ईरान ने पाकिस्तान में US वार्ता की खबरों को किया खारिज, शांति बातचीत पर गहराया सस्पेंस

ईरान ने पाकिस्तान में US वार्ता की खबरों को किया खारिज, शांति बातचीत पर गहराया सस्पेंस

Iran ने उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि उसके वरिष्ठ अधिकारी Pakistan पहुंच चुके हैं और अमेरिका के साथ बातचीत शुरू होने वाली है। सरकारी मीडिया के मुताबिक, न तो विदेश मंत्री Abbas Araghchi और न ही संसद अध्यक्ष Mohammad Baqer Qalibaf देश से बाहर गए हैं। इस बयान ने उस संभावित शांति वार्ता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, जिसकी चर्चा पिछले कुछ दिनों से तेज थी।

‘अभी बातचीत नहीं’, लेबनान बना सबसे बड़ा अड़ंगा

ईरान ने साफ कहा है कि जब तक अमेरिका लेबनान में युद्धविराम से जुड़े अपने वादों को पूरा नहीं करता और इजरायल के हमले जारी रहते हैं, तब तक कोई बातचीत नहीं होगी। Lebanon में हालिया हमलों को ईरान ने युद्धविराम का उल्लंघन बताया है। यही वजह है कि तेहरान ने फिलहाल वार्ता को “होल्ड” पर रखने का फैसला किया है।

रिपोर्ट्स में विरोधाभास, बढ़ी अनिश्चितता

दिलचस्प बात यह है कि कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स, खासकर Wall Street Journal, ने दावा किया था कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच चुका है। वहीं पाकिस्तान में ईरान के राजदूत Reza Amir Moghadam ने पहले सोशल मीडिया पर 10 सदस्यीय टीम के आने की बात कही थी, लेकिन बाद में वह पोस्ट हटा दी गई। इससे स्थिति और ज्यादा उलझ गई।

अमेरिका-इजरायल के बयान ने बढ़ाया तनाव

Donald Trump और Benjamin Netanyahu पहले ही साफ कर चुके हैं कि जो दो हफ्तों का सीजफायर तय हुआ है, वह लेबनान पर लागू नहीं होता। इस बीच, इजरायल ने लेबनान में बड़े हवाई हमले किए, जिसमें सैकड़ों लोगों की मौत की खबर है। इससे पहले से नाजुक स्थिति और बिगड़ गई है।

पाकिस्तान की तैयारी जारी, लेकिन तस्वीर साफ नहीं

अनिश्चितता के बावजूद Shehbaz Sharif की सरकार वार्ता की मेजबानी की तैयारी में जुटी है। 10 अप्रैल को संभावित बातचीत के लिए सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। विदेश मंत्री Ishaq Dar ने प्रतिनिधियों और पत्रकारों के लिए “वीजा ऑन अराइवल” की घोषणा भी की है।

अमेरिकी टीम तैयार, लेकिन फॉर्मेट पर सस्पेंस

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति JD Vance कर सकते हैं। उनके साथ स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर जैसे नाम भी जुड़े हैं। हालांकि व्हाइट हाउस ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि बातचीत सीधे होगी या परोक्ष, और इससे क्या नतीजे निकल सकते हैं।

निष्कर्ष: कूटनीति और संघर्ष के बीच फंसी स्थिति

पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि कूटनीतिक प्रयास और जमीनी हालात के बीच बड़ा अंतर है। एक तरफ बातचीत की कोशिशें हैं, तो दूसरी तरफ लगातार सैन्य तनाव। अब यह देखना अहम होगा कि क्या ये वार्ता आगे बढ़ती है या हालात और जटिल हो जाते हैं।