ईरान में बगावत की आग! सत्ता गिरी तो मॉस्को भाग सकते हैं खामेनेई, खुफिया रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

ईरान में बगावत की आग! सत्ता गिरी तो मॉस्को भाग सकते हैं खामेनेई, खुफिया रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

ईरान में पिछले दिनों शुरू हुए विरोध प्रदर्शन की आग सुलगती ही जा रही है. इस बीच अब बड़ी खबर सामने आई है. देश में बढ़ती बगावत की आग के बीच सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई मॉस्को भाग सकते हैं. द टाइम्स के साथ साझा की गई एक खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, अगर ईरान में खोमेनेई का शासन गिर जाता है तो वो मॉस्को जा सकते हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि 86 वर्षीय खामेनेई तब तेहरान छोड़कर अपने सहयोगियों और परिवार के सदस्यों के साथ देश से निकल जाएंगे, अगर उनकी सुरक्षा एजेंसियां बढ़ते प्रदर्शनों को दबाने में नाकाम रहती है या अशांति के बीच उनका साथ छोड़ देती हैं.

क्या है खोमेनेई का प्लान-B

ब्रिटिश अखबार को एक खुफिया सूत्र ने बताया, खामेनेई के लिए प्लान बी यह है कि वो अपने बेहद करीबी सहयोगियों और परिवार के साथ, जिनमें उनका बेटा और नामित उत्तराधिकारी मोजतबा भी शामिल है, देश छोड़ सकते हैं. इस प्लान के तहत वे अपने करीबी लगभग 20 सहयोगियों और परिवार के सदस्यों के साथ ईरान छोड़ सकते हैं.

इससे पहले दिसंबर 2024 में, सीरिया के तत्कालीन राष्ट्रपति बशर अल-असद, जो रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और खामेनेई दोनों के सहयोगी थे, विद्रोहियों के सत्ता पर कब्जे के बाद मॉस्को भाग गए थे.

कैसे भागेंगे रूस?

सूत्र के अनुसार, अगर उन्हें भागने की जरूरत महसूस होती है, तो उन्होंने तेहरान से बाहर निकलने का एक रास्ता पहले से तय कर रखा है, जिसमें विदेशों में संपत्तियां और प्रॉपर्टी जुटाना शामिल है, ताकि सुरक्षित रूप से निकलने की व्यवस्था की जा सके.

द टाइम्स ने यह भी बताया कि जून में इजराइल के साथ हुए 12 दिनों के युद्ध के बाद खामेनेई अब मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर हो गए हैं.

देश में बढ़ते जा रहे प्रदर्शन

ईरान में बढ़ते आर्थिक संकट, महंगाई, गिरती करेंसी के चलते लोगों का गुस्सा फूटा. तेहरान में दुकानदार हड़ताल पर चले गए. इसी के बाद देखते ही देखते पूरे देश में विरोध की आग फैल गई. लोग महंगाई के खिलाफ सड़कों पर निकल आए और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की जा रही है. कई जगह पर आगजनी हो रही है.

रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि शासन के खिलाफ बढ़ते और लगातार अधिक हिंसक होते प्रदर्शनों के बीच देश को सर्वाइवल मोड में धकेल दिया गया है. मानवाधिकार संगठनों ने रविवार को बताया कि ईरान में एक हफ्ते से जारी अशांति के दौरान कम से कम 16 लोगों की मौत हो चुकी है. पूरे हफ्ते मौतों और गिरफ्तारियों की खबरें सामने आई हैं.

ये पिछले तीन सालों में सबसे बड़े विरोध प्रदर्शन माने जा रहे हैं. अर्थव्यवस्था की बदहाली और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव की वजह से ईरान इस समय कमजोर स्थिति में है.

मसूद पेजेशकियान का बयान

इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशि ने गृह मंत्रालय से प्रदर्शनकारियों के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार रवैया अपनाने को कहा है. सरकारी मीडिया में प्रकाशित उनके बयान के अनुसार उन्होंने कहा कि समाज को जोर-जबरदस्ती के तरीकों से न तो समझाया जा सकता है और न ही शांत किया जा सकता है.

ट्रंप ने दी चेतावनी

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा की गई तो वो उनकी मदद के लिए आगे आ सकते हैं. शुक्रवार को उन्होंने कहा, हम पूरी तरह तैयार हैं , हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वो किस तरह की कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं.

इस चेतावनी के बाद ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से क्षेत्र में तैनात अमेरिकी बलों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की धमकियां दी गईं. सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने कहा कि ईरान दुश्मन के आगे झुकेगा नहीं.

कई लोगों की हुई गिरफ्तारी

नॉर्वे स्थित कुर्द मानवाधिकार संगठन हेंगॉ ने बताया कि प्रदर्शनों की शुरुआत से अब तक कम से कम 17 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के नेटवर्क HRANA के अनुसार कम से कम 16 लोगों की मौत हुई है और 582 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.