धनखड़ ने क्यों छोड़ा उपराष्ट्रपति पद, बीमारी बहाना या बीजेपी से बगावत? जानिए सियासी पर्दे के पीछे की कहानी!

धनखड़ ने क्यों छोड़ा उपराष्ट्रपति पद, बीमारी बहाना या बीजेपी से बगावत? जानिए सियासी पर्दे के पीछे की कहानी!

देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अचानक अपने पद से इस्तीफा देकर हर किसी को चौंका दिया. वजह बताई गई—स्वास्थ्य. लेकिन सवाल ये उठता है कि दिनभर राज्यसभा में सक्रिय रहने वाले धनखड़ की तबीयत अचानक शाम को इतनी बिगड़ गई कि उन्होंने पद ही छोड़ दिया? सत्ता पक्ष चुप है, लेकिन विपक्ष को इसमें कुछ काला नजर आ रहा है. सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज है—क्या यह फैसला वाकई मेडिकल है या फिर इसके पीछे कोई गहरी सियासी वजह छुपी है?

 चुप्पी भी बन गई बयान!

धनखड़ ने न इस्तीफे के बाद कोई भावुक भाषण दिया, न कोई सार्वजनिक सफाई. यहां तक कि बीजेपी के बड़े नेताओं ने भी इस पर कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दी. प्रधानमंत्री मोदी ने जरूर सोशल मीडिया पर उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की, लेकिन बस इतना ही. सवाल है—क्या ये चुप्पी किसी टकराव का संकेत है? या फिर ये बताती है कि इस्तीफा ‘मर्जी से’ कम और ‘मजबूरी’ में ज़्यादा दिया गया?

BAC की बैठक और अनदेखी—क्या यही बना इस्तीफे का ट्रिगर?

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक दिलचस्प दावा किया है. उनके मुताबिक, 21 जुलाई को धनखड़ दो बैठकों की अध्यक्षता कर रहे थे. दोपहर की बैठक में तो सब कुछ ठीक रहा, लेकिन शाम की बैठक में जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू नहीं पहुंचे. सबसे अहम बात—धनखड़ को इस बारे में कोई सूचना तक नहीं दी गई. जयराम रमेश का कहना है कि ये अनदेखी धनखड़ को बुरी लगी और यहीं से उनके मन में कुछ खटका. क्या यह महज़ संयोग था या कोई संकेत? विपक्ष की थ्योरी कहती है—इसी के बाद इस्तीफे की पटकथा तैयार हुई.

महाभियोग की चाल ने बिगाड़ी बात?

सूत्रों की मानें तो उपराष्ट्रपति धनखड़ ने हाल ही में जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए महाभियोग प्रस्ताव को बिना केंद्र सरकार से मशविरा किए स्वीकार कर लिया था. यही नहीं, न पीएमओ को बताया गया, न संसदीय कार्य मंत्रालय और न ही जेपी नड्डा को. इस कदम ने सरकार को चौंका दिया. दरअसल, केंद्र सरकार जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग लाने के पक्ष में नहीं थी, क्योंकि इससे जस्टिस यादव का पुराना मामला भी फिर से गर्म हो सकता था, जो सरकार नहीं चाहती थी. ऐसे में धनखड़ का यह एकतरफा फैसला सरकार को नागवार गुज़रा.

बीजेपी की लाइन से बाहर जा रहे थे धनखड़?

पिछले कुछ महीनों से उपराष्ट्रपति के तौर पर धनखड़ की कार्यशैली कुछ ऐसी हो गई थी जो सरकार की रणनीति से मेल नहीं खा रही थी. कभी न्यायपालिका पर खुली टिप्पणियां, कभी विपक्ष के प्रति नरमी और कभी बिना सलाह के बड़े फैसले—ये सब बीजेपी को रास नहीं आ रहा था. 74 साल के जगदीप धनखड़ का कुछ वक्त पहले ही हार्ट सर्जरी भी हुआ था, लेकिन 7 जुलाई को उन्होंने खुद कहा था कि वो अगस्त 2027 तक पद पर बने रहेंगे. फिर अचानक इस्तीफा—सवाल उठना लाजमी है.

उपराष्ट्रपति का पद खाली हो गया है, और नियम के मुताबिक 60 दिनों के भीतर नया उपराष्ट्रपति चुनना होगा. लेकिन पीएम मोदी विदेश दौरे पर जाने वाले हैं, ऐसे में प्रक्रिया में देरी भी हो सकती है. अब नज़र इस बात पर है कि एनडीए अगला चेहरा कौन लाता है—कोई पार्टी का भरोसेमंद नेता या विपक्ष को भी साध सकने वाला कोई संतुलित चेहरा?