सरकार पर अतिरिक्त बोझ बन रही हैं।

CTI चेयरमैन बृजेश गोयल के अनुसार, IPL टीमों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले चार्टर्ड विमानों (जैसे बोइंग 737 या एयरबस A320) में प्रति घंटा 2400 से 3000 लीटर एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) खर्च होता है। दो घंटे की उड़ान में यह खपत 5000-6000 लीटर तक पहुंच जाती है। लंबी दूरी या भारी वजन की स्थिति में यह आंकड़ा 7000-8000 लीटर तक जा सकता है। अगर हर टीम की औसत 10 हवाई यात्राओं का हिसाब लगाया जाए तो एक टीम अकेले 50,000 से 70,000 लीटर ईंधन खर्च कर रही है।

बिना दर्शकों के मैच कराने का सुझाव

बृजेश गोयल ने खेल मंत्री को याद दिलाया कि कोरोना काल में भी IPL को सीमित स्टेडियमों पर सफलतापूर्वक आयोजित किया गया था। एक सामान्य मैच में करीब 50,000 दर्शक आते हैं, जिनकी आवाजाही से हजारों लीटर पेट्रोल-डीजल की खपत होती है। बिना दर्शकों के मैच कराने से न सिर्फ ईंधन बचेगा, बल्कि देश पर पड़ रहे दबाव को भी कम किया जा सकेगा।

देश के व्यापारियों और उद्यमियों के प्रमुख संगठन CTI का मानना है कि जब हर सरकारी विभाग, अधिकारी और आम नागरिक ईंधन बचत की कोशिश कर रहे हैं, तो IPL जैसे बड़े आयोजन को भी इस अभियान से जोड़ना चाहिए।

आम जनता और अर्थव्यवस्था पर असर

ईंधन का संकट सिर्फ सरकार के लिए नहीं, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी महंगाई और परेशानी बढ़ा रहा है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल का सीधा असर ट्रांसपोर्ट, किराने और रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ता है। ऐसे में IPL जैसा लोकप्रिय आयोजन अगर ईंधन बचत में अपना योगदान दे तो यह पूरे देश के लिए सकारात्मक संदेश होगा।

दूसरी ओर, क्रिकेट प्रेमी दर्शकों को स्टेडियम में आने का मौका न मिलना निराशाजनक हो सकता है, लेकिन मौजूदा संकट को देखते हुए यह एक जरूरी समझौता माना जा रहा है। नया शेड्यूल बनाकर मैच सीमित मैदानों पर कराने से लॉजिस्टिक खर्च भी कम होगा और सुरक्षा व्यवस्था भी आसान रहेगी।

CTI चेयरमैन ने साफ कहा है कि समय की मांग है कि सभी हितधारक मिलकर इस चुनौती का समाधान निकालें। प्रधानमंत्री की अपील को अगर IPL भी मान ले तो लाखों लीटर ईंधन की बचत संभव है। अब देखना यह होगा कि खेल मंत्रालय इस प्रस्ताव पर क्या फैसला लेता है।