ईरान-अमेरिका तनाव के बीच UAE पहुंचे जयशंकर, ऊर्जा और क्षेत्रीय रणनीति पर होगी अहम बातचीत

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच UAE पहुंचे जयशंकर, ऊर्जा और क्षेत्रीय रणनीति पर होगी अहम बातचीत

S. Jaishankar का दो दिन का UAE दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब Iran और United States के बीच संघर्ष के बाद नाजुक युद्धविराम बना हुआ है। यह दौरा भारत की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें वह पश्चिम एशिया के प्रमुख साझेदारों के साथ अपने संबंध और मजबूत करना चाहता है। खास बात यह है कि इसी दौरान Islamabad में शांति वार्ता भी चल रही है।

ऊर्जा सुरक्षा सबसे बड़ा एजेंडा

इस यात्रा का सबसे अहम मुद्दा ऊर्जा आपूर्ति है। United Arab Emirates भारत के लिए प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में से एक है। हालिया संघर्ष के कारण Strait of Hormuz के प्रभावित होने से भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा है। इसके अलावा कतर से आने वाली LNG सप्लाई भी बाधित हुई है। ऐसे में जयशंकर UAE के साथ दीर्घकालिक ऊर्जा सहयोग और आपूर्ति स्थिर रखने पर जोर देंगे।

अबू धाबी के साथ मजबूत रिश्ते, लगातार हाई-लेवल संपर्क

हाल के महीनों में भारत और UAE के बीच कई उच्च स्तरीय मुलाकातें हुई हैं। UAE के राष्ट्रपति Mohamed bin Zayed Al Nahyan (MBZ) जनवरी में भारत आए थे, वहीं अबू धाबी के क्राउन प्रिंस और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी लगातार दौरे किए। जयशंकर की मुलाकात उनके समकक्ष Abdullah bin Zayed Al Nahyan से होने की संभावना है। इसके अलावा MBZ से मुलाकात भी हो सकती है।

पाकिस्तान-UAE संबंधों पर भी नजर

इस दौरे का एक अहम पहलू Pakistan और UAE के बीच बढ़ते तनाव को समझना भी है। हाल ही में UAE ने पाकिस्तान से करीब 3.55 अरब डॉलर के कर्ज की वापसी मांगी है। यह कदम ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से दबाव में है। इससे क्षेत्रीय समीकरणों में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं, जिन्हें भारत करीब से समझना चाहता है।

भारतीय समुदाय और सुरक्षा पर भी फोकस

युद्ध के दौरान कई भारतीय नागरिक फंसे थे, जिनकी सुरक्षा में UAE ने अहम भूमिका निभाई। जयशंकर इस सहयोग के लिए धन्यवाद भी देंगे और भविष्य में ऐसी स्थितियों से निपटने पर चर्चा करेंगे।

मॉरीशस से UAE तक, व्यापक कूटनीतिक प्रयास

इससे पहले जयशंकर Port Louis में इंडियन ओशन कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए, जहां उन्होंने ओमान, सऊदी अरब और मिस्र के नेताओं से भी बातचीत की। यह दिखाता है कि भारत इस समय पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में सक्रिय कूटनीतिक रणनीति अपना रहा है।

निष्कर्ष: ऊर्जा और कूटनीति के बीच संतुलन

जयशंकर का यह दौरा केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय रणनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अब यह देखना अहम होगा कि इस बातचीत से भारत को कितनी स्थिरता और सहयोग मिल पाता है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक हालात तेजी से बदल रहे हैं।