नए सुप्रीम लीडर की सुरक्षा में तैनात ‘NOPO यूनिट’, जानिए कितनी खतरनाक है ईरान की यह स्पेशल फोर्स

नए सुप्रीम लीडर की सुरक्षा में तैनात ‘NOPO यूनिट’, जानिए कितनी खतरनाक है ईरान की यह स्पेशल फोर्स

युद्ध में घिरा हुआ ईरान इन दिनों कई फ्रंट पर संघर्ष कर रहा है. इजराइल-अमेरिकी हमले में सुप्रीम लीडर के मारे जाने के बाद ईरान ने नए सुप्रीम लीडर के रूप में मोजतबा खोमेनेई को चुना है. नए सुप्रीम लीडर पिछले महीने मारे गए सर्वोच्च नेता के बेटे हैं. इनका चयन होने के बाद से अचानक NOPO यूनिट चर्चा में आ गई है. असल में नए सुप्रीम लीडर की सुरक्षा में यही यूनिट तैनात है.

कहने की जरूरत नहीं है कि सुरक्षा में हुई चूक या इजराइल-अमेरिका की बेहतरीन प्लानिंग की वजह से ही पुराने सुप्रीम लीडर की मौत हुई है. ईरान अब उस हादसे को दोहराने नहीं देना चाहता और अमेरिका-इजराइल बार-बार धमकी देते आ रहे हैं कि जो भी सर्वोच्च लीडर बनेगा, उसे भी मारेंगे. इस सूरत में स्वाभाविक है कि नए सुप्रीम लीडर की सुरक्षा पहले से ज्यादा चाक-चौबंद रखी गई है. अब सवाल है कि क्या NOPO यूनिट, यह कितनी खतरनाक है? इस यूनिट में कितने जवान हैं? क्या-क्या हैं इसकी खूबियां? कितने एक्सपर्ट हैं इस यूनिट में?

ईरान की अभेद्य सुरक्षा दीवार है NOPO यूनिट

ईरान में जब भी सत्ता के शीर्ष नेतृत्व की सुरक्षा की बात आती है, तो सबसे पहला नाम NOPO यूनिट का आता है. यह केवल एक सुरक्षा दस्ता नहीं है, बल्कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स और पुलिस बल का वह मिश्रण है, जिसे विशेष रूप से वली-ए-फकीह यानी सर्वोच्च नेता की रक्षा के लिए तैयार किया गया है. इसे भारत की एसपीजी समझ सकते हैं, जो प्रधानमंत्री की सुरक्षा में तैनात विशेष दस्ता है. इसमें अलग-अलग सुरक्षा बलों से जवान, अफसर लिए जाते हैं. सख्त परीक्षा और ट्रेनिंग से एसपीजी के सभी जवानों अफसरों को गुजरना होता है. पलक झपकते ही ये दुश्मन का काम तमाम करने के लिए जाने जाते हैं.

क्या है NOPO यूनिट?

NOPO का पूरा नाम निरु-ये विज़े-ये पासबान-ए विलायत है. इसका गठन साल 1991 में हुआ था. इसे अक्सर ब्लैक गार्ड्स के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इनके जवान सिर से पैर तक काले कपड़ों और आधुनिक गियर में ढके रहते हैं. इनका मुख्य कार्य सर्वोच्च नेता की व्यक्तिगत सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियान और बंधक बचाव है. भारत में एनएसजी जो काम करती है, उसे ईरान में यह खास यूनिट भी करती है. मतलब यह हुआ कि ईरान में यही NOPO यूनिट सर्वोच्च लीडर की सुरक्षा के साथ ही बाकी अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां उठाती है. भारत में पीएम के लिए SPG है तो बाकी अन्य टास्क के लिए एनएसजी उपलब्ध है.

कितनी खतरनाक है यह यूनिट?

NOPO यूनिट को खतरनाक बनाने वाली सबसे बड़ी बात उनकी ट्रेनिंग और वफादारी है. इनके लिए सर्वोच्च नेता की सुरक्षा केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि एक धार्मिक कर्तव्य है. इन्हें अत्यधिक मनोवैज्ञानिक दबाव में काम करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है. ये जवान दुनिया के सबसे आधुनिक हथियारों जैसे कि MP5 सबमशीन गन, SIG Sauer पिस्तौल और स्वदेशी ईरानी असॉल्ट राइफलों से लैस होते हैं. सार्वजनिक कार्यक्रमों में ये जवान न केवल वर्दी में होते हैं, बल्कि सादे कपड़ों में भीड़ के बीच भी मौजूद रहते हैं, जिससे हमलावर के लिए इनकी पहचान करना नामुमकिन होता है.

यूनिट में कितने जवान, कैसा है सेलेक्शन प्रॉसेस?

NOPO में जवानों और एक्सपर्ट की सटीक संख्या को ईरान सार्वजनिक नहीं करता. हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का के हवाले से अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने रिपोर्ट किया है कि इस विशेष बल में दो से पांच हजार के बीच सक्रिय जवान हो सकते हैं. इनकी चयन प्रक्रिया बेहद कठिन है. हजारों आवेदकों में से केवल कुछ सौ का ही चयन होता है.

उम्मीदवार की और उसके परिवार की वैचारिक वफादारी की गहन जांच की जाती है. जवानों को मार्शल आर्ट्स, तैराकी, पर्वतारोहण और लंबी दूरी की दौड़ में उत्कृष्ट होना अनिवार्य है. फॉक्स न्यूज लिखता है कि NOPO सिर्फ छह ब्रिगेड से बनी है. इनमें से चार ब्रिगेड तेहरान में, एक मशहद में और एक इस्फहान में तैनात बताई गई हैं.

क्या है इस यूनिट की खूबियां?

NOPO यूनिट के जवान कई क्षेत्रों में महारथ हासिल किए होते हैं. इस यूनिट के लगभग हर जवान के पास कराटे, जूडो या ताइक्वांडो में ब्लैक बेल्ट होती है. वे बिना हथियार के भी दुश्मन को चंद सेकंड में ढेर करने की क्षमता रखते हैं. इनके पास दुनिया के बेहतरीन स्नाइपर्स की एक टीम है, जो एक किलोमीटर से भी अधिक दूरी से सटीक निशाना लगा सकते हैं. ये जवान केवल शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि साइबर सुरक्षा और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस में भी माहिर होते हैं. वे किसी भी संभावित खतरे को भांपने के लिए आधुनिक रडार और जैमर्स का उपयोग करते हैं. तंग गलियों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में सुरक्षा घेरा बनाने में इन्हें महारत हासिल है.

जंग के बीच कवच की भूमिका

वर्तमान में जब ईरान और इजरायल के बीच तनाव चरम पर है. NOPO यूनिट की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है. हाल के महीनों में ईरान ने अपने सुरक्षा प्रोटोकॉल को कई गुना बढ़ा दिया है. NOPO अब पोर्टेबल एंटी-ड्रोन गन के साथ तैनात रहती है ताकि किसी भी संभावित ड्रोन हमले को हवा में ही नाकाम किया जा सके. सर्वोच्च नेता के आवागमन के लिए ये यूनिट गुप्त सुरंगों और बुलेटप्रूफ वाहनों के काफिले का उपयोग करती है, जिसकी निगरानी सैटेलाइट के जरिए की जाती है. इस यूनिट का रिस्पांस टाइम दुनिया में सबसे कम माना जाता है. किसी भी हमले की स्थिति में ये जवान 3 से 5 सेकंड के भीतर मानव ढाल बनाने में सक्षम हैं.

सुरक्षा एजेंसियों से ये अलग क्यों?

ईरान में कई सुरक्षा एजेंसियां हैं जैसे बसीज या कुद्स फोर्स लेकिन NOPO का ध्यान केवल आंतरिक सुरक्षा और नेतृत्व की रक्षा पर केंद्रित है. जहां कुद्स फोर्स विदेशी अभियानों के लिए जानी जाती है, वहीं NOPO ईरान की धरती पर सर्वोच्च नेता के चारों ओर एक अभेद्य घेरा सुनिश्चित करती है. इस यूनिट को अमेरिका ने साल 2021 में प्रतिबंधित कर दिया था. इससे अंदाजा लगाना आसान होता है कि इसके जवान किस हद तक खतरनाक होंगे.

सार यह है कि NOPO यूनिट ईरान की शक्ति का वह प्रतीक है जो खामोशी से काम करता है. इनकी ट्रेनिंग, आधुनिक हथियार और सर्वोच्च नेता के प्रति अटूट निष्ठा इन्हें दुनिया की सबसे घातक सुरक्षा इकाइयों में से एक बनाती है. युद्ध के इस दौर में, वे न केवल एक सुरक्षा बल हैं, बल्कि ईरान के राजनीतिक और धार्मिक अस्तित्व के रक्षक भी हैं.

जंग के बीच कवच की भूमिका

वर्तमान में जब ईरान और इजरायल के बीच तनाव चरम पर है. NOPO यूनिट की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है. हाल के महीनों में ईरान ने अपने सुरक्षा प्रोटोकॉल को कई गुना बढ़ा दिया है. NOPO अब पोर्टेबल एंटी-ड्रोन गन के साथ तैनात रहती है ताकि किसी भी संभावित ड्रोन हमले को हवा में ही नाकाम किया जा सके. सर्वोच्च नेता के आवागमन के लिए ये यूनिट गुप्त सुरंगों और बुलेटप्रूफ वाहनों के काफिले का उपयोग करती है, जिसकी निगरानी सैटेलाइट के जरिए की जाती है. इस यूनिट का रिस्पांस टाइम दुनिया में सबसे कम माना जाता है. किसी भी हमले की स्थिति में ये जवान 3 से 5 सेकंड के भीतर मानव ढाल बनाने में सक्षम हैं.

सुरक्षा एजेंसियों से ये अलग क्यों?

ईरान में कई सुरक्षा एजेंसियां हैं जैसे बसीज या कुद्स फोर्स लेकिन NOPO का ध्यान केवल आंतरिक सुरक्षा और नेतृत्व की रक्षा पर केंद्रित है. जहां कुद्स फोर्स विदेशी अभियानों के लिए जानी जाती है, वहीं NOPO ईरान की धरती पर सर्वोच्च नेता के चारों ओर एक अभेद्य घेरा सुनिश्चित करती है. इस यूनिट को अमेरिका ने साल 2021 में प्रतिबंधित कर दिया था. इससे अंदाजा लगाना आसान होता है कि इसके जवान किस हद तक खतरनाक होंगे.

सार यह है कि NOPO यूनिट ईरान की शक्ति का वह प्रतीक है जो खामोशी से काम करता है. इनकी ट्रेनिंग, आधुनिक हथियार और सर्वोच्च नेता के प्रति अटूट निष्ठा इन्हें दुनिया की सबसे घातक सुरक्षा इकाइयों में से एक बनाती है. युद्ध के इस दौर में, वे न केवल एक सुरक्षा बल हैं, बल्कि ईरान के राजनीतिक और धार्मिक अस्तित्व के रक्षक भी हैं.